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मुसलमानो! बीजेपी का राज आया है कोई कयामत नहीं आई

बीजेपी के राज में ऐसा कुछ नहीं होगा जो पहले न होता रहा हो

Updated On: Mar 15, 2017 08:08 AM IST

Shams Ur Rehman Alavi

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मुसलमानो! बीजेपी का राज आया है कोई कयामत नहीं आई

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद मुस्लिम समाज में कई जगह अंदेशे और बेचैनी का अहसास नजर आ रहा है.

खास तौर पर उत्तरप्रदेश में रहने वाले कई मुसलमान जिनमें नौजवान और बुज़ुर्ग दोनों शामिल हैं, इस जीत के बाद कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद नजर आ रहे हैं.

ये एक अजीब सी बात है. बीजेपी इस वक्त देश की सबसे बड़ी पार्टी है और ये पहली दफा नहीं है कि उत्तरप्रदेश में सरकार बना रही है. हिंदुस्तान के कई सूबों में बीजेपी एक दशक से ज्यादा अरसे तक लगातार हुकूमत कर चुकी है.

कई राज्यों में तो बीजेपी का लगातार तीसरा टर्म है. फिर देश में भी बीजेपी की ही सरकार है. आखिर क्या वजह है जो मुसलमान परेशान नजर आ रहे हैं और अपने रिश्तेदारों, अजीजों, करीबी लोगों से जाती बातचीत में चिंता का इजहार कर रहे हैं?

उत्तर प्रदेश में दोस्तों से बातचीत के दौरान ये अंदाजा हुआ कि उन्हें लग रहा है कि कुछ ज्यादा बुरा न हो जाए. ये बुरा क्या हो सकता है? उन्हें लगता है देश के दीगर हिस्सों में होने वाले सांप्रदायिक वाकये अब यूपी में न होने लगें.

और ऐसे हालात बनते हैं तो शायद सरकार का रवैया उनके लिए और सख्त हो जाएगा. मगर ऐसा क्या है जो उत्तरप्रदेश में पिछले कई सालों में नहीं हुआ? इस दशक का देश का सबसे बड़ा दंगा यानी मुजफ्फरनगर कांड तो समाजवादी पार्टी के शासन में उत्तरप्रदेश में ही हुआ.

इस दंगे में हजारों लोग बेघर हुए, कैंपों में रहे और रेप की शिकार महिलाओं को इंसाफ दिलवाने के लिए आज भी सख्त जद्दोजहद करनी पड़ रही है.

दंगे और मुसलमान

इसी तरह का दूसरा बड़ा दंगा कोकराझार में हुआ जो असम में है जहां तब कांग्रेस की सरकार थी. पचास से ज्यादा लोग मारे गए थे, हजारों लोग वहां भी बेघर हुए थे. उस दौरान एक एमएलए के हाथ में एके 47 राइफल लिए तस्वीरें वायरल हुईं थीं, मगर क्या कोई कार्रवाई हुई?

A Muslim man roasts chicken in a locality of the Muslim dominated Johapura area in the western Indian city of Ahmedabad February 28, 2014. Narendra Modi's critics depict him as an autocratic Hindu supremacist who would tyrannize the country's minority Muslims if his Bharatiya Janata Party (BJP) came to power. Modi himself insists he is a moderate who will create a prosperous India for people of all creeds. Picture taken February 28, 2014. To match Special Report INDIA-MUSLIMS/ REUTERS/Ahmad Masood (INDIA - Tags: ELECTIONS POLITICS FOOD SOCIETY) ATTENTION EDITORS: PICTURE 30 OF 31 FOR PACKAGE 'GUJARAT - THE LEGACY OF THE 2002 RIOTS'. TO FIND ALL IMAGES SEARCH 'GUJARAT MASOOD' - RTR3P0H7

जोहापुरा में एक मुस्लिम बहुल इलाके में मुर्गी पकाते हुए लोग

तो फिर क्या इसकी वजह उत्तरप्रदेश में बीजेपी के उस दौर (1992) की यादें हैं जब कल्याण सिंह की सरकार थी और बाबरी मस्जिद गिराई गई थी? अयोध्या आंदोलन की शुरुआत ही उत्तरप्रदेश में हुई थी लेकिन 90 के दशक में समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने बीजेपी की रफ्तार को वहां बढ़ने से रोक दिया था.

नतीजा ये हुआ कि बीजेपी उत्तर भारत के दूसरे राज्यों में तो बढ़ी मगर उत्तरप्रदेश में वो कमजोर होती चली गई.

कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बाद में भी बीजेपी की सरकारें कुछ अरसे के लिए बनीं (जैसे बीएसपी-एसपी की हिमायत से बनी सरकार जो दो साल ही चली थी. सन 2000 के आखिर में राजनाथ सिंह सत्ता में आये और सवा साल के लिए मुख्यमंत्री रहे.) लेकिन 1992 के बाद ये पहली बार है जब बीजेपी इतने बड़े बहुमत के साथ अपने दम पर भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में पांच साल तक हुकूमत करेगी.

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हैरानी तब हुई जब कुछ लोगों ने ऐसे हताश लहजे में बात की जैसे सब कुछ लुट गया हो. क्या गैर-बीजेपी सरकारें इतनी आदर्श और महान थीं? और इसके बाद भी वो आपको इतना मजबूत भी न बना पाईं कि उनके जाने के बाद आप बीजेपी के आने के अंदेशे से ही परेशान हो गए.

मैं राजनीतिक तौर पर बीजेपी या कांग्रेस किसी का समर्थक नहीं हूं लेकिन हमें ये हकीकत समझना चाहिए कि बीजेपी दशकों से देश की दो बड़ी पार्टियों में से एक है. अब तो वह देश की सबसे बड़ी पार्टी है, जो सत्ता में कभी न कभी आती ही रहेगी. इसलिए आपको अपने दिल से अंदेशे निकालने होंगे.

बीजेपी देश में है और रहेगी और मुस्लिम समुदाय को उससे खौफजदा होने की जरुरत नहीं है. डेमोक्रेसी में आपको सब पार्टियों से डील करना होगा. ऐसा कुछ नहीं है जो कांग्रेस राज में कभी नहीं हुआ और सिर्फ बीजेपी राज में हुआ है.

अक्सर लोग दूसरे राज्यों में हुए हमलों, खासतौर पर ‘काउ विजिलेंट’ ग्रुप्स की दहशत वाले वाक्यात के बारे में सोचते हैं. उन्हें लग रहा है कि ऐसे मामले अब उत्तरप्रदेश में भी हो सकते हैं. तो भाई दादरी जैसा कांड एसपी सरकार के दौरान ही हुआ.

Muslims shout slogans as they take part in a rally demanding increase in allowances for clerics and opposing the Indian government's move to change the Muslim Personal Law, according to a media release, in Kolkata

मुसलमान मतदाता के मुद्दे भी आम वोटरों जैसे ही हैं

मॉरल पुलिसिंग और दक्षिणपंथी

कर्नाटक में सालों से कांग्रेस सरकार है लेकिन मॉरल पुलिसिंग और दक्षिणपंथी संगठनों के हमले सबसे ज्यादा मंगलौर और उसके आसपास के इलाकों में ही होते हैं. उत्तरप्रदेश में सन 1992 में जो हुआ उसकी बुनियाद कांग्रेस के दौर में 1986 में पड़ चुकी थी जब शिलान्यास हुआ था.

पिछले तीस साल के बड़े दंगों का जब जिक्र होता है तो बार-बार गुजरात की बात होती है. मगर मुंबई दंगा दो चरणों में हुआ था और उस वक्त कांग्रेस के सुधाकर राव नाइक वहां मुख्यमंत्री थे उसको भुला दिया जाता है.

ये एक ऐसा दंगा था जिसमें आरोपियों को बचा लिया गया. चाहे वो शिवसेना के नेता हों या पुलिस अधिकारी जिनका इस दंगे में नाम आया, उनको बाद में भी बचाया जाता रहा जबकि सरकार कांग्रेस की ही रही.

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इसलिए ये मान लेना कि तथाकथित सेक्युलर पार्टियों का राज ही मुसलमानों की हिफाजत कर सकता है गलत है. क्या अपॉजिशन में रहते हुए ये पार्टियां आपकी आवाज नहीं उठा सकतीं हैं. आपके साथ होने वाले ज़ुल्म पर साथ नहीं आ सकती हैं?

जाहिर हैं, इन पार्टियों से भी आपको बहुत उम्मीदें नहीं हैं मगर फिर भी आप को बीजेपी की सरकार बनने से कुछ घबराहट है. इस डर से निकलने की जरूरत है.

अन्य समाजों की तरह मुस्लिम समाज भी मोनोलिथिक नहीं है और सब अलग- अलग पार्टियों को वोट देते हैं. बीजेपी है और रहेगी. अगर दीन की बात है और मजहब पर चलते हैं तो फिर खुदा के सिवा किसी से कैसा डर?

और अगर आज की दुनिया की बात है तो एक्टिव रहिये, डेमोक्रेटिक तरीके अपनाइए. अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ेगा, बोलना पड़ेगा, मैदान में आना पड़ेगा. पब्लिक स्पेस में काम कीजिये, सड़क से सदन तक अपने और दूसरों  के लिए आवाज उठाइए. कमियां हो सकती हैं मगर कानून है, संविधान है. सरकारें बदलती हैं... बहुमत और प्रचंड बहुमत से आती हैं.

कुछ भी अनोखा नहीं हो गया है. एक और बात बीजेपी को भी कोशिश करना चाहिए कि मुसलमानों से उसके रिश्ते बेहतर हों. ये भारत में लोकतंत्र के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी भी है.

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