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सबका साथ, सबका विकास की भावना को मजबूत करने वाला बजट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास की भावना को मजबूत करने वाला बजट है

Mansukh Mandaviya Mansukh Mandaviya Updated On: Feb 02, 2017 03:35 PM IST

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सबका साथ, सबका विकास की भावना को मजबूत करने वाला बजट

वित्त वर्ष 2017-18 के आम बजट को बिल्कुल सरल भाषा में समझा जाए तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबका साथ, सबका विकास की भावना को मजबूत करने वाला बजट है. इस बजट के जरिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने समाज के सभी वर्ग की जरूरतों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखने की कोशिश की है. कोई भी ऐसा वर्ग नहीं है जिसके लिए बजट में कुछ न कुछ नहीं हो. इस बजट से एक बार फिर से यह बात साफ होती है कि मोदी सरकार का जोर गांवों, गरीबों, वंचितों और किसानों पर है

A farm worker looks for dried plants to remove in a paddy field on the outskirts of Ahmedabad, India

किसानों को दिए जाने वाले कर्जों को बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब तक जिन किसानों को कर्ज नहीं मिल पाता था, अब उन्हें भी खेतीबाड़ी के लिए कर्ज मिल पाएगा. इसे अगर प्रधानमंत्री जन धन योजना के साथ जोड़कर देखा जाए तो स्थिति और स्पष्ट होगी. बैंक खाते खोलने से किसानों में आर्थिक जागरूकता बढ़ी है. ऐसे में कृषि के लिए दिए जाने वाले कर्ज के मद में बढ़ाये गए आवंटन से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ होने की उम्मीद है.

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रोजगार गारंटी योजना का आवंटन बढ़ाकर 48,000 करोड़ रुपये किए जाने का काफी दूरगामी असर होगा. इससे न सिर्फ गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा भी दुरुस्त होगा. बुनियादी ढांचे के दुरुस्त होने से न सिर्फ ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों की जिंदगी पहले के मुकाबले थोड़ी आसान होगी बल्कि इस पूरी प्रक्रिया में ग्रामीण भारत में मांग बढ़ेगी और इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा.

Indian PM Modi listens to FM Jaitley during the Global Business Summit in New Delhi

पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए भी वित्त मंत्री ने इस बजट में काफी घोषणाएं की हैं. अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए चलाई जाने वाली सरकारी योजनाओं के आवंटन में 35 फीसदी बढ़ोतरी की घोषणा वित्त मंत्री ने की. इसका मतलब यह हुआ कि अब उनके कल्याण पर सरकार तकरीबन 52,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसके साथ ही अनुसूचित जनजातियों के लिए आवंटन बढ़ाकर 31,920 करोड़ रुपये किया गया है और अल्पसंख्यक वर्ग के देशवासियों के लिए 4,195 करोड़ रुपये आवंटित करने की बात बजट में की गई है. इससे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में यह सरकार सबका साथ, सबका विकास को लेकर प्रतिबद्ध है.

विपक्ष के कई प्रमुख लोग मोदी सरकार पर यह आरोप लगाते हैं कि यह खास लोगों की सरकार है. लेकिन यह बजट उन लोगों के आरोपों को खोखला साबित कर रहा है.
वित्त मंत्री ने यह घोषणा की है कि छोटे करदाताओं यानी वैसे लोग जिनकी आमदनी 2.5 लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये के बीच है, उन पर लगने वाला दस फीसदी आयकर घटाकर पांच फीसदी किया गया है. इससे इस वर्ग के लोगों को हर साल 12.5 हजार रुपये की सीधी बचत होगी.

देश में आयकर देने वालों की कुल संख्या 3.7 करोड़ है. इनमें से आधे से अधिक तकरीबन 1.95 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी आमदनी 2.5 लाख रुपये से पांच लाख रुपये के बीच है. इसका मतलब यह हुआ कि इस आय वर्ग पर आयकर की दर आधी करने से एक झटके में तकरीबन दो करोड़ देशवासियों को लाभ मिलेगा. इन तथ्यों के आधार पर अगर देखा जाए तो पता चलता है कि इस सरकार पर खास लोगों के लिए आरोप लगाने वाले लोगों की बातें कितनी खोखली हैं.

सरकार ने छोटे कारोबारियों, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई तरह की घोषणाएं इस बजट में की हैं. इनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि सरकार हर वर्ग को साथ लेकर चलने और हर वर्ग को विकास की धारा से जोड़ने को लेकर प्रतिबद्ध है.

इस बजट की खूबसूरती यह है कि इसमें न सिर्फ आम लोगों का सीधे-सीधे ध्यान रखा गया है बल्कि परोक्ष तौर पर भी कई ऐसे निर्णय लिए गए हैं जिनसे अंततः आम लोगों का ही फायदा होना है. जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना.

उदाहरण के तौर पर देखें तो राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र के लिए बजट में 64,900 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इसमें से 23,891 करोड़ रुपये राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम पर खर्च किया जाना है. अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर 21,543 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है.

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साथ ही पूर्वोत्तर भारत में सड़कों के निर्माण के लिए भारत सरकार अगले वित्त वर्ष में 5,765 करोड़ रुपये खर्च करेगी. उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण पर 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. राष्ट्रीय राजमार्गों के मरम्मत पर 2,970 करोड़ रुपये सरकार खर्च करेगी. देश के तटीय क्षेत्रों में तकरीबन 2,000 किलोमीटर सड़क बनाने की घोषणा भी इस बजट में की गई है.

ये आंकड़े दो बातें बताती हैं. पहली बात तो यह कि राजमार्गों पर किए जाने वाले खर्चों में हर क्षेत्र का ध्यान रखा गया है. दूसरी बात यह है कि अगर सड़कों के निर्माण पर इतने पैसे खर्च होंगे तो इससे न सिर्फ कई दूसरे क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी बल्कि बड़ी संख्या में रोजगार भी पैदा होंगे. जाहिर है कि इसका सकारात्मक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

( लेखक श्री मांडविया भारत सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, पोत परिवहन और रसायन व उर्वरक राज्य मंत्री हैं)

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