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एनपीए पर बोले जेटलीः कांग्रेस से मिले पाप को धोने का प्रयास कर रहे हैं

बैंकों के एनपीए को पूर्ववर्ती यूपीए सरकार से विरासत में मिला विषय करार देते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि उस दौरान बैंकों के एनपीए को छिपा कर रखा गया, इस तरह से देश की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास हुआ

Updated On: Dec 29, 2017 05:45 PM IST

Bhasha

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एनपीए पर बोले जेटलीः कांग्रेस से मिले पाप को धोने का प्रयास कर रहे हैं

बैंकों के एनपीए को पूर्ववर्ती यूपीए सरकार से विरासत में मिला विषय करार देते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस नीत सरकार के दौरान नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) का पुनर्गठन किया जाता रहा, बैंकों के एनपीए को छिपा कर रखा गया. इस तरह से देश की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया गया.

इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी (अमेंडमेंट) कोड 2017 पर चर्चा का जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद जब बैंकों की असेट ऑडिट हुआ तब यह बात सामने आई कि जिसे परफॉर्मेंस करने वाली असेट बताया जा रहा था, वह वास्तव में नॉन परफॉर्मिंग असेट थी.

हमारे लिए एनपीए विरासत में मिला विषय हैः जेटली

एनपीए के बारे में कांग्रेस सदस्यों के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जेटली ने कहा कि आप जो आरोप लगा रहे हैं, वह वास्तव में आपके समय में छिपाए गए एनपीए थे, अब बाहर आ गए हैं. ये आपके ही पाप हैं जिन्हें हम धोने का प्रयास कर रहे हैं. हमारे लिए एनपीए विरासत में मिला विषय है.

उन्होंने कहा कि आपके समय में नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) का पुनर्गठन किया जाता रहा, बैंकों के एनपीए को छिपा कर रखा गया और इस तरह से देश की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया.

यह विधेयक इस बारे में नवंबर में लागू किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा जिसमें इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी (आईबीसी) कोड में संशोधन करने की मांग की गई है. जेटली ने कहा कि अध्यादेश लाना इसलिए जरूरी था कि इस संबंध में काफी मामले लंबित थे. इस बारे में समयसीमा तय कर दी गई थी. अगर हम और इंतजार करते तो और मामले बढ़ते जाते.

यूपीए सरकार ने एनपीए पर वास्तविक स्थिति को छिपा कर रखाः जेटली

उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय बैंकों की वास्तविक स्थिति को छिपा कर रखा गया. हमने बैंकों की असेट की समीक्षा की और तब पता चला कि जितना एनपीए बताया गया है, उससे कहीं अधिक एनपीए है. ऐसे में हमने यह पहल की कि किस प्रकार से इनसे पैसा वसूला जाए.

इस विधेयक के माध्यम से कमियों को दूर करने पर बल दिया गया है ताकि जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले बकाएदार खुद की असेट की बोली नहीं लगा सकें. प्रस्तावित परिवर्तनों से तनावग्रस्त असेट के लिए खरीदारों का चयन करने की प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिलेगी.

जेटली ने कहा कि इसमें अपात्रता संबंधी मानदंड जोड़ना जरूरी था अन्यथा जिन्होंने चूक की वे कुछ धन देकर फिर से प्रबंधन और व्यवस्था में वापस लौट आते. क्या हम ऐसी स्थिति की अनुमति दे सकते थे? मंत्री के जवाब के बाद आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने अपना सांविधिक संकल्प वापस ले लिया. सदन ने इसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी.

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