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सपा-कांग्रेस गठबंधन की इनसाइड स्टोरी: क्या पहले से तय थी स्क्रिप्ट?

‘साइकिल और खाट’ का कॉम्बिनेशन ‘पंजे’ को यूपी में संजीवनी दे पाएगा या नहीं ?

Updated On: Jan 17, 2017 05:03 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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सपा-कांग्रेस गठबंधन की इनसाइड स्टोरी: क्या पहले से तय थी स्क्रिप्ट?

एक बार अखिलेश ने कहा था ‘हमने एक किसान की फोटो देखी थी, वो खाट पर बैठा था और उसके हाथ में मोबाइल फोन था. सामने लैपटॉप रखा था जिसमें साइकिल की इमेज थी. मुझे तो लगता है कि खाट और साइकिल का भी रिश्ता हो सकता है. अगर दो अच्छे लोग साथ आएं तो इसमें बुरा क्या है?’

अब पिता से साइकिल लेने के बाद अखिलेश राहुल के साथ दोस्ती की खाट पर बैठ रहे हैं.

नई पीढ़ी की ये दोस्ती पुरानी पीढ़ी की खटास को हमेशा के लिये खत्म करने की कोशिश है.

बड़ा सवाल ये भी है कि क्या मुलायम सिंह के रहते कांग्रेस के साथ सपा का गठबंधन मुमकिन नहीं था?

क्या मुलायम के पार्टी-परिवार ड्रामें में कांग्रेस से गठबंधन का भी कोई पेंच था ?

दरअसल मुलायम की राजनीति के ‘चरखा दांव’ से कांग्रेस का भरोसा बार बार टूटा. मुलायम सिंह यादव ने यूपी में कांग्रेस को हाशिये पर लाने का काम किया.

अल्पसंख्यकों की इकलौती हितैषी पार्टी के रूप में समाजवादी पार्टी को खड़ा किया. मुलायम नहीं चाहते थे कि यूपी में अल्पसंख्यक के वोट उनके अलावा कांग्रेस के खेमे में जाएं.

अब होगी राहुल-अखिलेश की दोस्ती

सियासी दांवपेंच और विरोध के चलते राजनीति की पुरानी पीढ़ी में आपस में कभी विश्वास की बहाली मजबूती से नहीं हो सकी. चाहे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हों या फिर सोनिया गांधी हों जब बात सपा से गठबंधन की आई तो हमेशा संदेह की बुनियाद पड़ी.

साल 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मुलायम की मुलाकात हुई. सपा और कांग्रेस के गठबंधन के कयास लगने लगे. राजीव गांधी से मुलाकात में मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में गठबंधन की घोषणा करने का वादा किया.

अगली सुबह दिल्ली से लखनऊ भी आ गए लेकिन उन्होंने विधानसभा भंग कर अपने दम पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. कांग्रेस के लिये मुलायम का ये करारा झटका था.

उसके बाद समाजवादी पार्टी पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सत्ता तक न पहुंचने देने का भी आरोप लगा.

तो मुलायम ने भी कांग्रेस पर उनके खिलाफ सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया.

राहुल ने अखिलेश की तारीफ की.

राहुल ने अखिलेश की तारीफ की.

कांग्रेस के संदेह के चलते ही राहुल गांधी ने ये तक कहा कि वो अखिलेश के साथ दोस्ती का रिश्ता निभा सकते हैं लेकिन मुलायम सिंह के साथ वो असहज महसूस करते हैं.

लेकिन वक्त के साथ मुलायम ने कांग्रेस को लेकर नरम तेवर भी दिखाए तो कांग्रेस ने भी राजनीति की रिश्तेदारी को निभाया.

साल 2014 में कांग्रेस ने डिंपल यादव के खिलाफ कन्नौज सीट से उम्मीदवार नहीं खड़ा किया.

बदले में समाजवादी पार्टी ने भी गांधी परिवार के खिलाफ 2014 के चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा.

दरअसल साल 2009 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के ताबड़तोड़ प्रचार की आंधी में डिंपल यादव फिरोजाबाद की सीट हार गईं थीं. लेकन साल 2014 में कांग्रेस ने कन्नौज सीट से नहीं लड़ने का फैसला किया क्योंकि डिंपल 2014 में दोबारा खड़ी हो रही थीं.

समाजवादी पार्टी ने भी गांधी परिवार के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया. इसके बावजूद दोनों के बीच लंबी दूरी साथ तय करने वाले रिश्तों की गुंजाइश नहीं दिख रही थी.

लेकिन जिस तरह से मुलायम परिवार में महाभारत हुई और अखिलेश पार्टी के साथ सिंबल लेकर अलग हो गए उससे ये लगता है कि गठबंधन की स्क्रिप्ट भी पहले से तय थी जिसके लिये शर्तों को पूरा करने का काम हो रहा था.

बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए साथ आएंगे राहुल-अखिलेश

अब मुलायम कांग्रेस के साथ नहीं हैं लेकिन नई पीढ़ी के युवराज अखिलेश कांग्रेस के युवराज राहुल के साथ हैं. नए दौर के नए रिश्ते में किसी को संशय भी नहीं है.

पिता से दूरी के बाद बेटे अखिलेश ने राहुल गांधी की तारीफ की.

पिता से दूरी के बाद बेटे अखिलेश ने राहुल गांधी की तारीफ की.

राहुल से दोस्ती पर अखिलेश ने कहा था कि ‘राहुल अच्छे लड़के हैं, अच्छे इंसान है, वह ज्यादा से ज्यादा यूपी आएंगे तो उनसे दोस्ती भी हो जाएगी.’

तो राहुल ने भी ‘देवरिया से दिल्ली की यात्रा’ में अखिलेश सरकार के खिलाफ एक भी बात नहीं बोली. जबकि राजनीति कहती है कि राज्य सरकार की नाकामियां गिनाना पहली रणनीति होती है लेकिन राहुल के निशाने पर सिर्फ और सिर्फ पीएम मोदी और बीजेपी ही रही.

बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिये समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन का इतिहास रहा है. क्योंकि बीजेपी का ही डर दिखा कर दोनों अल्पसंख्यकों के वोटों को आपस में बांटते आए हैं.

अब नई पीढ़ी की दोस्ती को देखकर कहा जा सकता है कि यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी फिर से जवान हो गई है और इनकी दोस्ती में पुरानी पीढ़ी की शिकायतें और खटास नहीं हैं.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि असल दोस्ती जिस सत्ता की है उसके लिये ‘साइकिल और खाट’ का कॉम्बिनेशन ‘पंजे’ को यूपी में संजीवनी दे पाएगा या नहीं.

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