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यूपी डायरी: अमेठी और उसकी रानियों की कहानी

अमिता सिंह को देख कर अब भी लगता है कि वह एक स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं

Updated On: Feb 19, 2017 08:41 PM IST

Rakesh Bedi

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यूपी डायरी: अमेठी और उसकी रानियों की कहानी

वीवीआईपी चुनाव क्षेत्रों को संवारा और सजाया जाता है. लेकिन बरसों से गांधी परिवार के सदस्यों को संसद में भेजने वाले रायबरेली और अमेठी इस मामले में बदकिस्मत रहे हैं.

वहां सड़कों में गड्ढे हैं. इतने गड्ढे कि आपकी हड्डियों के जोड़ हिल जाएं. इमारतें बेजान और जर्जर हैं. लगभग हर जगह आपको गरीबी के निशान दिखते हैं. चप्पा चप्पा अनदेखी और उपेक्षा की कहानी कहता है.

बहुत से इलाकों को देखकर लगता है कि उन्होंने कभी उद्योग धंधों का मुंह नहीं देखा है. दोनों ही जगह आईटीआई और रेल कोच फैक्ट्री जैसी चीजें हैं: जो नौकरी के अवसर तो देती हैं लेकिन इलाके की तस्वीर नहीं बदलतीं.

जब भी आप किसी वीवीआईपी चुनाव क्षेत्र में जाते हैं तो आपको बहुत उम्मीदें होती हैं. आप मान चलते हैं कि बिजली ठीक ठाक आती होगी, अच्छी साफ सफाई होगी. रायबरेली और अमेठी, दोनों अपनी गफलत और सुस्ती से आपको हैरान करते हैं. दोनों ही जगहों पर शाइनिंग इंडिया की कोई मिसाल नहीं दिखती.

लोग हतोत्साहित दिखते हैं और यूं समझिए बस अपना काम किए चले जा रहे हैं. इन दोनों जगहों को उस तेज रफ्तार इंजन से जोड़ने की कोशिश क्यों नहीं हुई जो भारत को आर्थिक वृद्धि और तरक्की की पटरी पर ले जा रहा है. अगर गांधी परिवार भारतीय राजनीति की चमक दमक का प्रतिनिधित्व करता है तो अफसोस के साथ कहना होगा कि उनका चुनाव क्षेत्र निराशा और मुकम्मल नाकामी की तस्वीर पेश करता है.

अमेठी की रानी की कहानी 

अमेठी से कांग्रेस प्रत्याशी अमिता सिंह को देख कर अब भी लगता है कि वह एक स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं. वह तरोताजा रहती हैं. हमेशा फिट और तत्पर. वह चुनाव प्रचार में लगे कार्यकर्ताओं को फटाफट निर्देश देती हैं और उन्हें घर भेजती हैं. वैसे अमिता सिंह कभी अमिता मोदी हुआ करती थीं.

अमेठी से कांग्रेस प्रत्याशी अमिता सिंह

अमेठी से कांग्रेस प्रत्याशी अमिता सिंह

रात के दस बजे हैं, लेकिन उनका लंबा दिन खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस बात को समझा जा सकता है. आखिरकार वह अमेठी की रानी हैं. अपने गुफा जैसे दफ्तर में एक चमकदार पीली साड़ी में दमक रही हैं. यहां तक कि उन्होंने जो सैंडल पहने हैं, वह भी पीले रंग के हैं और बहुत चमकीले हैं.

बेहद ऊंची छत से एक पोल के सहारे पंखा लटक रहा है. उसके नीचे रखी मेज पर तीन प्लेटों में समोसे, रसगुल्ले और मट्ठियां रखी हैं. मेज के चारों तरफ एक भूरे रंग का सोफा है. उसी पर रानी बैठी हुई हैं और मीडिया से बात कर रही हैं.

उनका मझौली उम्र वाला चेहरा, माथे पर लाल रंग की बिंदी. उन्हें देखकर लगता है कि वह उन ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों से बहुत आगे निकल आई हैं जब उन्होंने बैडमिंटन स्टार सैयद मोदी से शादी की थी जिनकी बाद में हत्या हो गई. उनके मौजूदा पति, अमेठी के पूर्व राजा संजय सिंह किसी दूरदराज इलाके में उनका प्रचार कर रहे हैं.

कार्यकर्ताओं की फौज संजय सिंह के दफ्तर के बाहर खड़ी है, लेकिन उनके लौटने के कोई संकेत नहीं दिखते. अंदर रानी दरबार लगाती हैं. इस बार उनका कड़ा मुकाबला है पूर्व रानी से, जिनका संजय सिंह के महल के एक हिस्से पर नियंत्रण है.

गरिमा सिंह, संजय सिंह की पहली पत्नी. उन्हें बीजेपी ने अमेठी से टिकट दिया और बहुत संभव है कि वह जीत भी जाएं. अमिता उनके बारे में कहती हैं कि वह लोगों के वोट पाने के लिए भावनाओं को इस्तेमाल कर रही हैं. लेकिन वह इससे आगे नहीं जातीं. पत्रकारों का झुंड उनके कमरे से निकलने लगता है और वह भी झट से अपनी कुर्सी से उठ जाती हैं, अपने कार्यकर्ताओं को नए निर्देश देने के लिए.

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