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यूपी चुनाव 2017: यूपी की राजनीति में दबंग होती महिलाएं

यूपी की राजनीति में कभी पुरुषों के पीछे-पीछे चलने वाली महिलाएं अब आगे बढ़कर कमान संभाल रही हैं

Updated On: Feb 13, 2017 08:24 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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यूपी चुनाव 2017: यूपी की राजनीति में दबंग होती महिलाएं

बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह के मायावती के लिए अपशब्द कहने के बाद मचे बवाल के बाद जब पार्टी ने तुरंत अपना पल्ला झाड़ कर दयाशंकर को निकाल दिया, उस समय ऐसा लगा कि बीजेपी नेता ने बैठे-बिठाए बीएसपी को एक जबर्दस्त चुनावी मुद्दा दे दिया है.

बीजेपी ने भले ही दयाशंकर सिंह को पार्टी से निकाल दिया हो, लेकिन सबको यही आशंका थी कि कहीं चुनाव में यह मुद्दा पार्टी पर भारी न पड़ जाए.

लेकिन तभी बीएसपी नेता नसीमुद्दीन सिद्दकी के बड़बोलेपन ने सारा खेल पलट दिया.

स्वाति सिंह ने संभाला मोर्चा

नसीमुद्दीन ने दयाशंकर की बेटी के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी की और जिस समय दयाशंकर पुलिस से मुंह छिपा कर भागे फिर रहे थे, उस समय उनकी पत्नी स्वाति सिंह ने मोर्चा संभाल लिया.

मीडिया में जिस मजबूती से उन्होंने नसीमुद्दीन को जवाब दिया, उससे सारा खेल पलट गया और बीजेपी भी अपना रक्षात्मक रुख छोड़कर आक्रामक मोड में आ गई.

स्वाति सिंह को तुरंत प्रदेश बीजेपी महिला विंग का अध्यक्ष बना दिया गया.

इस घटना के बाद बीजेपी आलाकमान को स्वाति सिंह की राजनीतिक समझ और महिला के तौर पर उनकी ताकत का अंदाजा मिला.

यह स्वाति सिंह पर बीजेपी का भरोसा ही था कि पार्टी ने उन्हें लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से टिकट दिया, जहां पार्टी ने कभी जीत का मुंह नहीं देखा है.

समाजवादी पार्टी का सपना पूरा करेंगी अपर्णा

समाजवादी पार्टी के लिए लखनऊ सीट काफी मुश्किल है. यह सीट रीता बहुगुणा जोशी की है, जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई थीं.

इस इलाके में रीता बहुगुणा की लोकप्रियता को देखते हुए यह सीट लगभग बीजेपी के लिए तय मानी जा रही थी.

लेकिन समाजवादी पार्टी ने इस मुश्किल सीट से अपने घर की छोटी बहू अपर्णा यादव को खड़ा किया है.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी की तरफ से अपर्णा यादव को भेजे गए मैसेज के जवाब में उन्होंने कहा, 'मैं यहां पली बढ़ी हूं और यहां की समस्याओं को बेहतर ढंग से जानती हूं. यही वजह है कि नेता जी ने मुझे यहां से टिकट दिया है.'

पूजा पाल का राजनीतिक बदला

यूपी की राजनीति में धीरे-धीरे महिला नेताओं की भूमिका बढ़ी है. यूपी में दबंग नेताओं को टिकट देने की बात तो आम है लेकिन अब दबंग महिलाओं की भूमिका भी बढ़ती जा रही है.

यूपी की राजनीति का ऐसा ही एक नाम पूजा पाल है. पूजा पाल के पति राजू पाल बीएसपी के विधायक थे.

2004 में राजू पाल इलाहाबाद पश्चिम से मोहम्मद अशरफ को हराकर विधायक बने थे. विधायक बनने के कुछ दिनों के भीतर ही राजू पाल ने पूजा पाल से विवाह किया, लेकिन विवाह के 9 दिनों के भीतर ही राजू पाल की हत्या हो गई.

इसके बाद 2005 के उपचुनाव में इस सीट से मोहम्मद अशरफ विधायक बन गए. इन सब घटनाओं से पूजा पाल में काफी आक्रोश था.

पूजा के इसी आक्रोश को देखकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने पूजा पाल को इलाहाबाद पश्चिम से ही बीएसपी का टिकट दे दिया.

यह वही सीट थी जिसे 2004 में राजू पाल ने जीती थी और उनकी हत्या के बाद मोहम्मद अशरफ यहां के विधायक थे.

2007 में इसी सीट से पूजा पाल और मोहम्मद अशरफ का मुकाबला था, जिसमें पूजा पाल को जीत हासिल हुई.

इसके बाद 2012 में इसी सीट से दबंग नेता अतीक अहमद चुनाव के मैदान में उतरे थे, लेकिन पूजा पाल ने उन्हें भी धूल चटा दी.

महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाति का समीकरण बहुत अहम है लेकिन महिलाओं की हिस्सेदारी की भी अनदेखी नहीं की जा सकती है. 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आबादी तकरीबन 9 करोड़ है.

वो वक्त गया जब महिलाएं सिर्फ घर के मुखिया की बात मानकर वोट डाल देती थीं. बदले दौर में महिलाएं अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट करती हैं.

न सिर्फ मतदाता के तौर पर बल्कि लीडर के तौर पर भी राजनीतिक पार्टियां महिलाओं को आगे कर रही हैं.

इस बात का असर समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट्स और घोषणापत्र पर भी नजर आता है. अखिलेश यादव ने अपनी महिला मतदाताओं को खास तौर पर प्रेशर कुकर देने का वादा किया है.

यूपी की राजनीति में कभी पुरुषों के पीछे-पीछे चलने वाली महिलाएं अब आगे बढ़कर कमान संभाल रही हैं. यही वजह है कि राजनीतिक पार्टियां भी अब उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा मौके दे रही हैं.

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