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ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन-भारत संबंध तेजी से हुए मजबूत

ब्रिटेन के पेशेवरों और छात्रों की मुक्त आवाजाही पर नरम रुख अपनाने तक इन बैठकों का ठोस नतीजा निकलने की संभावना कम है

Updated On: Dec 26, 2017 02:23 PM IST

Bhasha

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ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन-भारत संबंध तेजी से हुए मजबूत

ब्रेग्जिट के बाद भारत ब्रिटेन के बीच संबंध तेजी से बढ़े. साल 2017 में इसमें सबसे अधिक तेजी आई है. भारत की आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के मौके पर यहां के प्रमुख संस्थानों में जश्न समारोह के साथ द्विपक्षीय सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत हुए.

हालांकि इस बीच ब्रिटेन ने दोनों देशों के बीच पेशेवरों और छात्रों की आवाजाही पर कड़ा रुख भी अपनाया.

ब्रिटेन के विदेश और राष्ट्रमंडल कार्यालय (एफसीओ) के प्रवक्ता ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे लोगों के बीच संबंध को ‘जीवित सेतु’ बताया और ब्रिटेन-भारत सांस्कृतिक वर्ष 2017 के दौरान यह संपर्क मजबूत हुआ.’

प्रिंस चार्ल्स ने भारत यात्रा के दौरान मोदी को दिया था निमंत्रण 

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स ने राष्ट्रमंडल प्रमुख के तौर पर नवंबर में भारत की अपनी हाई प्रोफाइल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण दिया था.

अगले साल राष्ट्रमंडल देशों के प्रमुखों की बैठक में मोदी के शामिल होने की संभावना है. इन सब के बीच दोनों देशों को बहु प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते के करीब पहुंचते देखना दिलचस्प होगा.

ब्रिटेन के मार्च 2019 तक यूरोपीय संघ से औपचारिक तौर पर अलग होने के बाद ही इस समझौते के होने की संभावना है.

ब्रेग्जिट के बाद आर्थिक साझेदारी के लिए पुख्ता नींव तैयार करने के उद्देश्य से व्यापार पर गठित संयुक्त कार्यकारी समूह की इस वर्ष कुछ बैठकें हुई.

छात्रों के लिए वहां जाना हुआ है मुश्किल 

ब्रिटेन के पेशेवरों और छात्रों की मुक्त आवाजाही पर नरम रुख अपनाने तक इन बैठकों का ठोस नतीजा निकलने की संभावना कम है.

हाल ही में टेरीजा मे की सरकार ने आव्रजकों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए गैर यूरोपीय संघ के नागरिकों को वीजा देने की अपनी नीति में बदलाव किया है.

इस वर्ष की समाप्ति पर शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मुकदमे ने खबरों में जगह बनाई.

माल्या को करीब 9,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोपों का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है या नहीं, इस बारे में मुकदमा दिसंबर में पूरा होगा. इस पर जनवरी 2018 में फैसला आने की उम्मीद है.

वर्ष 2017 को ब्रिटेन-भारत सांस्कृतिक वर्ष के रूप में मनाया गया. महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने फरवरी में बकिंघम पैलेस में एक ऐतिहासिक शाही रिसेप्शन के साथ इसका उद्घाटन किया था.

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