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योगी के 'ठोक देंगे' वाले जुमले का विकृत रूप है उन्नाव रेप केस

कुलदीप सेंगर जैसे लोगों का खुला समर्थन या छुपकर साथ देना, आगे चलकर अराजकता को ही जन्म देगा, जो योगी को बहुत भारी पड़ सकता है

Ajay Singh Ajay Singh Updated On: Apr 11, 2018 01:09 PM IST

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योगी के 'ठोक देंगे' वाले जुमले का विकृत रूप है उन्नाव रेप केस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बात का श्रेय तो निश्चित रूप से दिया जा सकता है. उन्होंने बॉलीवुड के मशहूर डायलॉग, 'ठोक देंगे' को फिल्मों से उठाकर सीधे अपने निजाम में लागू कर दिया. बॉलीवुड में 'ठोक देंगे' का मतलब होता है किसी का खात्मा करना.

योगी आदित्यनाथ ने इस जुमले का इस्तेमाल पिछले साल किया था. उन्होंने कहा था कि, 'अगर अपराध करेंगे तो ठोक देंगे'. ऐसा लगा था कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में जुर्म करने वाले अपराधियों को कड़ा संदेश दे रहे थे कि या तो वो सुधर जाएंगे या फिर उन्हें पुलिस 'ठोक देगी'. ऐसा लगता है कि इस फिल्मी डायलॉग को यूपी के प्रशासन, खास तौर से पुलिस ने कुछ ज्यादा ही दिल से लगा लिया है.

राजनीति का अपराधीकरण

उन्नाव में रेप पीड़ित युवती के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत इस बात की मिसाल है कि तब क्या होता है जब प्रदेश का मुखिया पुलिस को इस बात का पूरा अख्तियार दे दे कि वो जिसे चाहे अपराधी ठहराकर उसका खात्मा कर दें. बीजेपी के ताकतवर राजपूत विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने ये सुनिश्चित किया कि जब उनके गुर्गे उस शख्स की हत्या कर रहे हों, जिसकी बेटी ने उन पर बलात्कार का आरोप लगाए हों, तो पुलिस भी इस काम में उनका हाथ बंटाए. इस हत्या की साजिश में पुलिस यकीनन शामिल थी.

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सोमवार को हुई घटना कोई आम अपराध नहीं है. ये इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में राजनीति का किस कदर अपराधीकरण हो गया और योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद ये और बढ़ता जा रहा है. प्रशासन के जुर्म में शरीक होने की वजह तलाशने के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं. उत्तर प्रदेश की पुलिस ने पिछले एक साल में अपराधियों के खात्मे के इरादे से कई संदेहास्पद मुठभेड़ों को अंजाम दिया है. पुलिस ने एनकाउंटर के जुनून में कानून को अपने हाथ में ले लिया है. पुलिस वाले ऐसा बर्ताव कर रहे हैं जैसे कि खुद वो ही कानून हैं.

अपनी पहुंच और रसूख दिखा रहे हैं सेंगर

आखिर हम और किस तरह इस बात को बयां करें जब किसी ताकतवर विधायक के जुल्म के शिकार परिवार के एक शख्स को इस तरह मार दिया गया. आम हालात में विधायक और उसके भाई को महिला के बलात्कार और छेड़खानी का आरोप लगाने के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया होता. लेकिन कुलदीप सिंह सेंगर तो आरोप लगने के बाद भी खुलेआम मुख्यमंत्री के आवास के इर्द-गिर्द टहल रहे थे. अपने रसूख और पहुंच का मुजाहिरा कर रहे थे. पीड़िता और उसके परिवार को निचले स्तर के लोग कहकर कुलदीप सेंगर सरेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे थे.

Kuldeep-Singh-Sengar

क्या किसी और सभ्य समाज में किसी बलात्कार के आरोपी को इस तरह की छूट दी जा सकती है? ये देश के सबसे बड़े सूबे की कड़वी हकीकत है, जहां निजाम खुद कानून के राज का मखौल उड़ा रहा है. मामला तब और पेचीदा हो जाता है, जब खुद योगी आदित्यनाथ एक राजपूत हैं और वो समाज के दूसरे तबके के लोगों को साथ लेकर चलने में नाकाम रहे हैं.

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हर मोर्चे पर असफल रहे हैं योगी

अपने भगवा लिबास और पिछले बयानों के चलते योगी आदित्यनाथ मुसलमानों की चिंताओं को दूर करने में पहले ही नाकाम रहे हैं. बल्कि उन्होंने तो मुस्लिमों की असुरक्षा को ये कहकर और बढ़ा दिया कि वो हिंदू हैं इसलिए ईद नहीं मनाएंगे. सिर्फ सांप्रदायिक बयानबाजी ही नहीं, योगी आदित्यनाथ तमाम जातीय समीकरण साधने में नाकाम रहे हैं. वो उन जातियों को अपने साथ नहीं ला पाए हैं, जिन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में बहुत अहम रोल निभाया था. जिस तरह से योगी के राज में राजपूत अफसरों को पुलिस और प्रशासन के हर बड़े ओहदे पर तैनात किया जाता रहा है, उससे ये बात एकदम साफ है. योगी आदित्यनाथ के राज करने का ये तरीका ठीक उनके पूर्ववर्ती अखिलेश यादव जैसा है, जब एक खास समुदाय को बाकियों पर तरजीह दी जाती थी. योगी आदित्यनाथ के अक्खड़पन ने निजाम के हालात और बिगाड़ दिए हैं.

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योगी के लिए अच्छा होता कि वो अस्सी के दशक में मुख्यमंत्री रहे एक और राजपूत नेता वीपी सिंह के तौर-तरीकों से कुछ सीखते. राजा मांडा के नाम से मशहूर वीपी सिंह ने मुख्यमंत्री का पद संभालते ही चंबल के बीहड़ों में डकैतों के खात्मे का बीड़ा उठाया. उन्होंने डकैतों से निपटने के लिए प्रशासन के कड़े तेवर दिखाए. लेकिन, जल्द ही वीपी सिंह को अंदाजा हो गया कि उनकी इस नीति का उल्टा असर हो रहा है. डकैतों के खिलाफ पुलिस का अभियान ओबीसी और दलितों पर जुल्म का प्रतीक बन रहा है, जबकि डकैत उसी तरह बेखौफ कोहराम मचाए हुए थे.

उन्नाव की घटना को योगी आदित्यनाथ को सबक की तरह लेना चाहिए. ये योगी के लिए चेतावनी है कि जरूरत से ज्यादा मर्दानगी दिखाकर हुकूमत करने का उनका तरीका उसी तरह उल्टा पड़ रहा है, जिस तरह वीपी सिंह के लिए भारी साबित हुआ था. योगी आदित्यनाथ और यूपी के आम लोगों को जितनी जल्द ये एहसास हो जाए कि एक सभ्य समाज में कानून का राज होना जरूरी है. ये हमारे सामाजिक विकास का प्रतीक होता है, जब निजाम सबके लिए इंसाफ पसंद होता है.

कुलदीप सेंगर जैसे लोगों का खुला समर्थन या छुपकर साथ देना, आगे चलकर अराजकता को ही जन्म देगा, जो योगी को बहुत भारी पड़ सकता है.

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