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द्रौपदी के चीरहरण जैसा है ‘तीन तलाक’: सीएम योगी से खफा उलेमा

हिंदू महिलाओं को भी दहेज के लिये जलाया जा रहा है. पीएम और सीएम को उनकी समस्याओं पर भी टिप्पणी करनी चाहिए

Bhasha Updated On: Apr 17, 2017 06:18 PM IST

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द्रौपदी के चीरहरण जैसा है ‘तीन तलाक’: सीएम योगी से खफा उलेमा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तीन तलाक की तुलना ‘द्रौपदी के चीरहरण’ से करने पर विवाद खड़ा हो गया है. योगी के ऐसा कहने से वह उलेमाओं के निशाने पर आ गये हैं.

सीएम योगी ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 91वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में तीन तलाक के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा ‘कुछ लोग देश की इस (तीन तलाक) समस्या पर मुंह बंद किये हुए हैं. इस पर मुझे महाभारत की सभा याद आती है, जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था. तब द्रौपदी ने भरी सभा से प्रश्न पूछा था कि, आखिर इस पाप का दोषी कौन है.’

योगी ने कहा ‘तब कोई बोल नहीं पाया था, केवल विदुर ने कहा था कि एक तिहाई दोषी वह व्यक्ति हैं, जो यह अपराध कर रहे हैं, एक तिहाई दोषी वे लोग हैं, जो उनके सहयोगी हैं और वह भी दोषी हैं जो इस घटना पर मौन हैं.’

Talaq

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि देश का राजनीतिक क्षितिज तीन तलाक को लेकर मौन बना हुआ है. सच पूछें तो यह स्थिति पूरी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर देती है. अपराधियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों को और मौन लोगों को भी.’ योगी के इस बयान पर प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

चीजों को सिर्फ एक चश्मे से देखते हैं

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा ‘ऐसे जाहिलाना बयान पर कोई प्रतिक्रिया देना मैं जरूरी नहीं समझता. तलाक के मसले की द्रौपदी के चीरहरण से तुलना तो कोई जाहिल ही कर सकता है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि योगी चीजों को सिर्फ एक चश्मे से ही देखते हैं.

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएसपीएलबी) के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि, तलाक और द्रौपदी के चीरहरण में अंतर है. दोनों के बीच तुलना नहीं की जानी चाहिए.

ऑल इंडिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमडब्लूपीएलबी) की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने भी कहा, ‘तलाक के मामले की द्रौपदी के चीरहरण से तुलना नहीं की जानी चाहिए. अगर योगी इसे तर्क के रूप में पेश कर रहे हैं तो यहां हिंदू महिलाओं को भी दहेज के लिये जलाया जा रहा है. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को उनकी समस्याओं पर भी ऐसी ही टिप्पणी करनी चाहिए.’

तीन तलाक

(फोटो: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की फेसबुक वाल से)

शाइस्ता ने हालांकि यह भी कहा कि, जुल्म को देखना भी जुल्म है. द्रौपदी के साथ जो हुआ, वह आज भी हो रहा है. ऐसा करने वाले लोगों को सजा के लिये सख्त कानून होना चाहिये.

तीन तलाक देने वाले मर्दों के सामाजिक बहिष्कार की अपील

एआईएमपीएलबी ने रविवार को अपनी कार्यकारिणी की बैठक में तीन तलाक की व्यवस्था को खत्म करने से इनकार करते हुए इस सिलसिले में एक आचार संहिता जारी करके शरई कारणों के बगैर तीन तलाक देने वाले मर्दो के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है.

योगी ने समान आचार संहिता का भी जिक्र किया और कहा ‘चंद्रशेखर जी ने कहा था कि, देश में एक सिविल कोड बनाने की जरूरत है. जब हम एक राष्ट्र की बात करते हैं, जब हमारे मामले समान हैं, तो शादी-ब्याह के कानून भी समान क्यों नहीं हो सकते हैं.’ उन्होंने कहा ‘कॉमन सिविल कोड के बारे में चंद्रशेखर जी की धारणा स्पष्ट थी. उनके लिये अपनी विचारधारा नहीं बल्कि उनके लिये राष्ट्र महत्वपूर्ण था. हमारी राजनीति राष्ट्रीय हितों पर घात प्रतिघात करके नहीं बल्कि राष्ट्र और संविधान के दायरे में होनी चाहिये. जिस दिन हम इस दायरे में रहकर काम शुरू कर देंगे तो ऐसे टकराव की नौबत ही नहीं आएगी और देश में कोई कानून के साथ खिलवाड़ की हिम्मत नहीं कर सकेगा.’

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