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गौहत्या, तीन तलाक और पलायन नहीं हैं हिंदुत्व के मुद्दे: अमित शाह

हमारी सरकार संवैधानिक मर्यादा का ख्याल रखते हुए मंदिर निर्माण के लिए कटिबद्ध है.

Updated On: Jan 29, 2017 09:44 PM IST

FP Staff

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गौहत्या, तीन तलाक और पलायन नहीं हैं हिंदुत्व के मुद्दे: अमित शाह

नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर इन चीफ राहुल जोशी को दिए गए इंटरव्यू में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने हिंदुत्व और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के दृष्टिकोण से संवेदनशील विषयों पर खुलकर अपनी रखी.

राममंदिर, गौहत्या, कैराना, हिंदुओं के पलायन, ट्रिपल तलाक और आरक्षण जैसे मुद्दों पर अमित शाह ने अपनी राय रखी.

उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या राम मंदिर, कैराना और गौ हत्या पर रोक जैसी बातें करके वे एक बार फिर से हिंदुत्व के मुद्दे पर लौट आए हैं?

इसके जबाब में उन्होंने कहा कि कत्लखाने पर रोक की बात को हिंदुत्व के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि आप पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड या बुंदेलखंड कहीं भी जाएं, वहां आप देखेंगे कि कत्लखाने के चलते दूध देने वाले सारे पशु समाप्त हो गए हैं.

कत्लखानों पर लगाम किसानों की भलाई के लिए 

उन्होंने कत्लखानों पर लगाम लगाने के मुद्दे को किसानों का मुद्दा बताया. अमित शाह ने कहा कि कभी भी अकाल पड़ता है या सूखा होता है तो गरीब किसान मुश्किल में पड़ जाते हैं. किसान दिन-ब-दिन गरीब होते जा रहे हैं. अगर उनके पास दूध देने वाले दो-तीन पशु होंगे तो वह अपनी आजीविका आसानी से चला पाएंगे.

उन्होंने यूपी की गुजरात से तुलना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में दूध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. मैं ऐसे प्रदेश से आता हूं, जहां यूपी की तुलना में बारिश कम होती है. साथ ही पानी की भी कमी होती है. इसके बावजूद वहां डेयरियों के माध्यम से दूध उत्पादन के रिकॉर्ड कायम हुए हैं. ऐसे में हम चाहते हैं कि पशुधन को बचाया जाए.

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उन्होंने मौजूदा यूपी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि फिलहाल, आलम यह है कि पशुधन को अवैध तरीके से उठा लिया जाता है और वे कत्लखानों में काट दिए जाते हैं. इसके बाद किसानों की प्राथमिकी भी दर्ज नहीं होती है.

हमारे प्रयास से जो पशुधन बचेंगे उनसे किसानों को लाभ पहुंचेगा. इसके लिए हम हर चार जिले पर एक डेयरी बनाने का प्रावधान करेंगे, जहां किसानों को दूध का उचित दाम मिल पाएगा. इस वैल्यू एडिशन से किसान अपनी गरीबी को दूर कर पाएंगे.

संवैधानिक मर्यादा के भीतर बनेगा राम मंदिर 

Amit Shah

राम मंदिर के प्रति बीजेपी के रुख को स्पष्ट करते हुए अमित शाह ने कहा कि संवैधानिक तरीके से राम मंदिर निर्माण का मार्ग तलाशा जाएगा. मंदिर निर्माण या तो आपसी बातचीत से हो सकता है या कोर्ट के आदेश पर.

कोर्ट में केस लंबित है और कुछ ही दिन पहले इसकी तारीख थी, जब भी अगली तारीख आएगी, सरकार अपना पक्ष रखेगी. बाकी पार्टियां भी अपना पक्ष रखेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सरकार संवैधानिक मर्यादा का ख्याल रखते हुए मंदिर निर्माण के लिए कटिबद्ध है.

अमित शाह का पूरा इंटरव्यू यहां पढ़ें: अमित शाह: राहुल को बेटा होता और वो कांग्रेस अध्यक्ष बनता, ये है परिवारवाद

बीजेपी के कुछ नेताओं द्वारा दिए जाने वाले विवादस्पद बयानों और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण संबंधी सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि इसे बीजेपी के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि यूपी के साथ एक विशेष प्रकार की परिस्थिति है. यहां बहुत बड़ा आक्रोश है. जिस तरह से वोटबैंक, तुष्टिकरण की राजनीति हुई, इसके खिलाफ अगर कोई कुछ बोलता है तो वह जनता की आवाज उठाता है.

मगर, सांप्रदायिक प्रचार नहीं करना चाहिए, सांप्रदायिक चीजों को एजेंडा नहीं बनाना चाहिए. हम इस बात को मानते हैं.

लेकिन अगर कोई हमारी ओर से कत्लखाने पर उठाए गए कदम को सांप्रदायिक कहता है तो वे जान लें कि ये किसानों की भलाई के लिए उठाया गया कदम है.

पलायन के लिए एसपी और बीएसपी की तुष्टिकरण की नीति जिम्मेदार 

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वे जनता और लड़कियों की सुरक्षा के लिए टास्क फोर्स का गठन करेंगे.

अमित शाह ने कहा कि पश्चिमी यूपी में जो पलायन होता है, अगर हम उसके लिए टास्क फोर्स बनाते हैं, अगर कोई इसे सांप्रदायिक कहता है तो ये उन्हें जानना चाहिए कि ये उत्तर प्रदेश की जनता की भलाई के लिए है.

कोई बच्चियों को प्रताड़ित करे, जिसके चलते वे स्कूल कॉलेज नहीं जा पाती हैं. इसके खिलाफ अगर बीजेपी एंटी रोमियो स्क्वॉयड बनाती है तो यह सांप्रदायिक बात नहीं है. ये छात्राओं का अधिकार है.

छात्राएं अपनी पढ़ाई अपने गांव शहर में रहकर पूरी करें ये उनका अधिकार है. इसलिए सांप्रदायिकता की परिभाषा में इन सारी बातों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि वे एसपी, बीएसपी की सरकारों के तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पलायन के लिए जिम्मेदार मानते हैं.

उन्होंने कहा कि अगर कानून का राज होता, संविधान के तहत थाने काम करते. संविधान के मार्गदर्शन में पुलिस काम करती तो यह कभी नहीं होता. जबकि पुलिस को कहा गया कि वे जाति-धर्म देखकर रिपोर्ट दर्ज करें. इसी वजह से पलायन की घटनाएं हुईं.

उन्होंने यह भी कहा कि जब यूपी में कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह की सरकार थी तो इस तरह की घटनाएं रुकी थी. देश भर में हमारी 14 सरकारें हैं, कहीं पलायन नहीं हो रहा है.

धार्मिक आरक्षण और ट्रिपल तलाक के खिलाफ है बीजेपी

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आरक्षण पर मनमोहन वैद्य और मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयानों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी आरक्षण के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के आरक्षण का विरोध नहीं करती.

उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर आरक्षण मांगने वाले दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के आरक्षण में कटौती करने की बात कह रहे हैं.

मैं चाहता हूं कि सपा, बसपा और कांग्रेस इस बार के चुनाव में जनता को बता दें कि वह दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों में से किसका आरक्षण काटेंगे.

उन्होंने कहा कि हमारा मत स्पष्ट है कि हम धार्मिक आरक्षण के पक्ष में नहीं हैं. आरक्षण का आधार धार्मिक नहीं हो सकता. संविधान इसकी अनुमति नहीं देता. ऐसे में वर्तमान व्यवस्था ही लागू रहनी चाहिए.

ट्रिपल तलाक के बारे में उन्होंने कहा कि हम बहुत स्पष्टता से मानते हैं, संविधान के तहत इस देश की हर महिला को उसका अधिकार मिलना चाहिए.

अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रिव्यू कर रही है तो मैं मानता हूं कि देश की दूसरी महिलाओं की तरह मुस्लिम महिलाओं को भी संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए. ट्रिपल तलाक मुस्लिम महिलाओं के अधिकार का हनन करती है.

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