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योगी कसेंगे माफियाओं-अपराधियों की नकेल, यूपीकोका को कैबिनेट की मंजूरी

प्रदेश में गुंडागर्दी, माफियागिरी और समाज में अशांति फैलाने वाले तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ विशेष अभियान के तहत कठोर कार्रवाई हो, यूपीकोका को इसी मकसद से लाया जा रहा है

Bhasha Updated On: Dec 13, 2017 06:39 PM IST

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योगी कसेंगे माफियाओं-अपराधियों की नकेल, यूपीकोका को कैबिनेट की मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में गैंगस्टर, माफियाओं और संगठित अपराध पर नकेल कसने के मकसद से ‘उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक’ के मसौदे को बुधवार को हरी झंडी दे दी. गुरुवार से शुरू हो रहे विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में विधेयक को पेश किया जाएगा.

सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला किया गया. बैठक के बाद ऊर्जा मंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि संगठित अपराध पर नियंत्रण पाने के लिए उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2017 (यूपीकोका)’ के मसौदे को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. विधेयक को गुरुवार से शुरू हो रहे विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा.

Ayodhya: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath with Governor Ram Naik and few other ministers of state cabinet wave in Ayodhya on Wednesday. PTI Photo by Nand Kumar(PTI10_18_2017_000159B)

कानून का राज कायम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

उन्होंने बताया कि प्रदेश में कानून का राज कायम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में गुंडागर्दी, माफियागिरी और समाज में अशांति फैलाने वाले तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ विशेष अभियान के तहत कठोर कार्रवाई हो. यूपीकोका को इसी मकसद से लाया जा रहा है.

शर्मा ने बताया कि उच्च न्यायालय में संगठित अपराधियों, माफियाओं और अन्य सफेदपोश अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के संबंध में दायर याचिका पर 12 जुलाई 2006 को पारित आदेश के क्रम में माफियाओं की गतिविधियों और राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप पर अंकुश लगाने के लिए कानून का प्रारूप न्याय विभाग की सहमति से तैयार किया गया है.

उन्होंने बताया कि इस विधेयक में 28 ऐसे प्रावधान हैं जो पहले से लागू गैंगस्टर एक्ट में शामिल नहीं हैं. शर्मा ने बताया कि विधेयक का मकसद अपराध पर अंकुश लगाना है.

Yogi Adityanath

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उच्च न्यायालय के पारित निर्णय और महाराष्ट्र के कानून के अध्ययन के बाद तैयार हुआ विधेयक

इससे पहले मंत्री ने बताया कि विधेयक के परीक्षण के लिए गृह विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी. इसमें अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध) तथा विशेष सचिव (न्याय विभाग) को भी शामिल किया गया था. इस समिति द्वारा परीक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के पारित निर्णय तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून-1999 का भी गहन अध्ययन करके इस विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है.

शर्मा ने बताया कि इस प्रस्तावित कानून में संगठित अपराध को विस्तार से परिभाषित किया गया है. उदाहरण के लिए बाहुबल के आधार पर ठेके हथियाने, फिरौती के लिए अपहरण, अवैध खनन, अवैध रूप से शराब बनाना एवं बेचना, संगठित रूप से वन उपज दोहन करना, वन्यजीवों का व्यापार, नकली दवाओं का कारोबार, सरकारी एवं गैर सरकारी संपत्तियों को हड़पना तथा रंगदारी वसूली करना इत्यादि इसमें शामिल है.

 

Shrikant Sharma

विधेयक में प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग रोकने की व्यवस्था भी

उन्होंने बताया कि विधेयक के पारित होने के बाद बनने वाले प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग रोकने की भी व्यवस्था की गई है. इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मुकदमे मण्डलायुक्त तथा परिक्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक की समिति के अनुमोदन के बाद ही पंजीकृत किए जाएंगे. इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की विवेचना के बाद आरोपपत्र जारी करने से पहले जोनल पुलिस महानिरीक्षक की इजाजत लेना अनिवार्य होगा.

शर्मा ने बताया कि विधेयक में यह भी प्रस्तावित है कि संगठित अपराधों के जरिए अर्जित की गई संपत्ति को राज्य सरकार विवेचना के दौरान संबंधित न्यायालय की अनुमति लेकर अपने अधीन कर लेगी, ताकि आपराधिक तत्व उस संपत्ति का लाभ ना उठा सकें. मुकदमे में सजा मिलने के बाद संगठित अपराधियों की सम्पत्ति को राज्य सरकार जब्त कर लेगी.

इस कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनेंगी

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनेंगी. पूरे प्रदेश में संगठित अपराध करने वाले गिरोहों पर नियंत्रण एवं उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए गृह विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में ‘राज्य स्तरीय संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण’ के गठन का प्रावधान भी किया गया है. यह प्राधिकरण स्वतः संज्ञान लेकर अथवा शिकायत होने पर संगठित अपराधियों की गतिविधियों की छानबीन करेगा और इसके लिए प्राधिकरण शासन की कोई भी फाइल देखने के लिए अधिकृत होगा.

Yogi Adityanath

शर्मा ने बताया कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान है. यह प्राधिकरण संगठित अपराधों के संबंध में प्राप्त मामलों की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट राज्य स्तरीय प्राधिकरण को सौंपेगा.

कोई भी व्यक्ति संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अपीली प्राधिकरण के गठन का प्रावधान विधेयक में किया गया है. इसमें शासन द्वारा नामित एक प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक के स्तर के अधिकारी सदस्य होंगे. इस प्राधिकरण में कोई भी व्यक्ति संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण के आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है.

शर्मा ने बताया कि जो लोग संगठित अपराधों में संलिप्त हैं और कहीं ना कहीं सुरक्षा भी लेते हैं. अब ऐसे लोगों को सुरक्षा नहीं दी जाएगी. अपराधी तो अपराधी ही है, चाहे वह सफेदपोश ही क्यों ना हो.

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