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हनीट्रैप का शिकार बना BSF कॉन्सटेबल, ISI को खुफिया जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार

आईएसआई की एजेंट ने पहले अच्युतानंद मिश्र को हनीट्रैप में फंसाया फिर धीरे-धीरे उससे जानकारियां बटोरने लगी और आईएसआई को भेजने लगी

Updated On: Sep 19, 2018 05:12 PM IST

Bhasha

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हनीट्रैप का शिकार बना BSF कॉन्सटेबल, ISI को खुफिया जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के एंटी टेरर स्क्वायड (एटीएस) ने नोएडा से बीएसएफ के एक कॉन्सटेबल को पाकिस्तान को खुफिया सूचनाएं भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया है. कॉन्सटेबल का नाम अच्युतानंद मिश्र बताया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक मिश्र पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की एजेंट को देश की सीक्रेट इनफॉर्मेशन देता था.

बताया यह भी जा रहा है कि मिश्र को हनीट्रैप का शिकार बनाया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएसआई की एजेंट ने पहले अच्युतानंद मिश्र को हनीट्रैप में फंसाया फिर धीरे-धीरे उससे जानकारियां बटोरने लगी और आईएसआई को भेजने लगी. खुद को डिफेंस रिपोर्टर बताने वाली यह महिला पहले मिश्र से सामान्य बातें करती रही. लेकिन बाद में खुफिया जानकारी हासिल करने लगी.

दो दिनों की पूछताछ के बाद गिरफ्तार

सीमा सुरक्षा बल और उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम ने बीएसएफ कांस्टेबल अच्युतानंद मिश्र से दो दिन तक पूछताछ करने के बाद मंगलवार को नोएडा के सेक्टर-18 से गिरफ्तार किया. एटीएस के पुलिस अधिकारी मनीष सोनकर की टीम ने उसे गिरफ्तार किया. मध्यप्रदेश में रीवा जिले के मंडवा गांव निवासी मिश्र 2006 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था.

उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने बुधवार दोपहर को बताया कि मिश्र ने हनीट्रैप में फंस कर गोपनीय सूचनाएं, यूनिट की लोकेशन, शस्त्र, गोलाबारूद की जानकारी, बीएसएफ परिसर की तस्वीर और अन्य सूचनाएं एक महिला के साथ साझा की.

उन्होंने बताया कि एटीएस और बीएसएफ की टीम ने पहले दिल्ली और नोएडा में दो दिन तक इस संबंध में मिश्र से पूछताछ की. इस दौरान मिश्र के मोबाइल और फेसबुक से तमाम सबूत मिले. फोन में महिला को भेजे गये वीडियो भी मिले. इस सबूतों के मिलने के बाद मिश्र से पूछताछ की गई और मंगलवार को उसे सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गिरफ्तार किया गया.

एटीएस ने कैसे लगाया पता?

एटीएस का कहना है कि सेना के खुफिया विभाग से उन्हें सूचना मिली थी कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई फेसबुक पर महिलाओं के फर्जी अकाउंट बनाकर बीएसएफ जवानों से दोस्ती करती है. मित्रता होने के बाद वह जवानों से गोपनीय सूचनाएं हासिल करने की कोशिश करती है.

जांच में क्या आया सामने?

एटीएस की टीम ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि फेसबुक पर ऐसे कई भारतीय अकाउंट हैं जो आईएसआई की फेक आईडी के संपर्क में हैं. जांच आगे बढ़ाने पर बीएसएफ कांस्टेबल अच्युतानंद मिश्र पर संदेह गया.

मिश्र से पूछताछ और उसका डेटा डाउनलोड और एक्स्ट्रैक्ट करने के बाद कई बातें सामने आईं. उससे पता चला कि मिश्र 2016 में फेसबुक के जरिए महिला के संपर्क में आया था.

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