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यूपी चुनाव 2017: पश्चिमी यूपी से शुरू हुई लखनऊ की दौड़

यूपी चुनाव के महासमर के इस पहले चरण में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Feb 11, 2017 08:24 AM IST

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यूपी चुनाव 2017: पश्चिमी यूपी से शुरू हुई लखनऊ की दौड़

उत्तर प्रदेश में सियासत के संग्राम का बिगुल पश्चिम उत्तर प्रदेश से फूंका जा रहा है. चुनाव के इस पहले ही चरण में ही कई सूरमाओं की परीक्षा होनी है. बीजेपी के संगीत सिंह सोम और सुरेश राणा को आज जनता के इम्तिहान से गुजरना होगा.

यूपी चुनाव की घोषणाएं होने के पहले से ही पश्चिम यूपी के कैराना पर मीडिया की निगाहें पैनी बनी हुई हैं. कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाने वाले बीजेपी सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह चुनाव लड़ रही हैं. बीजेपी को इन सीटों पर काउंटर पोलराइजेशन का भरोसा है.

मृगांका के सामने उनके ही चचरे भाई अनिल चौहान आरएलडी से खड़े हैं और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं. ऐसे में हुकुम सिंह के लिए ये चुनौती वाली बात ही होगी कि वे साबित करें कि उनके उठाए मुद्दे का लोगों की तरफ से समर्थन है.

वहीं मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में आरोपी सरधना से बीजेपी विधायक संगीत सिंह सोम और थानाभवन से सुरेश राणा का भी चुनाव जीतना या हारना बहुत हद तक प्रतीकात्मक होगा.

मुकाबले का गणित

Voting

प्रतीकात्मक तस्वीर

विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 15 जिलों में वोट डाले जाएंगे. पश्चिम उत्तर प्रदेश की 73 सीटों पर सभी पार्टियां अपने दांव चल चुकी हैं. कुल 840 उम्मीदवार मैदान में हैं और अब जनता की बारी है.

73 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है. जहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन इलाके में ताल ठोंक रहा है वहीं बीजेपी और बीएसपी अपने अपने चुनावी समीकरणों से जुटे हुए हैं.

पहले चरण में गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, हापुड़, शामली, मुजफ्फरनगर,बागपत, ,बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा हाथरस,आगरा, फिरोजाबादा, एटा, कासगंज में वोट डाले जाएंगे.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इन सीटों पर साल 2012 में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी में कड़ा मुकाबला था. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने 24-24 सीटें जीती थीं. लेकिन बीजेपी को केवल 10 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस को 5.

जाट,मुस्लिम और पिछड़ी जातियां इन सीटों पर निर्णायक भूमिका अदा करती आई हैं. 15 में से 11 जिले में जाट वोटरों की बड़ी भूमिका है. ऐसे में जाट वोटर को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच खींचतान है. तकरीबन 20 सीटों पर आरएलडी जीत की उम्मीद लगाए हुए है.

पहली बार अकेले चुनाव लड़ रही आरएलडी

ajit singh

राष्ट्रीय लोकदल पहली बार अकेले चुनावी मैदान में है. इसकी एक वजह ये मानी जा रही है कि बीजेपी से जाट वोटर नाराज हैं और आरएलडी जाट वोटों को खोना नहीं चाहता. वहीं दूसरा पहलू ये भी है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद हालात बदले हैं. ऐसे में आरएलडी ने सपा से हाथ मिलाना ठीक नहीं समझा.

वहीं मायावती ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग का पूरा खाका तैयार किया है. जाट, मुस्लिम और दलित वोटर उतारने में बीएसपी ने पूरे गणित का ध्यान रखा है. पिछले विधानसभा चुनाव में मायावती ने मुलायम सिंह को कड़ी टक्कर दी थी.

जबकि जबकि बीजेपी को उम्मीद है कि वोटों के ध्रुवीकरण से वो इस इलाके से सीटों का बड़ा हिस्सा ले जा सकेगी.

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