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मैं उम्मीदवार: पश्चिमी इलाहाबाद से समाजवादी प्रत्याशी ऋचा सिंह की बात

मैं चुनाव जीतती हूं तो कोशिश करूंगी कि ये सारी बातें लागू भी करवा सकूं

Updated On: Mar 01, 2017 05:46 PM IST

Aakar Patel

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मैं उम्मीदवार: पश्चिमी इलाहाबाद से समाजवादी प्रत्याशी ऋचा सिंह की बात

मैं अपने चुनाव प्रचार के दौरान अपने विधानसभा सीट पर पिछले दस सालों में हुए विकास कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हूं. इस पर पब्लिक की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक है. ज्यादातर लोगों की राय है कि विकास बिल्कुल भी नहीं हुआ है.

सड़कें जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के मौसम में ये सड़कें और खतरनाक हो जाती हैं. बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों में तो बारिश के दौरान जाना-आना मुश्किल हो जाता है. खराब सड़कों की वजह से दुर्घटनाएं होती हैं. इसलिए मैं सड़कों के विकास और उनके रख रखाव पर विशेष ध्यान दूंगी.

विधायक निधि का पैसा तो मैं खर्च करूंगी ही साथ में राज्य और केंद्र सरकार से भी अनुदान राशि भी मांगूंगी, जिससे बेहतर सड़कों का निर्माण कराया जा सके.

इसके अलावा मैं प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन पर भी काम करूंगी. स्कूल एजुकेशन बच्चों का भविष्य निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाती है इसलिए गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए कई कदम उठाने की कोशिश करूंगी.

पब्लिक हेल्थ मेरी सीट पर तीसरा अहम मुद्दा है. निजी अस्पताल महंगे हैं इस वजह से सरकारी अस्पताल बढ़ाए जाने की जरूरत है. इस दिशा में भी मैं ठोस पहल करने की कोशिश करूंगी. मेरे विकास के एजेंडे में स्वास्थ्य और शिक्षा को सभी तक पहुंचाना विशेष प्राथमिकता में शामिल है.

Richa Singh

सपा प्रत्याशी रिचा सिंह (मध्य) चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ.

लोगों को रोजगार देने के लिए लघु उद्योगों को बढ़ाने की पहल भी की जाएगी. मेरे विधानसभा क्षेत्र में मुर्गी पालन रोजगार का एक अच्छा जरिया हो सकता है. लेकिन इसकी अनदेखी की वजह से ज्यादातर पॉल्ट्री फॉर्म बंद हो चुके हैं. मेरी कोशिश होगी कि इन्हें दोबारा से शुरू कराया जाए. ई रिक्शा भी रोजगार का एक बेहतर जरिया हो सकता है.

मेरी नजर में राजनीति में धनबल और बाहुबल दो बड़ी बीमारियां हैं. ये न केवल मतदाता पर नकारात्मक असर डालते हैं बल्कि एक आम व्यक्ति को राजनीति में आने से भी रोकते हैं. धनबल-बाहुबल का प्रयोग बढ़ने की वजह से ही ज्यादातर लोग राजनीति को बुरी निगाह से देखने लगे हैं.

इसके अलावा महिला सशक्तिकरण समाज का एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. किसी भी समाज के विकास का आईना वहां की महिलाओं की हालत होती है. मेरी नजर में महिला सशक्तिकरण का मतलब है, महिलाओं की हर क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी.

मेरे एजेंडे में ये सारी बातें प्रमुखता से हैं. और अगर मैं चुनाव जीतती हूं तो कोशिश करूंगी कि ये सारी बातें लागू भी करवा सकूं.

(लेखिका समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार हैं. ये लेखिका के निजी विचार हैं.  आलेख में दी गई जानकारी और व्यक्त किये विचारों के प्रति फ़र्स्टपोस्ट उत्तरदायी नहीं है. आलेख को ज्यों का त्यों प्रकाशित किया गया है.फर्स्टपोस्ट का लेखक के विचारों से कोई लेना-देना नहीं है.) 

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