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अमित शाह की परिवर्तन यात्रा: झूठ का सिर्फ एक पुलिंदा

या तो अमित शाह खुद गलतफहमी के शिकार हैं या फिर वो लोगों को गुमराह करना चाहते हैं.

Updated On: Nov 18, 2016 05:35 PM IST

Saqib Salim

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अमित शाह की परिवर्तन यात्रा: झूठ का सिर्फ एक पुलिंदा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बीजेपी के चुनाव अभियान का श्रीगणेश करते हुए जो कुछ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा वो टेलीविजन के जरिए से देश भर ने सुना.

इस अभियान को परिवर्तन यात्रा का नाम देते हुए शाह ने मतदाताओं से अपील की कि वो प्रदेश में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मदद करें.

उन्होंने सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रदेश की जर्जर कानून व्यवस्था के लिए इन सब को दोषी भी ठहराया.

या तो अमित शाह खुद गलतफहमी के शिकार हैं या फिर वो लोगों को गुमराह करना चाहते हैं. उन्होंने सपा और बसपा पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए प्रदेश में गुंडा राज स्थापित करने का दोष भी मढ़ा.

जिन अपराधियों को उन्होनें मंच से गिना उनमें अफजल अंसारी जरूर आपराधिक छवि वाले नेता हैं लेकिन आजम खान और नसीमुद्दीन सिद्दीकी किस तरह से अपराधी हुए हैं, ये एक मतदाता होने के नाते हम भी जानना चाहेंगे.

और ये आरोप भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तब लगा रहे थे, जबकि खुद उन पर हत्या और अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं.

मंच पर मौजूद अन्य पार्टी के नेताओं में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या पर भी हत्या जैसे अपराधिक मामले दर्ज हैं. इसके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान पर मुजफ्फरनगर दंगो से संबंधित कई आरोप हैं.

ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष के आरोप कितने ईमानदारी भरे हैं, ये तो केवल वही बता पाएंगे. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में उन्होंने ये आरोप भी सपा सरकार पर लगाया कि उनके राज में मथुरा जैसी घटना होती है.

गौरतलब रहे कि इस साल जून में मथुरा में हथियारबंद जय बाबा गुरुदेव समर्थकों ने पुलिस से हुई मुठभेड़ में एक पुलिस अधीक्षक और एक थाना प्रभारी कि हत्या कर दी थी.

ऐसा वे तब कह पाए जब की इसी साल हरियाणा में जाट आरक्षण पर हुई हिंसा की स्वयं न्यायपालिका और उनके मंच पर बैठे मुख्यमंत्री ने 1947 में हुए दंगों से तुलना की थी.

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बीजेपी अध्यक्ष यहीं नहीं रुके और उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले पंद्रह वर्षों से सपा अथवा बसपा की सरकार रही है और इस दौरान कानून व्यवस्था जर्जर हुई है. उनके अनुसार इससे पूर्व कल्याण सिंह का शासनकाल अपराधमुक्त था.

माननीय अध्यक्ष न जाने कहां से ये अनोखे और दिलचस्प तथ्य लाते हैं. भारत में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, जो कि गृह मंत्रालय के अधीन संस्था है, हर वर्ष देश में हुए अपराधों के आंकड़ें प्रकाशित करता है.

ब्यूरो के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि 1998 में जबकि कल्याण सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे ,हिंसक अपराध की दर 26.17 थी. यानी हर एक लाख आबादी पर 26.17 हिंसक अपराध जैसे कि हत्या, बलात्कार, लूट आदि के मामले दर्ज किये गये थे.

उन्हीं के शासनकाल में 1999 में ये दर 22.7 थी, जो कि 2001 में, जबकि अंतिम बार बीजेपी सरकार थी और राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे, 23 पर थी. अब इसकी तुलना अगर पिछले साल 2015 के ब्यूरो के आंकड़ों से की जाए तो ये दर केवल 18.18 प्रतिशत है. यानी अखिलेश यादव शासनकाल में अपराध दर किसी भी बीजेपी सरकार से कम ही है.

शाह ने बसपा को भी अपराधीकरण का दोषी ठहराया था. अब अगर बसपा के शासनकाल के अंतिम दो वर्षों पर नजर दौड़ाई जाये तो ये हिंसक अपराध कि दर 2011 एवं 2010 में 16.5 और 13.5 नजर आती है.

बीजेपी अध्यक्ष के दावों के विपरीत उनकी पार्टी का शासनकाल अपराध की वृद्धि वाला मालूम देता है.

अमित शाह अपने भाषण में प्रदेश के मतदाताओं को ये भी कहते हैं कि कानून व्यवस्था देखनी है तो बीजेपी शासित प्रदेशों की देखें. हमने उनकी बात को संजीदगी से लेते हुए ये भी किया और इसने उनके खोखले दावों कि एक और कलई खोल दी.

जैसा कि अभी ऊपर बताया कि हिंसक अपराधों की दर प्रदेश में वर्ष 2015 के लिए 18.18 थी. भाजपा शासित प्रदेशों के लिए इस वर्ष की हिंसक अपराध की दर हरियाणा की 37.5, महाराष्ट्र की 31.3, मध्य प्रदेश की 28.7, छत्तीसगढ़ की 27.7, झारखंड की 25.5, गोवा की 21.8, राजस्थान 21.6, और केवल गुजरात 12.9 के साथ उत्तर प्रदेश से बेहतर स्थिति में नजर आता है.

बीजेपी अध्यक्ष ये भी आरोप लगाते हैं कि अखिलेश यादव कि सरकार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, जो कि भाजपा शासित प्रदेशों में हैं. ब्यूरो के आंकड़ें एक बार फिर शाह के झूठ की कलई खोलते हुए नजर आते हैं.

उत्तर प्रदेश में 2015 में बलात्कार के मामलों की दर 3.00 थी. यानि हर एक लाख आबादी पर तीन मामले बलात्कार के दर्ज किए गए.

इसी वर्ष अगर भाजपा शासित राज्यों से तुलना की जाये तो; छत्तीसगढ़ में ये दर 12.2 रही, मध्य प्रदेश में 11.9, राजस्थान में 10.5, गोवा में 9.4, हरियाणा में 8.6, महाराष्ट्र में 7.3, झारखण्ड में 6.5 और यहां भी केवल गुजरात के आंकड़ें 1.7 के साथ उत्तर प्रदेश से बेहतर हैं.

अमित शाह यदि उत्तर प्रदेश की जनता को अपराधमुक्त शासन के लिए ही वोट करने को कहना चाहते हैं, तो बेहतर यही होगा कि वो भाजपा को वोट करने से मना करें. कम से कम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकडें तो स्पष्ट रूप से यही कह रहे हैं.

(लेखक जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में इतिहास के शोधकर्ता है)

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