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गठबंधन से यूपी में कांग्रेस को होगा फायदा: रणदीप सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी जल्द कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी संभालेंगे और देश का संचालन भी करेंगे.

Amitesh Amitesh Updated On: Jan 23, 2017 03:13 PM IST

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गठबंधन से यूपी में कांग्रेस को होगा फायदा: रणदीप सुरजेवाला

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के मीडिया और कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दावा किया है कि अगले पांच सालों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की सरकार उत्तर प्रदेश की दशा और दिशा बदलकर रख देगी.

फर्स्टपोस्ट हिंदी के साथ बातचीत में सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का पद भी संभालेंगे और देश का संचालन भी करेंगे.

हालांकि, प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में भूमिका पर सुरजेवाला ने साफ कर दिया कि यह उनका निजी फैसला होगा. वैसे उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ताओं की यह दिली तमन्ना है कि प्रियंका राजनीति में और सक्रिय भूमिका निभाएं.

पेश है कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला से बातचीत के प्रमुख अंश:

फर्स्टपोस्ट: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन के बाद किस तरह की संभावना देखते हैं ?

सुरजेवाला: उत्तर प्रदेश में 27 सालों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है. नतीजा है कि जाति और धर्म की राजनीति ने यूपी के विकास की धुरी को छिन्न-भिन्न कर दिया है. अब सपा-कांग्रेस गठबंधन उत्तर प्रदेश को एक नई युवा ताकत, एक नई दिशा और एक विकास पूरक गठबंधन देगा जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी. यह गठबंधन अगले पांच साल में यूपी की दशा और दिशा दोनों को बदल देगा.

कांग्रेस पार्टी अखिलेश के साथ हर हाल में गठबंधन करना चाहती है

फर्स्टपोस्ट: किस तरह की तस्वीर देखने को मिलेगी. क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी और दूसरी तरफ डिंपल यादव और प्रियंका गांधी दोनों की केमेस्ट्री यूपी में देखने को मिल सकती है?

सुरजेवाला: अभी गठबंधन हुआ ही है. सभाएं और कार्यक्रम बनना बाकी है. अभी उम्मीदवारों की सूची जारी हो रही है. इसके बाद कार्यक्रम बन जाएंगे. जब हम गठबंधन में इकट्ठे काम कर रहे हैं तो एकसाथ या अलग-अलग जनसभा करने में कोई मुश्किल नजर नहीं आती.

फर्स्टपोस्ट: कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता इस बात की मांग लगातार करते रहे हैं प्रियंका गांधी को रायबरेली और अमेठी से आगे निकलकर बाकी इलाकों में भी प्रचार करना चाहिए.

सुरजेवाला: प्रियंका गांधी वाडरा ने स्वेच्छा से अपनी भूमिका दो संसदीय क्षेत्रों रायबरेली और अमेठी तक सीमित कर रखी है. ये उनकी निजता का प्रश्न है और हम सब इसका सम्मान करते हैं. करोड़ों कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कई बार राहुल जी के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिम्मेदारी संभालने के लिए उनसे आग्रह किया है, मांग भी की है और कई बार थोड़े बहुत आंदोलित भी हुए हैं. सच्चाई यह है कि वह कब और कैसे प्रचार करेंगी, ये उनका निर्णय है. उन्होंने स्वेच्छा से फिलहाल खुद को मां और भाई के यानी रायबरेली औऱ अमेठी संसदीय क्षेत्र तक सीमित कर रखा है.

Priyanka Gandhi Vadra

फर्स्टपोस्ट: कांग्रेस पहले बिहार में सबसे जूनियर पार्टनर बनी, फिर यूपी में जूनियर पार्टनर बनी. क्या यह कांग्रेस की 2019 की तैयारी है जिसके लिए वह राज्यों में त्याग कर 2019 की बड़ी लड़ाई के लिए अपने-आप को तैयार कर रही है?

सुरजेवाला: मैं आपको याद दिलाऊं की 2004 के चुनाव के वक्त भी सोनिया गांधी जी के नेतृत्व को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसी प्रकार का षड्यंत्रकारी प्रचार किया गया था. इस सारे प्रचार को तोड़कर उस चक्रव्यूह से वह बाहर निकल गईं और देशवासियों के लिए उन्होंने काम किया. नतीजा था 2004 में गठबंधन में कांग्रेस की सरकार बनी.

राहुल गांधी देशहित को दलहित से बड़ा मानते हैं. वह समझते हैं कि जिस तरह मोदी सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को सालों पीछे धकेल दिया है, जिस तरह से असल सर्जिकल स्ट्राइक इस देश से मध्यमवर्गीय किसानों व गरीबों पर की गई, उससे देश को उबारने का कर्तव्य कांग्रेस का है. यही हमारी पहली प्राथमिकता है. इस कर्तव्य के निर्वहन के लिए हमें जिस राजनीतिक दल से बात करने की जरूरत है, हम तैयार हैं. 2019 में कांग्रेस की सरकार बने केवल ये लक्ष्य नहीं है. लक्ष्य है कि कांग्रेस की सरकार एक नए बदलाव के साथ हो और देश का नेतृत्व राहुल जी करें.

फर्स्टपोस्ट: इस बार विधानसभा चुनाव को राहुल गांधी के लिए भी लिटमस टेस्ट कहा जा रहा है. अब उनके अध्यक्ष बनने की बात भी कही जा रही है. ऐसे में इस बार का विधानसभा चुनाव उनके लिए कितनी बड़ी चुनौती है?

सुरजेवाला: राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी हर चुनाव को चुनौती पूर्ण मानती है. उनके लिए हर चुनाव चुनौती है क्योंकि हर चुनाव देश में बदलाव का माध्यम है. तीस महीने में मोदी सरकार ने जिस तरीके से देश को दोनों हाथों से लूटा है, जिस प्रकार से व्यापार, धंधा, किसानी, दुकानदारी चौपट हुई है. जिस प्रकार से लोगों की रोटी और रोजगार छीने गए हैं- हम उसे दुरुस्त करना चाहते हैं.

Rahul Gandhi addresses a public rally at Bahraich

फर्स्टपोस्ट: क्या पांचों राज्यों के चुनाव के बाद क्या राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर ताजपोशी हो जाएगी ?

सुरजेवाला: कांग्रेस का अध्यक्ष पद कभी ताजपोशी नहीं है. यह एक गहन जिम्मेदारी का पद है. राहुल गांधी जी आज भी हर प्रकार से सोनिया गांधी का कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्साहवर्धन में, नीति निर्धारण में और सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में आगे बढ़कर सक्रिय और अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव के बाद अब यह स्पष्ट है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष का अब अध्यक्ष बनना तय है.

उसकी तिथि और समय का निर्धारण अब सोनिया गांधी जी को करना है क्योंकि ये दरख्वास्त कांग्रेस कार्यसमिति ने उन्हें भेजी है. जहां तक राहुल गांधी जी का प्रश्न है उनके लिए एक कांग्रेस कार्यकर्ता की जिम्मेदारी अध्यक्ष पद से भी बड़ी है और उन्होंने यह बार-बार कहा भी है. वह आगे बढ़कर कांग्रेस का नेतृत्व भी करेंगे और देश का संचालन भी करेंगे- हमें ऐसा विश्वास है.

 

फर्स्टपोस्ट: तो क्या माना जाए 2019 के लिए मोदी बनाम राहुल की लड़ाई देखने को मिलेगी?

सुरजेवाला: प्रोडक्ट मोदी एक इवेंट मैनेजमेंट था. प्रोडेक्ट मोदी एक जुमला था. जुमले और इवेंट मैनेजमेंट कुछ देर चल सकते हैं, क्योंकि ये सच्चाई की बजाय साज-सज्जा के सामान पर आधारित हैं. जुमलों की सच्चाई जनता के सामने आनी ही थी और आ भी गई है. आप झूठी बात करके जन की बात को दबा नहीं सकते.मोदी जी के मन की बात उतनी ही झूठी है जितनी उनके जुमले खोखले हैं.

हमें नहीं लगता है कि ये राहुल बनाम नरेंद्र मोदी लड़ाई है. हमें लगता है कि यह इस देश को मूलभूत सिद्धांतों को बचाने और इस देश को दोबारा एक विकास के एजेंडे पर ले जाने की लडाई है. उस लड़ाई का नेतृत्व राहुल गांधी जी अवश्य करेंगे.

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