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यूपी विधानसभा चुनाव नतीजे: मोदी से पूरी तरह अंकुश हटा देगी ये जीत

मोदी की मकबूलियत नेहरू की याद दिलाती है.

Updated On: Mar 11, 2017 03:45 PM IST

Aakar Patel

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यूपी विधानसभा चुनाव नतीजे: मोदी से पूरी तरह अंकुश हटा देगी ये जीत

10 मार्च की रात तक सवाल था कि क्या उत्तर प्रदेश में बीजेपी जीतेगी? 11 मार्च को सवाल में तब्दीली हुई है. अब सवाल है कि बीजेपी की ये जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद पर कैसा और कितना असर डालेगी?

मेरा मानना है कि मोदी की ये जीत उनपर लगे सारे अंकुश हटा देगी. हर नेता पर अंकुश होता है. अटल बिहारी वाजपेयी पर भी थे. मोदी पहले ही बेहद शक्तिशाली नेता थे. इसके बावजूद कुछ अंकुश जरूर थे. यूपी की जीत वो सब हटा देगी.

काम करने के मामले में कहूं, तो मैंने मोदी जैसा नेता नहीं देखा. अथक यानी कभी न थकने वाले नेता. मैं जब भी उनसे मिला हूं, वो हमेशा उसी समय मिले हैं, जो उन्होंने समय दिया हो. जिस तरह का अनुशासन है, जिस तरह खुद को ‘ऑर्गनाइज’ करते हैं, वो कमाल है. मैंने कभी विधानसभा चुनाव में किसी प्रधानमंत्री को इस तरह काम करते नहीं देखा, जैसा मोदी ने यूपी में किया.

नेहरू की लोकप्रियता की बराबरी कर रहे हैं मोदी

मोदी ऐसी शख्सियत हैं, जैसी भारतीय राजनीति में पिछले 30-40 साल में तो नहीं आई. वो मुझे नेहरू की मकबूलियत याद दिलाते हैं. हमारी सियासत में मोदी जैसा ‘क्रेडिबल’ नेता इस समय दिखता नहीं है.

ये सच है कि बीजेपी का अपना वोट बैंक है. वो लोग हमेशा बीजेपी के पक्ष में वोट टालते हैं. उस वोट बैंक में 8-10 फीसद इजाफा मोदी करते हैं. ये मोदी का असर है, जिससे इतने लोग जुड़ते हैं. बीजेपी का वो वोटर, जो हिंदुत्व के लिए वोट नहीं डालता, वो मोदी को वोट देता है. मोदी विकास की बात करते हैं. ऐसे वोटर मोदी को विकास का प्रतीक मानकर और उन पर भरोसा करके वोट देते हैं.

परफॉर्मेंस नहीं मार्केटिंग में छुपा है कामयाबी का राज

पॉलिटिक्स दो बातों पर होती है. एक परफॉर्मेंस और दूसरा मार्केटिंग. मोदी सरकार का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा नहीं है. नोटबंदी को लेकर गरीबों पर असर पड़ा है. कोई डेटा ऐसा नहीं हो, जो कह रहा हो कि इकॉनमी के लिए नोटबंदी का अच्छा असर है. लेकिन मार्केटिंग जबरदस्त है. उससे उन्होंने तमाम कमियों को ढंक दिया है.

मोदी की कामयाबी में विपक्षी पार्टी का भी बड़ा रोल है. राहुल गांधी किसी राजा की तरह हैं. वो आलसी हैं. कांग्रेस किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जैसी है. उस पार्टी को ऐसे लोग चाहिए, जो लोगों को अपनी तरफ लेकर आएं. लेकिन वैसा हो नहीं रहा है. जैसे नोटबंदी का मुद्दा था. अगर कोई मजबूत विपक्ष होता, तो उस मुद्दे को बहुत अच्छी तरह भुना सकता था. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.

क्या गठबंधन का फैसला गलत था?

अब चर्चा होगी कि क्या समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन करके गलती की? मुझे नहीं लगता. 2014 में जो नतीजे आए थे. उसके बाद अब जो माहौल था, मुझे लगता है कि अखिलेश ने उसे अच्छी तरह समझा. उन्होंने समझा कि 2014 की जो लहर थी, वही अब भी है. ऐसे में उनको यही रास्ता दिखा. वो फेल हो गए, ये सही बात है. लेकिन मोदी के सामने उनके पास और कोई चारा था नहीं.

मोदी को कौन सी बातें खास बनाती हैं?

हम वापस मोदी की तरफ आते हैं. उन्हें दो हिस्सों मे देखा जाता है. पहला, वो बहुत ही समर्पित और अच्छे फॉलोअर हैं. जो उन्होंने सीखा है, उसे धर्म की तरह मानते हैं. दूसरे वो टिपिकल गुजराती हैं. ये उन्हें उत्तर भारतीय राजनेताओं से अलग करता है. वो बड़े बिजनेस हाउस के साथ संबंधों में सहज दिखते हैं. एक किस्म के ग्लोबल आइडिया का विचार भी उनसे जुड़ता है. इस तरह वो यूनीक यानी अद्वितीय हैं.

मुझे लगता है कि चुनाव के इन नतीजों के लिए मोदी के लिए संसद में भी आसानी होगी. राज्यसभा में उन्हें उस कदर विरोध नहीं झेलना पड़ेगा, जैसा अब तक झेलना होता था. हालांकि मोदी संसद के जरिए फैसला लेने वाले प्रधानमंत्री नहीं रहे हैं. वो तो ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो फाइल नहीं पढ़ता, जो कैबिनेट से बात नहीं करता. वो ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो अपनी पसंद के ब्यूरोक्रैट के साथ बात करके ही फैसले कर लेता है. यूपी के नतीजे उन्हें इस तरह के और फैसले लेने को प्रेरित करेंगे. तैयार रहिएगा.

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