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यूपी चुनाव 2017: एसपी के गढ़ आजमगढ़ में सेंधमारी आसान नहीं लग रही

यादव और मुस्लिम बहुल आजमगढ़ इलाके में 2012 में दस में से नौ सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा था

Updated On: Feb 24, 2017 01:31 PM IST

Amitesh Amitesh

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यूपी चुनाव 2017: एसपी के गढ़ आजमगढ़ में सेंधमारी आसान नहीं लग रही

आजमगढ़ के सिबली कॉलेज में एक सेमिनार के दौरान कई मौजूदा और पूर्व छात्रों से बात करने का मौका मिल गया. कोई अपनी पुरानी यादों को याद करता दिखा तो कोई सिबली कॉलेज को यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग करता दिख गया.

लेकिन, चुनावी माहौल में आजमगढ़ के सिबली कॉलेज में भी चर्चा होती रही कि इस बार कौन इस कॉलेज के लिए और इस पूरे इलाके के लिए बेहतर साबित हो सकता है.

इसी कॉलेज से पढ़े और अब लेक्चरर मो.आरिफ फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में कहते हैं कि यह एक फ्रीडम फाइटर का केंद्र रहा है. अगर इसे यूनिवर्सिटी में बदला जाता है तो इससे बहुत फायदा होगा.

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आजमगढ़ का जब भी जिक्र होता है तो सिबली कॉलेज की चर्चा जरूर होती है, लेकिन, दिल्ली में बटला हाउस एंकाउंटर के बाद से ही आजमगढ़ का जिक्र होते ही चर्चा आजमगढ़ के आतंकी कनेक्शन को लेकर शुरू हो जाती है.

बातचीत के दौरान सिबली कॉलेज में केमेस्ट्री के लेक्चरर मो.आरिफ बताते हैं आजमगढ़ के बारे में इस तरह की चर्चा होती है तो काफी दर्द होता है, दुख होता है.

mo.arif

बटला हाउस इनकाउंटर

बटला हाउस इनकाउंटर में मारे गए लड़के संजरपुर इलाके के थे. लेकिन, इस तरह की चीजें साजिश के तहत भी होती हैं. हमें तो प्रशासन पर शक भी होता है.

मो.आरिफ का कहना है कि इस इलाके के कुछ मुस्लिम लड़के राजस्थान के कोटा पढ़ने के लिए गए थे, लेकिन..उन्हें आजमगढ़ के होने के चलते कोटा में रहने में दिक्कत हुई और उन्हें वापस आना पड़ गया.

सिबली कॉलेज के भीतर कुछ और लड़कों के साथ मिलने पर ऐसा लगा कि उनके भीतर इस बात को लेकर नाराजगी भी है. खासतौर से नाराजगी बीजेपी के खिलाफ दिख रही है.लेकिन, अखिलेश को लेकर एक अलग नजरिया है.

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यहां आजमगढ़ जिले के हालात को लेकर चर्चा जरूर होती है. चर्चा के दौरान सिबली कॉलेज के छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष मंतराज यादव कहते हैं आजमगढ़ में बिजली खूब आती है और मुलायम सिंह यादव का संसदीय क्षेत्र होने के चलते यहां विकास भी खूब हुआ है.

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मंतराज यादव को बाकी लोगों से समर्थन भी मिल रहा है. मो.आरिफ ने भी इस बात को दोहराया कि आजमगढ़ का विकास अखिलेश सरकार में हुआ है और इस बार भी अखिलेश यादव की तरफ ही यहां झुकाव देखने को मिल रहा है.

कमोबेश यही हाल आजमगढ़ के बाकी इलाकों में दिख रहा है जहां चर्चा भले ही विकास की हो रही है लेकिन, जाति और महजब के नाम पर समीकरण तैयार हो रहा है.

यादव और मुस्लिम आबादी

यादव और मुस्लिम बहुल आजमगढ़ इलाके में 2012 में दस में से नौ सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा था. पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त भी मोदी लहर के बावजूद आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव अपनी सीट बचाने में सफल रहे थे.

लोकसभा चुनाव के वक्त जब नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया तो मुलायम सिंह यादव ने मोदी लहर को पूर्वांचल में ही रोकने की ठान ली. मोदी वाराणसी में थे तो नेता जी आजमगढ़ में ताल ठोक रहे थे.

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उत्तर प्रदेश के भीतर मुलायम सिंह यादव मोदी लहर को रोकने में सफल तो नहीं हो पाए लेकिन, आजमगढ़ में अपनी लाज बचा ली थी.

इस बार भी समाजवादी पार्टी ने विधानसभा में तीन मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. कोशिश है कि यादव-मुस्लिम गठबंधन के दम पर इस बार भी सपा के गढ़ को बरकरार रखा जाए.

पिछड़ी जातियों की गोलबंदी

लेकिन, आजमगढ़ के समीकरण में सबकुछ पिछड़ी जातियों की गोलबंदी पर निर्भर करेगा. पूरे यूपी की तरह यहां भी बीजेपी की रणनीति गैर-यादव पिछड़ी जातियों की गोलबंदी पर निर्भर करेगी.

जिले की दस में से 6 सीटों पर बीजेपी की तरफ से पिछड़ी जाति के ही उम्मीदवार मैदान में हैं. जबकि एक सुरक्षित सीट पर बीजेपी ने एक पासी जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है. हालांकि, यादव वोट बैंक में सेंधमारी की बीजेपी की कोशिश भी पहले से रही है.

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समाजवादी पार्टी से बीएसपी के रास्ते होते हुए बीजेपी में शामिल रमाकांत यादव ने 2009 में लोकसभा चुनाव जीता था. इस इलाके में बीजेपी के लिए ये बड़ा उलटफेर रहा था. लेकिन, रमाकांत यादव 2014 में मुलायम सिंह यादव से चुनाव हार गए थे.

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इस बार बीजेपी ने रमाकांत यादव के बेटे अरूण यादव को फूलपुर सीट से इस बार विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारा है.

बीजेपी की कोशिश गैर-यादव पिछड़ी जातियों और सवर्ण मतदाताओं को साथ लाकर सपा के यादव-मुस्लिम गठजोड़ की काट निकालने की है. बीएसपी भी मुकाबले को हर जगह त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है.

हिंदुत्व के नाम पर यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में तो गैर-यादव पिछड़ी जातियों की गोलबंदी बीजेपी के साथ तो दिख रही है. लेकिन, जाति में बंटे पूर्वांचल इलाके में बीजेपी के लिए मुलायम के किले में ज्यादा सेंधमारी कर पाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है.

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