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यूपी में किसके चेहरे का नूर उतर रहा है?

इस वक्त यूपी में बीएसपी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में है.

Updated On: Dec 26, 2016 06:34 PM IST

Amitesh Amitesh

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यूपी में किसके चेहरे का नूर उतर रहा है?

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी के कार्यकर्ताओं का नूर उतर रहा है.

दरअसल ये मायावती का अमित शाहत पर पलटवार था. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि यूपी चुनाव में  मायावती के चेहरे का नूर उतर रहा है.

फिर सवाल यही खड़ा हो रहा है कि चुनाव का बिगुल बजने से पहले यूपी में आखिरकार किसके चेहरे का नूर उतर रहा है? अगर ऐसा हो रहा है तो क्यों हो रहा है?

बीजेपी और मायावती के बीच वार-पलटवार का दौर आजकल खूब हो रहा है. जब-जब प्रधानमंत्री की यूपी में कोई रैली होती है तो उसका जवाब देने मायावती खुद मैदान में उतर जाती हैं.

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बीएसपी और एसपी के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर खींचतान 

अब हाल के घटनाक्रम पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर सुगबुगाहट चल रही है. गाहे-बगाहे इन दोनों दलों के गठबंधन होने को लेकर कयास लगते रहे हैं.

अगर यह गठबंधन होता है तो मायावती के लिए चिंता की बात हो सकती है. चिंता इस मायने में क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक का झुकाव इस गठबंधन के साथ हो सकता है.

यूपी की सियासत पर गौर करें तो यहां मुस्लिम वोट बैंक पर एसपी, कांग्रेस और बीएसपी की नजर है. सबसे ज्यादा जोर तो इस बार मायावती दे रही हैं.

यूपी में मुसलमानों की आबादी राज्य की कुल आबादी की करीब 18 से 19 फीसदी है. यूपी के करीब 73 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोटर असरदार हो सकते हैं. आम तौर पर मुस्लिम वोटरों का अधिकांश हिस्सा एसपी का समर्थन करता आया है.

सीएसडीएस के सर्वे के मुताबिक 2002 के यूपी विधानसभा के चुनाव में करीब 54 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं ने एसपी को वोट दिया था. 2009 में सिर्फ 30 फीसदी मुस्लिम वोटरों ने एसपी को वोट दिया था. जबकि 2014 के चुनावों में यह 58 फीसदी था.

बीएसपी को 2014 में करीब 18 फीसदी मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिला था. आमतौर पर कांग्रेस को 11 फीसदी मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिलता आया है.

बीएसपी इस बार 100 से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने की तैयारी में है. वहीं दूसरी तरफ बार-बार हर मंच से मायावती की तरफ से खुलकर इस समाज के लोगों से वोट न बंटने देने की अपील की जा रही है.

मायावती को इस बार लग रहा है कि मुलायम परिवार के घर के झगड़े को लेकर जमीनी स्तर पर संदेश गलत जा रहा है. एसपी कार्यकर्ता भ्रम में हैं और पार्टी दो खेमों में बंटी है.

मायावती इसी मौके का फायदा उठाकर मुस्लिम समाज के लोगों को बीजेपी का डर दिखा रही हैं. उन्हें लगता है कि लगातार मुलायम के साथ रहने वाले मुस्लिम समाज को अपने पाले में लाने का इससे बेहतर मौका और हो नहीं सकता.

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राहुल और अखिलेश दोनों एक दूसरे के गुडबुक्स में हैं

एसपी और कांग्रेस गठबंधन ने उड़ाई विरोधियों की नींद 

ऐसे में जब एसपी और कांग्रेस के गठबंधन के कयास लगे तो पहले ही उन्होंने हमला बोल दिया. आरोप लगाया कि एसपी और कांग्रेस के गठबंधन के पीछे भी बीजेपी का हाथ है.

इस वक्त यूपी में बीएसपी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में है. लिहाजा इस तरह के गठबंधन के जरिए समीकरण खराब करने का आरोप माया ने जड़ दिया. मायावती ने आयकर विभाग पर एसपी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में मदद करने का आरोप भी लगा दिया.

बीजेपी की तरफ से उनके आरोपों को लेकर तल्ख प्रतिक्रिया दी जा रही है. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा का कहना है कि बुआ और बबुआ के चेहरे से नकाब उतर चुका है. दोनों एक-दूसरे के भ्रष्टाचार को कवर अप करना चाहते हैं. लेकिन, यूपी की जनता सब समझ गई है.

हकीकत जो भी है लेकिन, उनकी बेचैनी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसपी और कांग्रेस के गठबंधन की सुगबुगाहट किस तरह उनकी नींद उड़ा कर रख दी है.

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माया का नया सामाजिक समीकरण 

तो क्या माना जाए, मायावती ने इस बार पूरी तरह से दलित-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर यूपी में वापसी का समीकरण बैठा लिया है.

क्या 2007 के दलित-ब्राम्हण सामाजिक समीकरण की तरह इस बार का नया सामाजिक समीकरण मायावती को इस मुकाम पर पहुंचा देगा. जिससे सबसे बड़े प्रदेश की बागडोर उनके हाथों में आ जाए.

शायद उनकी सोच तो यही है, वरना इस कदर उनके चेहरे पर बेचैनी न होती. लेकिन, यह बेचैनी बीजेपी में भी है और सत्ता पर काबिज एसपी में भी. और शायद इसी बेचैनी में इन सबके चेहरे का नूर उतरने लगा है...

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