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1 जून को होगा ब्रह्मेश्वर मुखिया के स्मारक का अनावरण, हो सकते हैं कई राजनीतिक दिग्गज शामिल

ब्रह्मेश्वर मुखिया ने नक्सलियों के खिलाफ हथियारबंद संघर्ष के लिए बेलाउर गांव में एक बड़ी सभा करके 1994 में रणवीर सेना का गठन किया था

Updated On: May 27, 2018 08:02 AM IST

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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1 जून को होगा ब्रह्मेश्वर मुखिया के स्मारक का अनावरण, हो सकते हैं कई राजनीतिक दिग्गज शामिल

रणवीर सेना के चर्चित संस्थापक स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ मुखियाजी को महापुरुष और अवतार की श्रेणी में लाने की कवायद शुरू कर दी गई है. दिवंगत मुखियाजी के स्मारक सह मंदिर का निर्माण कार्य चार कट्ठा जमीन पर दिन-रात चल रहा है. आदमकद प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा सह अनावरण एक भव्य समारोह के बीच उनके जन्म स्थली खोपिरा में कई राजनीतिक और समाजिक हस्तियों की मौजूदगी में एक जून को की जाएगी.

खोपिरा गांव भोजपुर जिला के पवना थाना में है. रणवीर सेना और मुखियाजी के लिए दिल में प्रेम का भाव रखने वाले जमात के लोग 1 जून को शहादत दिवस के रूप में पिछले 6 साल से मना रहे हैं क्योंकि साल 2012 की यह वही मनहूस तारीख है जिस दिन किसी ने बड़ी बेरहमी से 67 वर्षीय ब्रह्मेश्वर सिंह की आरा शहर में निर्मम हत्या कर दी थी. हत्या सूर्योदय के ठीक पहले की गई थी जब मुखियाजी मॉनिंग वॉक कर रहे थे. हत्यारे अभी तक पकड़ से बाहर है.

किन नेताओं को भेजा गया है निमंत्रण?

कई राजनीतिक और सामाजिक दिग्गज भी इस (गैर) राजनीतिक समारोह में शिरकत करेंगे. सारा कार्यक्रम ‘अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन’ के बैनर तले संपन्न होगा. संगठन के अध्यक्ष और ब्रह्मेश्वर सिंह के पुत्र इंदु भूषण सिंह ने बताया कि 'संगठन की ओर से लालू यादव से लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तक को निमंत्रण पत्र उचित माध्यम से भेज दिया गया है. यहां तक की बिहार के सीएम नीतीश कुमार को भी आमंत्रण पत्र भेजा गया है.' कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय खोपिरा के ग्रामीणों को पक्का भरोसा है कि 'कोई आए या न आए माननीय गिरिराज सिंह तो अवश्य ही पधारेंगे.'

बहरहाल, ब्रह्मेश्वर मुखिया के पोते और संगठन के केंद्रीय कमिटि के सदस्य चंदन सिंह का कहना है कि 'योजना के अनुसार गांव में निर्माणाधीन स्मारक स्थल अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन का हेडक्वार्टर भी होगा. एकदम नागपुर में निर्मित आरएसएस मुख्यालय की शक्ल में इसको बनाया जाएगा.' वो बताते हैं कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की संगमरमर की प्रतिमा करीब एक लाख रुपए खर्च करके भगवान महादेव की नगरी वाराणसी में बनवाई गई है. उनके अनुसार संगठन ने प्रशासनिक स्तर पर इस सवाल के लिए भी पहल शुरू कर दी है कि खोपिरा गांव का नाम बदलकर ब्रह्मेश्वर ग्राम कर दिया जाए. गांव के ही बीए के छात्र चंदन कुमार बताते हैं कि 'मुखिया जी हमलोगों के लिए भगवान से कम नहीं हैं वो हमारे दिल और दिमाग में और देवताओं की भांति हमेशा विद्यमान रहते हैं.'

brahmeshwar mukhiya

इस तरह चर्चा में आई थी रणवीर सेना

ब्रह्मेश्वर मुखिया ने नक्सलियों के खिलाफ हथियारबंद संघर्ष के लिए बेलाउर गांव में एक बड़ी सभा करके 1994 में रणवीर सेना का गठन किया था. नब्बे के दशक में रणवीर सेना और नक्सलियों के बीच खूब खून-खराबा हुआ. दोनों तरफ के सैकड़ों लोग मारे गए. गठन के 3 साल बाद 1997 में रणवीर सेना अरवल जिला के लक्ष्मणपुर बाथे गांव में 58 दलितों की निर्मम हत्या करके दुनिया में चर्चित हुई. तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार ने रणवीर सेना को बैन करके ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया को फरार घोषित कर दिया था और उनको जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए 5 लाख रूपए का इनाम भी घोषित किया गया था. पटना यूनिर्वसिटी से राजनीतिक विज्ञान में एमए ब्रह्मेश्वर मुखिया एक संपन्न किसान थे. वे कई बार र्निविरोध मुखिया भी चुने गए थे.

राबड़ी राज में ही 29 अगस्त 2002 को ब्रह्मेश्वर सिंह की गिरफ्तारी रहस्मय तरीके से पटना के एग्जीविशन रोड से पुलिस ने की. 8 जुलाई 2011 को उनकी रिहाई हुई थी. 277 लोगों की हत्या से संबंधित 22 अलग-अलग क्रिमिनल केस में ब्रह्मेश्वर मुखिया को पुलिस ने अभियुक्त बनाया था. इनमें 16 मामलों में साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था जबकि बाकी के 6 मामलों में वे जमानत पर थे.

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जेल से बाहर आने के बाद राजनीति में कूदने की थी तैयारी

जेल से बाहर आने के बाद 5 मई 2012 को ब्रह्मेश्वर सिंह ने अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के नाम से एक संगठन बनाया और हजारों लोगों की उपस्थिति में दावा किया कि आगे से वो किसानों और मजदूरों के हित की लड़ाई लड़ेगें. लोग उनके पक्ष में गोलबंद भी हो रहे थे. उनकी मांग थी कि सरकार किसानों से धान को 3000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदे और मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 500 रुपए तय करे. कहते हैं कि धीरे-धीरे उनका रूझान राजनीति की तरफ भी हो रहा था जिसके कारण कुछ घाघ किस्म के राजनीतिक जीव, जो भोजपुर जिले को अपना जागीर समझते हैं, परेशान रहते थे.

ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या की जांच सीबीआई कर रही है. चंदन सिंह का आरोप है कि 'सीबीआई नौ दिन में ढाई कोस की दूरी भी तय नहीं कर पाई है. मुझे शक है कि जानबूझकर हत्यारों को बचाया जा रहा है. बचाने के मुहिम में सरकार में ऊंचे पदों पर विराजमान कुछ लोगों की संलिप्तता भी है.' चंदन सिंह धमकी भरे लहजे में कहते हैं कि 'रणवीर सेना समाप्त नहीं हुई है और न ही सुसुप्ता अवस्था में है. अगर दादा जी के हत्यारों को जल्दी पकड़ा नहीं जाता है तो न्याय के लिए दुबारा जंग शुरू हो सकती है.'

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