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'सियासी खीर' बयान पर डैमेज कंट्रोल में जुटे कुशवाहा, बोले- सामाजिक एकता की कर रहा था बात

कुशवाहा ने अपनी सफाई में कहा, 'मैं सामाजिक एकता की बात कर रहा था. कृप्या इसे जातीय समीकरण और किसी पार्टी से गठबंधन से जोड़कर नहीं देखें'

Updated On: Aug 27, 2018 11:45 AM IST

FP Staff

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'सियासी खीर' बयान पर डैमेज कंट्रोल में जुटे कुशवाहा, बोले- सामाजिक एकता की कर रहा था बात
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नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता दल (आरएलएसडी) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपने 'सियासी खीर' वाले बयान पर सफाई दी है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार सोमवार को कुशवाहा ने कहा, मैं सामाजिक एकता की बात कर रहा था. कृप्या इसे जातीय समीकरण और किसी पार्टी (आरजेडी) से गठबंधन से जोड़कर नहीं देखें.'

दरअसल उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को पटना में बीपी मंडल की जन्मशती समारोह में मंच से बोलते हुए बिहार में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ इशारों-इशारों में गठजोड़ के संकेत दिए थे.

उन्होंने कहा था, 'यदुवंशी (यादव) का दूध और कुशवंशी (कोइरी समाज) का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया होगी. और उस स्वादिष्ट व्यंजन के बनने से कोई रोक नहीं सकता है.' उन्होंने इसे और स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि यह खीर तब तक स्वादिष्ट नहीं होगी जब तक इसमें छोटी जातियों और दबे-कुचले समाज का पंचमेवा नहीं पड़ेगा. यही सामाजिक न्याय की असली परिभाषा है.

कुशवाहा ने सार्वजनिक रूप से 'पॉलिटिकल खीर' बनाने का जो फॉर्मूला दिया है, उससे यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि उनके (आरएलएसपी) और आरजेडी के बीच गठबंधन को लेकर किसी स्तर पर बातचीत चल रही है.

उनके ऐसा कहने से न सिर्फ बिहार की सियासत में कयासों का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है. बल्कि एनडीए गठबंधन की एकता पर भी सवाल उठने लगे हैं.

बता दें कि आरएलएसपी अध्यक्ष ने पिछले दिनों 2019 चुनाव के संबंध में बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर बयान दिया था जिसे लेकर सियासी तौर पर काफी बखेड़ा खड़ा हो गया था. इसके अलावा उन्होंने अगले विधानसभा चुनाव में खुद को एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार प्रोजेक्ट किए जाने की भी मांग उठाई थी.

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