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बीजेपी को हराने के लिए शिवसेना को चाहिए मुसलमानों का साथ!

हिंदूत्व की राजनीति करने वाली शिवसेना बीजेपी के टक्कर देने के लिए मुसलमानों का दामन भी थाम सकती है...देखें बीजेपी और शिवसेना के रिश्ते आगे क्या मोड़ लेते हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 01, 2018 06:07 PM IST

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बीजेपी को हराने के लिए शिवसेना को चाहिए मुसलमानों का साथ!

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘मराठा के साथ धांगड़, कोली और मुस्लिमों को भी आरक्षण दिया जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘शिवसेना इस मसले पर राज्य और केंद्र सरकार का समर्थन कर सकती है. मुस्लिमों को दिए जाने वाले आरक्षण को लेकर उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘अगर मुस्लिम समुदाय की ओर से जायज मांग उठाई जा रही है, तो उसके बारे में भी सोचना चाहिए.’

शिवसेना ने महाराष्ट्र में अपनी सहयोगी बीजेपी की सरकार का विरोध करते हुए कहा कि वो बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा मुस्लिमों को 5 फीसदी कोटा दिए जाने वाले आदेश की अवेहलना कर रही है.

क्या है इस बयान के मायने?

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की तरफ से मुसलमानों के आरक्षण के समर्थन में दिया जाने वाला यह बयान पहली नजर में तो चौंकाने वाला है. बाला साहब ठाकरे की पार्टी शिवसेना मराठी अस्मिता के साथ-साथ हिंदुत्व की कट्टर लाइन पर चलती रही है. यहां तक कि कई मुद्दों पर शिवसेना ने बीजेपी से भी कड़ा रुख अख्तियार किया है.

लेकिन, अब क्या कारण रहा कि शिवसेना की तरफ से मुसलमानों के कोटा की पैरवी की जा रही है? आखिर शिवसेना के नजरिए में यू-टर्न कैसे हुआ? आलम यह है कि उनकी बात का समर्थन अब असद्दुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIAM की तरफ से भी होने लगा है ?

बीजेपी को हराने के लिए कुछ भी करेगी शिवसेना

इसके पीछे की राजनीति बेहद दिलचस्प है. शिवसेना के एजेंडे में इस वक्त सबसे उपर बीजेपी को मात देने की रणनीति है. उसकी तरफ से वो हर हथकंडे अपनाए जा रहे हैं जिससे बीजेपी को पटखनी दी जा सके. शिवसेना भले ही इस वक्त केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार में बीजेपी की सहयोगी है, लेकिन, कभी महाराष्ट्र में बीजेपी की सीनियर पार्टनर बनकर रहने वाली शिवसेना को जूनियर पार्टनर के तौर पर सरकार में बने रहना ज्यादा परेशान कर रहा है.

दोनों के बीच तल्खी इतनी बढ़ गई है कि शिवेसना ने पहले ही अगला लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला कर लिया है. राज्य की कुल 48 लोकसभा सीटों में से बीजेपी का 23 जबकि शिवसेना का 18 सीटों पर कब्जा है. शिवसेना को लगता है कि अगर बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ेंगे तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को ही होगा.

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना के एजेंडे में इस वक्त बीजेपी को ही नुकसान पहुंचाना है. हकीकत यही है कि अगर शिवसेना बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ती है और दूसरी तरफ कांग्रेस-एनसीपी में समझौता हो जाता है तो फिर नुकसान बीजेपी के साथ-साथ शिवसेना को भी होगा.

क्यों बौखलाई है शिवसेना?

दो महीने पहले हुए पालघर लोकसभा के उपचुनाव में भी शिवसेना ने बीजेपी को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था. बीजेपी के साथ सरकार में साझीदार होते हुए भी शिवसेना ने बीजेपी को लोकसभा के उपचुनाव में चुनौती दी थी. लेकिन, पालघर में भी शिवसेना को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद से शिवसेना और ज्यादा परेशान हो गई है. उसे लगता है कि बीजेपी के साथ रहने में उसका नुकसान ज्यादा हो रहा है और बीजेपी उसकी जगह ले रही है.

इसके पहले मुंबई और ठाणे में भी भी बीजेपी ने शिवसेना के किले में सेंधमारी कर दी है. बीजेपी ने मुंबई महानगरपालिका में भले ही बीजेपी ने शिवसेना को समर्थन दे दिया. लेकिन, शिवसेना के 84 पार्षदों के मुकाबले में बीजेपी के 82 पार्षद चुनाव जीतकर आए थे. इस पूरे इलाके में 36 में से 15 विधायक बीजेपी के ही हैं.

यानी शिवसेना के गढ़ मुंबई और ठाणे में भी बीजेपी अब अपनी पकड बना चुकी है. शिवसेना इस बात से घबराई हुई है. उसे लगता है कि अगर आने वाले दिनों में फिर से बीजेपी के साथ समझौता होता है तो उसकी जमीन खिसक जाएगी.

हिंदुत्व की जमीन पर शिवसेना की पकड़ ढ़ीली

दरअसल, बाला साहब ठाकरे जब तक जिंदा थे, तबतक शिवसेना मराठी मानुष के अलावा हिंदुत्व की बड़ी पैरोकार के तौर पर जानी जाती थी. लेकिन, बाला साहब के निधन और दूसरी तरफ बीजेपी में ‘मोदी-युग’ के आने के बाद अब हिंदुत्व की उर्वर जमीन पर धीरे-धीरे बीजेपी का कब्जा होता गया.

महाराष्ट्र भर में शिवसेना की तुलना में बीजेपी ने भगवा ब्रिगेड में अपनी पैठ ज्यादा बना ली. इसके बाद ही शिवसेना अपनी तरफ से वो हर कोशिश कर रही है जिससे वो अपने खिसकते जनाधार को रोक सके.

क्या हो पाएगी राहुल-उद्धव की जुगलबंदी ?

लेकिन, शिवसेना ऐसा करने में अपनी अबतक की रणनीति के उलट जाकर मुसलमानों को कोटा देने का समर्थन कर रही है. तो क्या शिवसेना आने वाले दिनों में कांग्रेस-एनसीपी के साथ भी जा सकती है. यह सवाल भी उठने लगा है. इस पर चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि शिवसेना की तरफ से गाहे-बगाहे राहुल गांधी के भाषण और उनकी तारीफ की जाती रही है. बदले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 27 जुलाई को उद्धव ठाकरे के जन्मदिन के मौके पर उनको बधाई भी दे दी.

राहुल गांधी के साथ उद्धव ठाकरे की जुगलबंदी की बात कहना तो जल्दबाजी होगी, लेकिन दो विपरीत विचारधारा वाली पार्टियों का मोदी (बीजेपी) विरोध के नाम पर कदमताल करना भविष्य की राजनीति का संकेत दे रहा है.

यह संकेत इसलिए भी अहम है क्योंकि इसके पहले 20 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना ने सरकार के पक्ष में पहले व्हिप जारी करने के बावजूद अपने सभी सांसदों को सदन से गैर-हाजिर करवा दिया था. बीजेपी के साथ सरकार में सत्ता में शामिल शिवसेना के इस कदम ने बीजेपी के साथ उसके रिश्ते को और भी कड़वा बना दिया है.

सरकार में रहते हुए सरकार का विरोध

शिवसेना कई मुद्दे पर सरकार में रहते हुए भी सरकार का विरोध करती रही है. किसानों के मुद्दे पर शिवसेना पहले से ही बीजेपी पर हमला करती रही है. यहां तक कि अब मराठा आरक्षण के मुद्दे पर भी उसके तेवर में काफी परिवर्तन आया है. पहले बाला साहब ठाकरे के समय में इस तरह के आरक्षण को लेकर शिवसेना का तेवर कुछ अलग रहा करता था. लेकिन, अब शिवसेना इस मुद्दे पर आरक्षण का समर्थन कर रही है. शिवसेना की बदली हुई रणनीति बीजेपी को घेरने की है, भले ही मुद्दा कोई भी हो.

बीजेपी की भी ‘एकला चलो’ की तैयारी

अब दोनों ही दलों के बीच इस रिश्ते की कड़वाहट पॉलिटिकल पॉश्चरिंग से भी कहीं ज्यादा दिखने लगी है. शिवसेना के अविश्वास प्रस्ताव पर दिखाए गए तेवर के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र दौरे के वक्त अपने पार्टी नेताओं को अलग होकर चुनाव लड़ने का मंत्र दे दिया गया है. हालाकि इसके पहले बीजेपी ने उद्धव ठाकरे को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन, इसका कुछ खास असर नहीं हुआ.

शिवसेना की रणनीति के केंद्र में इस वक्त दुश्मन नंबर वन बीजेपी है, जिसको हराने के लिए रणनीति बनाई जा रही है. शिवसेना किसी भी हद तक जा सकती है. इसके लिए वो अपना नुकसान भी करा सकती है, इससे कांग्रेस-एनसीपी को फायदा भी हो सकता है, फिर भी वो बीजेपी को बख्शने के मूड में नहीं है. मुसलमानों के कोटा के मुद्दे पर शिवसेना के तेवर ने उस बदली हुई रणनीति की झलक पेश कर दी है. लेकिन, शिवसेना को संभलकर चलना होगा, वरना हिंदुत्व का पूरा स्पेस वो बीजेपी के हाथों में जाने-अनजाने परोस कर खुद की जमीन से पूरी तरह से बेदखल हो जाएगी.

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