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यूपी चुनाव 2017: क्या नेताजी मजबूरी में ‘मुलायम’ हो गए हैं?

अखिलेश यादव क्या पार्टी का शीर्ष पद नेताजी के लिए छोड़ पाएंगे ये लाख टके का सवाल है.

Amitesh Amitesh Updated On: Jan 10, 2017 10:25 AM IST

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यूपी चुनाव 2017: क्या नेताजी मजबूरी में ‘मुलायम’ हो गए हैं?

सोमवार को चुनाव आयोग में गुहार लगाने के बाद मुलायम सिंह के तेवर में थोड़ी नरमी दिखी. नेता जी अखिलेश यादव पर नरम तो रामगोपाल यादव पर गरम दिखे. सारे झगड़े की जड़ रामगोपाल यादव को बताकर बेटे अखिलेश यादव को क्लीन चिट देते नजर आए.

हालांकि उस वक्त इस बात का अंदाजा नहीं लग रहा था कि आखिरकार मुलायम सिंह इतनी जल्दी अखिलेश यादव को लेकर अपना नजरिया क्यों बदलने लगे हैं. लेकिन, मुलायम सिंह यादव के मन में शायद कुछ और ही चल रहा था.

शाम होते-होते दिल्ली से लखनऊ पहुंचकर मुलायम सिंह यादव ने ऐसा बयान दे दिया जिसके बाद फिर से अखिलेश यादव के साथ सुलह की कोशिशों की सुगबुगाहट तेज हो गई.

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मुलायम सिंह यादव ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही होंगे. मुलायम ने कहा कि समाजवादी पार्टी एक है और पार्टी टूटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है. इसी के साथ नेता जी ने इस बात का ऐलान भी कर दिया कि जल्द ही पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए पूरे प्रदेश के दौरे पर निकलेंगे.

समाजवादी मुलायम से समझौतावादी मुलायम

अब सवाल है कि आखिरकार मुलायम सिंह यादव ने ऐसा बयान क्यों दिया. समाजवादी मुलायम समझौतावादी मुलायम कैसे हो गए. आखिर जिस मुलायम सिंह यादव ने दिन में चुनाव आयोग के सामने अखिलेश यादव के समर्थन में खड़े विधायकों की एफिडेविट पर सवाल खड़े किए और उस अधिवेशन को ही फर्जी बता दिया, जहां उनके बदले अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया था, वही मुलायम सिंह यादव बेटे अखिलेश यादव के सामने नतमस्तक होते क्यों दिखे.

आखिर मुलायम सिंह यादव के बयान का मतलब क्या है. अब तक हर मोर्चे से मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला चुनाव बाद होने की बात करने वाले मुलायम सिंह यादव को अखिलेश यादव को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के नाम का बिना शर्त ऐलान करने पर मजबूर क्यों होना पड़ा.

यह सबकुछ मुलायम सिंह यादव के पार्टी पर कमजोर होती पकड़ को दिखाता है. शक्ति प्रदर्शन में अधिकतर विधायकों और नेताओं को अपने पाले में लाकर अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव को यह जता भी दिया है.

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समाजवादी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, इस वक्त भी दोनों गुटों के बीच समझौते कि संभावना हो सकती है. अगर कुछ शर्तों के साथ दोनो गुट एक हो जाएं.

मसलन, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मन मुताबिक टिकट का बंटवारा हो.

शिवपाल यादव पार्टी के यूपी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दें.

अमर सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए.

सीएम अखिलेश, अध्यक्ष मुलायम?

मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताकर अपनी तरफ से समझौते की आखिरी पहल भी कर दी है. लेकिन, पार्टी अध्यक्ष के पद से अपनी दावेदारी छोड़ने के मूड में मुलायम सिंह यादव नहीं दिख रहे. मुलायम के करीबी सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष पद पर किसी तरह का समझौता संभव नहीं है. पार्टी के मुखिया मुलायम ही रहेंगे.

समाजवादी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर आजम खान सरीके अभी भी बहुत से नेता हैं जो दोनों गुटों के बीच समझौते की आखिरी कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन, अब अखिलेश यादव इस पर क्या रूख अख्तियार करते हैं, सबकुछ इस बात पर निर्भर करेगा. अखिलेश यादव फिलहाल खामोश हैं. लेकिन, पार्टी पर कब्जा जमाने में लगे अखिलेश यादव क्या पार्टी का शीर्ष पद नेताजी के लिए छोड़ पाएंगे ये लाख टके का सवाल है.

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