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जय-वीरू जैसी है राहुल-अखिलेश की 'केमिस्ट्री'

बुंदेलखंड झांसी में रविवार को हुई जनसभा मे राहुल-अखिलेश के बीच बढ़ती नजदीकियां

FP Staff Updated On: Feb 20, 2017 06:54 PM IST

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जय-वीरू जैसी है राहुल-अखिलेश की 'केमिस्ट्री'

कहते है न वक्त के साथ चीजों को बदलते देर नही लगती. इस कहावत को राहुल गांधी और अखिलेश यादव सार्थक कर रहे हैं. इन दोनो की 'केमिस्ट्री' का रंग गहरा होते नजर आने लगा है. सभाओं में दोनों की 'बॉडी लैंग्वेज' से लेकर जनता को रिझाने का भी ढ़ंग एक सा हो गया है.

बुंदेलखंड के झांसी में रविवार को जीआईसी मैदान पर हुई जनसभा को ही ले लीजिए, दोनों में बढ़ती नजदीकियां बहुत कुछ कह गईं. राहुल गांधी पहले हेलीकॉप्टर से झांसी  पहुंचे और वे मंच पर जाने से पहले आधा घंटे तक अखिलेश का इंतजार करते रहे. मंच पर दोनों पहुंचे तो लगा जैसे वे जय-वीरू की जोड़ी हो.

अंदाज एक, बस पहनावे में फर्क

दोनों नेताओं का अंदाज एक था, बस फर्क था तो पहनावे में. अखिलेश का लिबास जहां उन्हें पूरी तरह उत्तर प्रदेश और ग्रामीण इलाके का नेता स्थापित करने में मददगार नजर आया. वहीं तो राहुल आधुनिक युवा की पसंदीदा लिबास में थे.

अखिलेश सफेद कुर्ता-पैजामा और सिर पर लाल टोपी पहने थे तो राहुल जींस व कुर्ता और गले में कांग्रेस का दुपट्टा पहने थे.

मोदी के मूड को बदल दिया है हमारी दोस्ती ने

दोनों ही नेता अपने भाषणों में एक दूसरे की बात को ही आगे बढ़ाते नजर आए. ऐसे लगा, मानों दोनों की स्क्रिप्ट एक ही व्यक्ति ने लिखी हो. अखिलेश ने जहां 'साइकिल' को 'हाथ' का मिले साथ से रफ्तार तेज होने की बात की. वहीं राहुल ने कहा कि इस दोस्ती ने प्रधानमंत्री मोदी के मूड को बदल दिया है.

अखिलेश ने जहां प्रधानमंत्री को उत्तर प्रदेश के चुनाव में पसीना आने का जिक्र किया, तो राहुल ने वोट के लिए सौदेबाजी करने का आरोप लगाया.

दो हमउम्र राजनेता बदल सकते है राजनीति की दिशा

Akhilesh-Rahul

दोनों की केमिस्ट्री ने एसपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी उत्साह भरा. इस केमिस्ट्री पर एसपी के युवा नेता सिंहव्रत सिंह यादव (बबुआ) का कहना है, 'युवाओं का जोश समाज में उम्मीद जगाने वाला होता है. जब दो हमउम्र राजनेता एक साथ हो जाएं तो राजनीति की दिशा बदलना कठिन नहीं है.

उन्होंने कहा, 'मौजूद दौर में बीजेपी सत्ता पाने के लिए सांप्रदायिकता और जुमलेबाजी का सहारा ले रही है. विकास उसके लिए मुद्दा नहीं है, ये दोनों युवा नेता विकास और सामाजिक समरसता की बात कर रहे हैं. इन दोनों का साथ प्रदेश और देश की जरूरत बनता जा रहा है.'

कांग्रेस विचारधारा के नजदीक समाजवादी विचारधारा

वहीं, कांग्रेस नेता रामकुमार शुक्ला का कहना है, 'कांग्रेस की विचारधारा के सबसे नजदीक समाजवादी विचारधारा है. दोनों ही दलों के दो युवा और नई सोच के नेताओं का करीब आना, विकास को रफ्तार देने में मददगार होगा. दोनों की केमिस्ट्री मेल खा रही है. यह एक सुखद संयोग है.'

यह दोस्ती ला सकती है लोकसभा चुनाव में भी रंग

राजनीति के जानकारों की मानें तो दोनों युवाओं को सत्ता पाने की चाहत ने एक किया है, मगर यह जोड़ी उन लोगों को प्रभावित कर रही है जो समाज में एकमत होकर रहना चाहते है .

जातिवाद और सांप्रदायिकता उत्तर प्रदेश की राजनीति में घर कर गई है. इन दोनों नेताओं की दोस्ती अगर लंबी चली तो प्रदेश में इन मसलों पर अंकुश लगने की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि युवा अखिलेश की सोच पिता मुलायम से कुछ अलग है. हो सकता है, दोनों की यह दोस्ती लोकसभा चुनाव में भी काम आए.

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