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यूपी चुनाव 2017: गठबंधन की साख बचाने को 'पीके' का 'कैलेंडर प्लान'

टीम पीके के वॉलेन्टियर घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं

IANS Updated On: Feb 26, 2017 02:36 PM IST

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यूपी चुनाव 2017: गठबंधन की साख बचाने को 'पीके' का 'कैलेंडर प्लान'

उत्तर प्रदेश के चुनावी महासमर में वार और पलटवार की राजनीति तेज हो गई है. जुबानी जंग के बीच सपा-कांग्रेस गठबंधन ने घर-घर संपर्क अभियान भी शुरू कर दिया गया है. रोजाना पांच लाख घरों तक गठबंधन का संदेश पहुंचाया जा रहा है. पांचवें, छठे और सातवें चरण के लिए गठबंधन की ओर से 'टीम पीके' यानी प्रचार प्रबंधक प्रशांत किशोर के कार्यकर्ता घर-घर जाकर पार्टी के लिए समर्थन जुटा रहे हैं. हर घर में एक पत्र के जरिए अखिलेश का संदेश दिया जा रहा है.

अभियान के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 100 स्वयंसेवी घर-घर जा रहे हैं और लोगों से मिलकर 'प्रगति के 10 कदम' लिखा एक बड़ा कैलेंडर और एक पॉकेट कैलेंडर बांट रहे हैं. इन कैलेंडरों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की 10 प्रमुख प्राथमिकताएं लिखी हुई हैं.

संदेश में कहा गया है कि पिछले पांच साल में यूपी की तरक्की के लिए कई काम किए गए हैं. राज्य की खुशहाली के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है. पिछले पांच साल में जो नींव रखी गई है, उस पर बड़ी इमारत खड़ी करनी है. इसके लिए जरूरी है कि विकास की रफ्तार बनी रहे.

कहा गया है, "हम में काम करने का जज्बा है और यूपी को विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने का इरादा है. रफ्तार से काम हुआ है और राहुल का साथ मिलने के बाद रफ्तार और तेज होगी."

पीके के ये वालेंटियर सफेद रंग की टीशर्ट पहनते हैं जिसके पीछे गठबंधन का नारा 'यूपी को ये साथ पसंद है' लिखा रहता है. यह अभियान उन जिलों में चलाया जा रहा है, जहां अगले तीन चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं.

टीवी पर उत्तर प्रदेश का प्रचार अभियान देखने वाले अन्य राज्यों के लोग समझ रहे होंगे कि सिर्फ चुनावी रैलियां हो रही हैं, लेकिन सच तो यह है कि पीके के वालेंटियर हर घर और दुकान पर पहुंच रहे हैं. इसके अलावा यूपी के हर गांव में गठबंधन का प्रचार विजय रथ वैन के जरिए भी किया जा रहा है.

करीब 250 वैन के जरिए गांव-गांव में गठबंधन का संदेश पहुंच रहा है. एक गांव में यह वैन कम से कम 20 से 25 बार रुकती है और फिर इसमें लगी एलईडी स्क्रीन के जरिए एक 30 मिनट की शॉर्ट फिल्म दिखाई जाती है.

सूत्रों का कहना है कि एक समय में इस फिल्म को देखने वालों की संख्या करीब 50 से 75 तक रहती है. उनके सामने जो फिल्म दिखाई जाती है, उसमें राहुल और अखिलेश की संयुक्त प्रेस वार्ता के अंश, दोनों नेताओं के रोड शो के अंश और 'यूपी को यह साथ पसंद है' गाना के अलावा नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में जो वादे किए थे और प्रधानमंत्री बनने के बाद कौन-कौन से वादे पूरे नहीं किए, ये भी दिखाया जाता है.

पीके के एक वालेंटियर ने बताया कि अखिलेश के लिए जनता में काफी सकारात्मक संदेश है. गठबंधन रैलियों के जरिए जवाब देने के साथ ही जमीन पर भी आम जनमानस तक यूपी के विकास और युवाओं की तरक्की का रोडमैप पहुंचा रहा है.

प्रशांत किशोर के इस प्रचार तरकीब का जनता पर कितना असर हो रहा, यह 11 मार्च को ईवीएम खुलने के बाद ही पता चलेगा.

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