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बजट 2017: पिछड़ों-अल्पसंख्यकों की मजबूती पर होगा सरकार का जोर

मोदी सरकार में सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी 6 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हो गई.

Amitesh Amitesh Updated On: Jan 26, 2017 12:55 PM IST

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बजट 2017: पिछड़ों-अल्पसंख्यकों की मजबूती पर होगा सरकार का जोर

केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी के साथ एक्सक्लुसिव बातचीत के दौरान बजट में अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया. पेश है इस इंटरव्यू के अहम अंश.

अगले आम बजट में आप अपने मंत्रालय के लिए क्या उम्मीद करते हैं ?

बजट समाज के सभी तबकों खास तौर पर गरीब, पिछड़े और अल्पसंख्यकों तक रोशनी पहुंचाने का एक माध्यम है. साथ ही ऐसी कई योजनाएं हैं, जो शिक्षा के सशक्तीकरण, स्किल डेवलेपमेंट और रोजगार से जुड़ी हैं.

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कुल मिलाकर अल्पसंख्यक क्षेत्रों के आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा. अस्पताल, छात्रावास सहित दूसरी चीजों से जुड़े बजट का सौ फीसदी इस्तेमाल किया जाएगा.

एक और बात समझने की जरूरत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद सिस्टम में जो सत्ता के दलाल और बिचौलिए थे उनका सफाया हो गया है. अब सीधे जरूरतमंद लोगों को पैसा मिल रहा है. लीकेज खत्म हो रही है.

आपके मंत्रालय की प्राथमिकता क्या है. अल्पसंख्यक समुदाय के शिक्षा को लेकर कितना फोकस है?

हमारा जोर अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा पर है. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए हमने नए शिक्षण संस्थान शुरू किए हैं. गुरुकुल की तरह शिक्षा की शुरूआत की है. मुझे बहुत खुशी है कि कई राज्यों ने इसकी शुरूआत भी कर दी है. आने वाले बजट में हम इसपर और भी काम करेंगे.

जब सरकार बनी थी तो लगभग 6 प्रतिशत केंद्र सरकार की नौकरियों में अल्पसंख्यकों की भागीदारी थी, आज लगभग 9 प्रतिशत हो गया.

यानी 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई है. काबिलियत उनके अंदर थी लेकिन, समान अवसर उन्हें नहीं मिलता था. हमने उन्हें अवसर दिलाया.

दूसरी बात यह है कि शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को जो छात्रवृति दी जाती हो या शैक्षणिक संस्थानों को जो मदद दी जाती है, इसमें हमने लीकेज 100 प्रतिशत तक खत्म कर दिया.

अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय आज की तारीख में 97 परसेंट तक डिजिटल हो गया है. हर चीज उसमें ऑनलाइन मिलेगी.

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वक्फ और हज ऑनलाइन हो गया. छात्रवृत्ति ऑनलाइन हो गई है. हमारे मंत्रालय के स्किल डेवेलपमेंट के प्रोग्राम सभी ऑनलाइन हो गए हैं. इसमें ट्रांसपरेंसी काफी बढ़ी है.

बजट को लेकर कहा जाता है कि आपके मंत्रालय को जो बजट मिलता है, वो कम है तो कितनी अपेक्षाएं करेंगे इस बार. 2015-16 में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को 3712 करोड़ रूपए दिया गया था जबकि 2016-17 में 3800 करोड़ रूपए दिए गए हैं.

मैं मानता हूं कि जो भी पैसे बजट में मिले उसका ईमानदारी के साथ उपयोग हो, पारदर्शिता के साथ उपयोग हो.

केंद्र सरकार के पास पैसे की कमी नहीं हैं. मोदी जी की सरकार के काम करने का तरीका भी दूसरा है.

अगर आप बजट के बीच में भी यानी बजट के बाद भी आप अपनी योजनाएं देते हैं तो सरकार के पास संसाधन हैं, उसको भी सरकार बढ़ाती है.

अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भरोसा बहाली के लिए आपने प्रोग्रेस पंचायत की शुरूआत की थी. इससे कितना फायदा हुआ?

इसे हम बहुत लाभदायी मानते हैं. जैसे कि कहीं हॉस्टल बना है, कहीं, स्कूल बना है, कहीं स्किल डेवेलपमेंट सेंटर बना है, कहीं  ड्राइविंग स्कूल बने हुए हैं.

तो पैसा तो हमने दे दिया. राज्य सरकारें मिलकर बना रही हैं. लेकिन,जमीन पर क्या हुआ कोई देखने नहीं जाता था.

लेकिन, हमने 42 प्रोग्रेस पंचायतें की हैं. लोगों से हमने कहा कि भैया हमने तुम्हें 100 करोड़ रूपए दिया है, तुम्हारे हॉस्टल बनाने के लिए.

कहीं स्कूल बनाने के लिए. बना है कि नहीं बना है. कहीं नहीं भी बना है. दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी हमने सस्पेंड किए हैं मौके पर ही. राज्य सरकार ने भी एक्शन लिया है. इससे जमीनी हकीकत और घपलों के बारे में पता चलता है.

लेकिन, कितना मुश्किल होता है अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में विश्वास जगाना. क्योंकि साक्षी महाराज सरीखे बीजेपी नेताओं की तरफ से लगातार इस तरह के बयान आते हैं जो कि अल्पसंख्य समुदाय की भावना के खिलाफ होते हैं.

देखिए विकास और विश्वास दोनों एक साथ चलता है. हमारी सरकार और मोदी जी का यही संकल्प है कि जो विकास का एजेंडा है उसमें कोई नकारात्मक एजेंडा सफल ना हो. कुछ बयान और जो कुछ छिटपुट घटनाएं हैं उसके आधार पर पूरी की पूरी सरकार के कामकाज का आकलन नहीं किया जा सकता.

भारतीय जनता पार्टी बहुत बड़ी पार्टी है. बहुत से लोग अपने-अपने विचार और बहुत सी बातें करते हैं. लेकिन, उसको बीजेपी के विचार के बारे में न देखा जाए और न देखा जाना चाहिए.

बीजेपी के स्टार प्रचारक सूची में आपका भी नाम है. उत्तर प्रदेश के दौरे पर जाएंगे तो कैसे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को समझाएंगे?

देखिए हम तुष्टीकरण के बगैर सश्क्तीकरण पर यकीन करते हैं. टिकट तो बहुत दिए जाते रहे हैं, लेकिन, टिकटों के आधार पर विकास का ताना बाना कभी नहीं बुना गया है.

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जिन राज्यों में हमारी सरकार है, केंद्र में हमारी सरकार है. वहां धर्म के आधार पर जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करते.

हम सब तक विकास की रोशनी पहुंचाना चाहते हैं. अल्पसंख्यकों की आंखों में खुशी और उनके जीवन में खुशहाली आए, इसी संकल्प के साथ काम करना चाहते हैं.

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