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बंगाल में बीजेपी को रोकने के लिए ममता ने अपनाई 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि को अब तक 'मुस्लिम तुष्टीकरण' करने वाले नेता के रूप देखा जाता रहा है

FP Staff Updated On: Dec 30, 2017 06:29 PM IST

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बंगाल में बीजेपी को रोकने के लिए ममता ने अपनाई 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति

हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल साबांग और दक्षिण कंठी विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने ममता बनर्जी को सोचने पर मजबूर कर दिया है. ममता बनर्जी की टीएमसी भले ही इन उपचुनावों में जीत गई है लेकिन इन इलाकों में बीजेपी के वोटों में भारी बढ़त ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया है. बीजेपी इन इलाकों में सांगठनिक लिहाज से काफी कमजोर है लेकिन 2016 में हुए चुनावों के मुकाबले बीजेपी के वोटों में लगभग 6 गुनी बढ़ोतरी हुई. बीजेपी के वोटों में बढ़त की मुख्य वजह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को माना जा रहा है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि को अब तक 'मुस्लिम तुष्टीकरण' करने वाले नेता के रूप देखा जाता रहा है. लेकिन इन परिणामों के बाद ममता बनर्जी ने भी राहुल गांधी के तर्ज पर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पकड़ ली है.

ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा कि वार्षिक गंगा सागर मेले को कुंभ मेले का दर्ज मिलना चाहिए. उन्होंने इसे संगति तीर्थयात्रा के रूप में परिवर्तित करने का आह्वान किया.

दक्षिण 24 परगना जिले में कृषक बाजार में अपने संबोधन के दौरान ममता ने कहा कि गंगा सागर मेले का महत्व कुंभ मेले से कत्तई कम नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘मुझे यह समझ नहीं आता कि गंगासागर मेला को कुंभ मेला का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता. सदियों से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है और लोग कई साल से इस जगह पर इकट्ठा हो रहे हैं. मेरे ख्याल से गंगा सागर मेले को संगति तीर्थ में बदल देना चाहिए. विश्व के सभी समुदायों, जाति और मजहब के लोग यहां आते हैं. किसी ने भी इस बारे में नहीं सोचा.’

ममता सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वह सागर द्वीप आने वाले तीर्थयात्रियों की मदद के लिए मुरीगंगा नदी पर पुल बनाएगी.

ममता बनर्जी ने तारापीठ, तारकेश्वर और कालीघाट मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बोर्ड का भी गठन किया है. इससे पहले ममता बनर्जी ने फुरफुरा शरीफ के लिए भी इस तरह के बोर्ड का गठन किया था. ममता बनर्जी अपने इन कामों द्वारा अपनी मुस्लिम समर्थक छवि से छुटकारा पाना चाह रही हैं ताकि बीजेपी को 2019 में बंगाल में रोका जा सके.

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