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अपने 'ख्वाब' को पूरा करने के लिए एनडीए में बने रहेंगे उपेंद्र कुशवाहा!

बिहार का पावर कॉरीडोर हो या गांव की बैठकी, अभी उपेंद्र प्रसाद कुशवाहा बतकही के केंद्र में हैं.

Updated On: Sep 26, 2018 06:36 PM IST

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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अपने 'ख्वाब' को पूरा करने के लिए एनडीए में बने रहेंगे उपेंद्र कुशवाहा!

बिहार का पावर कॉरिडोर हो या गांव की बैठकी, अभी उपेंद्र प्रसाद कुशवाहा बतकही के केंद्र में हैं. कोई कहता है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से उनकी बात पक्की हो गई है तो कोई दावा करता है कि किसी भी कीमत पर कुशवाहा एनडीए से ब्रेकअप नहीं करेंगे क्योंकि जिस ‘गद्दी’ की उन्हें बेसब्री से तलाश है वह केवल बीजेपी के पाले में रहने से ही मिल सकती है.

बहरहाल, फोन से हुई बातचीत में केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री ने इस चर्चा को रिजेक्ट किया कि वो महागठबंधन में जा रहे हैं. राजनीतिक संभावनाओं की गहन विवेचना से भी लगता है कि उपेंद्र कुशवाहा कम से कम महाभारत 2019 तक राजग के साथ जुड़े रहेंगे. साये की तरह उनके इर्द-गिर्द रहने वाले भी ऐसा ही संकेत दे रहे हैं.

24 सितंबर को पटना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से पूछा गया था कि क्या आप मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं? बिना समय बर्बाद किए उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि ‘अगर आप बना दीजिएगा तो बन जाएंगे’. जाहिर है कि उनकी दृष्टि सीएम की कुर्सी पर है.

upendra kushwaha

वैसे, उपेंद्र कुशवाहा कई अवसरों पर दबी और खुली जुबान से हिंट कर चुके हैं कि उनकी प्रबल इच्छा है कि वो एक बार बिहार का मुख्यमंत्री बनें. अब समझने वाली बात ये है कि उनके ‘सपने’ को साकार करवाने में किस तरह की रणनीति सहायक होगी? स्वाभाविक रूप से उसी रणनीति को गंभीरता से दिमाग में रखकर रालोसपा अध्यक्ष अपनी राजनीतिक गोटी बिछा रहे होंगे.

वर्तमान में बिहार के अशांत राजनीतिक धरातल पर तीन सियासी पार्टियां हैं जिनके साथ तालमेल करने के बाद कुशवाहा अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के बारे में विचार कर सकते हैं या फिर संभावना बना सकते हैं. ये पार्टियां हैं बीजेपी, जेडीयू और राष्ट्रीय जनता दल. 2014 लोकसभा चुनाव से कुशवाहा बीजेपी नीत एनडीए के विश्वसनीय पार्टनर हैं. जुलाई 2017 में नीतीश कुमार भी एनडीए का अंग बन गए. तब से कुशवाहा अपने को असहज महसूस कर रहे हैं.

बहरहाल, बिहार में बतौर कोइरी समाज के नेता के रूप में उभरे उपेंद्र कुशवाहा बारीकी से इस बात को समझ रहे हैं कि आज नहीं तो कल बीजपी ही उनके सपने को साकार कर सकती है. जेडीयू की तरफ से भी समर्थन की धुधंली संभावना दिखती है क्योंकि हो सकता है कि आगे आने वाले दिनों में ताज का हस्तांतरण लव से कुश को कर दिया जाय. करीब डेढ़ दशक पहले नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा में बिहार का भविष्य होने का दावा किया था और बिहार विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया था.

upendra kushwaha lalu yadav delhi

तीसरी राजनीतिक धुरी है राजेडी जिसके द्वारा संचालित नाव की सवारी करके उपेंद्र कुशवाहा कुशवाहा अपने ड्रीम को साकार नहीं कर सकते हैं. क्योकि वहां उस पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है. आरजेडी के दमदार नेताओं के शब्दों मे ‘ सीएम की सीट अगले 50 वर्ष तक लिए फुल है’. वैसे भी आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव ने स्पष्ट कर दिया है, ‘तेजस्वी यादव आरजेडी की तरफ से सीएम पद का स्थायी उम्मीदवार हैं’.

पिछले तीन दिनों से उपेंद्र कुशवाहा बिहार के कोने-कोने में घूम-घूम कर दुध, चावल और पंचमेवा बटोरकर ‘खीर’ बना रहे हैं और खा भी रहे हैं. अगले दो दिनों तक ‘खीर’ बनाते एवं खाते रहने का कार्यक्रम है. बातचीत में उन्होंने बताया, ‘एनडीए में हैं और रहेंगे. हम रोज दल बदलने वालों में से नहीं हैं. मुझे विश्वास है कि टिकट बटवारे में मेरे साथ अन्याय नहीं होगा’. मतलब ‘खीर’ बनाने के लिए एनडीए से भी पर्याप्त मात्रा में दूध मिल जाने की संभावना है.

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