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टिकट के दंगल में चला शिवपाल का दांव, अखिलेश हुए अखाड़े से बाहर

शिवपाल सिंह यादव के उन सभी आठ समर्थक मंत्रियों को टिकट दे दिया गया है, जिन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया था.

Updated On: Dec 28, 2016 07:30 PM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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टिकट के दंगल में चला शिवपाल का दांव, अखिलेश हुए अखाड़े से बाहर

सपा की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 325 उम्मीदवारों की सूची आने के बाद क्या यादव परिवार में पिछले कई महीनों से चाचा-भतीजा के बीच जारी जंग खत्म हो जाएगी? इस सवाल का सीधा जवाब यह है कि उत्तर प्रदेश के सपा अध्यक्ष शिवपाल यादव व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के बीच जारी जंग चुनाव नतीजे आने के बाद भी जारी रहेगी.

पहली सूची जारी होने के बाद अखिलेश यादव की यह टिप्पणी सपा के लिए शुभ संकेत नहीं है कि जिन लोगों का टिकट कटा है, उनको टिकट दिलाने के लिए वे नेताजी से बातचीत करेंगे. उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते समय अखिलेश यादव का मौजूद न रहना और शिवपाल सिंह यादव की मौजूदगी से स्पष्ट है कि मुलायम सिंह यादव का झुकाव किस तरफ है.

अखिलेश के करीबी मंत्रियों का टिकट कटा

अखिलेश यादव के करीबी तीन मंत्रियों का टिकट काटकर मुलायम सिंह यादव ने यह साफ जाहिर कर दिया कि अखिलेश को भावी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा. मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सपा में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्‍यमंत्री के तौर पर किसी को पेश करने की परम्परा नहीं है. कुछ सप्ताह पूर्व मुलायम व शिवपाल दोनों ने ऐलान किया था कि अखिलेश ही मुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे.

शिवपाल सिंह यादव के उन सभी आठ समर्थक मंत्रियों को टिकट दे दिया गया है, जिन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया था. इसका अर्थ यह है कि आनेवाले दिनों में शिवपाल-अखिलेश के बीच जारी राजनीतिक जंग थमेगी नहीं. मुलायम सिंह यादव की यह घोषणा भी अखिलेश के संदर्भ में ही है कि अब इस घोषित सूची में कोई बदलाव नहीं होगा.

यूपी में अखिलेश यादव ने अपनी अलग छवि बनाई है

यूपी में अखिलेश यादव ने अपनी अलग छवि बनाई है

अपने साढ़े चार साल के शासन के दौरान अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश व समाजवादी पार्टी के भीतर एक सुलझे हुए नेता की छवि निर्मित की है और उनको मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा था. अब सपा उम्मीदवारों की सूची से आम जनता में यह संदेश गया है कि शिवपाल सिंह यादव भी मुख्‍यमंत्री पद के दावेदार हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे सपा की चुनावी संभावनाअों पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

पिछले दिनों हमने देखा था कि जब शिवपाल और अखिलेश के बीच राजनीतिक टकराव हुआ था, तब मुलायम सिंह यादव मूकदर्शक की तरह दिखाई दिए थे. अखिलेश ने पिता की राय को दरकिनार करते हुए चाचा शिवपाल को दो बार मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर यह रेखांकित करने की कोशिश की थी कि सपा में नेताजी के बाद नंबर दो पर वह है. आज भी सार्वजनिक तौर पर चाचा-भतीजा एक-दूसरे पर कटाक्ष करते दिखाई देते हैं.

यह तय है कि चुनाव प्रचार के दौरान सपा के चाचा-भतीजा की यह राजनीतिक लड़ाई कई स्तरों पर प्रकट होने की आशंका है. सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव इस स्थिति में नहीं दिखाई देते हैं कि वे इन दोनों के बीच होनेवाली लड़ाई को थामने में सफल हो पाएं. ऐसा लगता है कि सपा में राजनीतिक उत्तराधिकार की लड़ाई अभी से तेज हो गई है.

कांग्रेस पार्टी के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी सपा

मुलायम सिंह यादव ने 325 उम्मीदवारों की सूची जारी करके इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी के साथ किसी तरह का चुनावी तालमेल हो सकता है.

अखिलेश यादव ने विकास के मु्द्दे पर अधिक जोर देकर सपा के सीमित जनाधार का सफलता के साथ विस्तार करने की कोशिश की और इसी आधार पर वे विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं. लेकिन अब टिकटों के बंटवारे में शिवपाल सिंह यादव का पलड़ा भारी होने का अर्थ यह है कि सपा उसी पुराने जातिगत फार्मूले पर दांव लगाना चाहती है, जो आज के बदले वातावरण में अधिक प्रासांगिक नहीं है.

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