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2019 चुनाव में BJP से मुकाबले के लिए कांग्रेस पर क्राउड फंडिंग का दबाव

राहुल गांधी ने सोच-समझकर अहमद पटेल को फंड जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है. क्योंकि वो जानते हैं कि यूपीए सरकार के समय वो कितने शक्तिशाली थे. इस वजह से यह काम कर पाना उनके लिए आसान रहेगा

Updated On: Oct 30, 2018 10:54 PM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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2019 चुनाव में BJP से मुकाबले के लिए कांग्रेस पर क्राउड फंडिंग का दबाव
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कांग्रेस के पास फंड की कमी है. कांग्रेस के नेता इस कमी को महसूस कर रहे हैं. जिसे दूर करने के लिए वो प्रयास भी कर रहे हैं. कांग्रेस पूरे देश से धन संग्रह कर रही है. इस काम के लिए संगठन के सभी लोगों को लगाया गया है. पार्टी चाह रही है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के पास धन इकट्ठा हो जाए. कांग्रेस की इस धन संग्रह की योजना के सूत्रधार नए कोषाध्यक्ष अहमद पटेल हैं. हालांकि पार्टी के इस फरमान से संगठन में बेचैनी है. कांग्रेस के संगठन के लोग परेशान हैं कि कैसे इतना चंदा जमा किया जाए.

जनसंपर्क अभियान

कांग्रेस ने इस चंदा अभियान का नाम जनसंपर्क अभियान रखा है. जिसमें पार्टी के कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को पार्टी से जुड़ने की अपील करने के लिए कहा गया है. पार्टी की तरफ से इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है, वो है कि जो व्यक्ति पार्टी को चंदा देगा वो पार्टी को वोट भी करेगा. संगठन के लोगों से कहा गया है कि चंदे की रकम ही पैमाना है. कई लोगों ने वर्तमान, पूर्व सांसदों, विधायकों और जनप्रितिनिधियों की उदासीनता की शिकायत की तो कहा गया कि यह संगठन की जोर आजमाइश है. जो करना है संगठन को ही करना है. हर ब्लॉक से कहा गया है कि पार्टी हर घर तक पहुंचे और पार्टी की बात समझाने के बाद चंदे के लिए अपील की जाए. यह कहा जाए कि कांग्रेस जनता के पैसे से चुनाव लड़ना चाहती है.

चंदे की योजना

पूरे देश में यह अभियान चल रहा है. सिवा चुनावी राज्यों को छोड़कर यह योजना चल रही है. हर राज्य का टारगेट अलग है. जहां तक देश की राजधानी दिल्ली का सवाल है हर बूथ से 25 हजार रुपए चंदा इकट्ठा करने का टारगेट दिया गया है. जिसके लिए 100, 500 और 1000 रुपए के कूपन दिए गए हैं. जिसमें चंदा देने वाले का नाम, पता, मोबाइल नंबर, वोटर कार्ड नंबर और ईमेल आईडी भी लिखना जरूरी है. इन कूपन पर बकायदा नंबरिग भी है. जिससे किसको किस सीरियल नंबर का कूपन बुकलेट मिला है, यह विस्तार से दर्ज किया जा रहा है. इसमें घपला होने की भी गुंजाइश कम है. इसके अलावा चंदा इकट्ठा करने के लिए एक पेटिका भी होगी जो लोग कूपन से कम रकम देना चाहते हैं वो इस पेटिका में चंदा डाल सकते हैं. जिसके लिए रसीद दी जाएगी.

Congress Donation Book

कांग्रेस का चंदा बुक

चंदे से परेशानी

चंदा इकट्ठा करने में दिक्कत हो रही है. टारगेट इतना ज्यादा है कि पूरा हो पाना मुश्किल है. एक तो पार्टी की सत्ता नहीं है. दूसरा, लोग राजनीतिक दल को चंदा देने से गुरेज करते हैं. चंदे की बात करने पर सिर्फ उलाहना के सिवाय कुछ नहीं मिलता है. जाहिर है कि सिर्फ अपने मिलने वालों के अलावा किसी और से चंदा मांगना काफी बड़ा काम है. सवाल यह उठ रहा है कि टारगेट को कैसे पूरा किया जाएगा. कई लोग कह रहे हैं कि यह काम होना आसान नहीं है. अकेले दिल्ली में 9141 पोलिंग स्टेशन है जिसमें तकरीबन 13 हजार बूथ हैं. इसका मतलब अकेले दिल्ली से ही तकरीबन 32 करोड़ रुपए चंदा जुटाने की योजना है.

हालांकि इतनी बड़ी रकम इकट्ठा करने का दबाव बड़े नेताओं पर होना चाहिए, लेकिन यह टारगेट सीधे निचले स्तर के कार्यकर्ताओं पर थोप दिया गया है. जिससे कार्यकर्ताओं में बेचैनी है. संगठन के पदाधिकारी डरे हुए हैं कि इस वजह से कहीं पद से हाथ ना धोना पड़ जाए.

कांग्रेस के पास फंड की कमी

कांग्रेस के पास चुनाव लड़ने के लिए जरूरी पैसे नहीं हैं. पार्टी की तरफ से मुख्यालय प्रभारी मोतीलाल वोरा ने सर्कुलर जारी किया था. सभी पदाधिकारियों से खर्च में कटौती करने के लिए कहा गया है. जिसमें यात्रा के अलावा निजी खर्चे शामिल हैं. 1400 किलोमीटर तक की यात्रा ट्रेन से करने के लिए कहा गया है. जिससे संगठन का काम भी प्रभावित हो रहा है. वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर का कहना है कि पार्टी मोर्चे पर डटी है, और कहा जा रहा है कि रसद कम है. गोला-बारूद कम ही इस्तेमाल करना है. इस तरह के फैसले से पार्टी का नुकसान होगा. कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी इस वजह से गिर सकता है. 2019 के आम चुनाव से पहले फंड का रोना कांग्रेस के लिए फायदे से ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है. जबकि विरोधी खेमा मजबूती से काम कर रहा है.

Congress Donation Circular

कांग्रेस ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को खर्च में कटौती लाने को लेकर सर्कुलर जारी किया है

राजनीतिक दलों में फंड की स्थिति

एडीआर के मुताबिक बीजेपी को सबसे ज्यादा चंदा मिला है. बीजेपी को 1034 करोड़ रुपए चंदे में मिले जो पिछले साल से तकरीबन 435 करोड़ रुपए ज्यादा है. जहां बीजेपी ने 710 करोड़ रुपए खर्च के तौर पर दिखाए हैं. बीजेपी को पहले के मुकाबले 81 फीसदी ज्यादा पैसे मिले हैं. वहीं कांग्रेस को 14 फीसदी कम मिला है. पहले 261 करोड़ और बाद में 225 करोड़ रुपए चंदे के तौर पर मिले हैं. पार्टी का खर्च आमदनी से ज्यादा हुआ है. कांग्रेस ने 335 करोड़ रुपए खर्च के तौर पर दिखाए हैं

जहां तक अन्य राष्ट्रीय पार्टियों का सवाल है. इस दौरान सबको मिलाकर 1559 करोड़ चंदा मिला है. जबकि इन पार्टियों ने 1230 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.

बीजेपी से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को चुनाव से पहले काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोच-समझकर अहमद पटेल को यह जिम्मेदारी सौंपी है. यूपीए की सरकार में अहमद पटेल सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बाद सबसे शक्तिशाली थे. जिसकी वजह से यह काम करना उनके लिए आसान रहेगा. सत्ता के समीकरण को बनाने और बिगाड़ने में उनका अहम योगदान रहा है.

फंडिंग पर कानून

सरकार ने कई कानून बनाए हैं जिससे पॉलीटिकल सिस्टम में काला धन आने से रोका जा सका है. हालांकि यह फुलप्रूफ सिस्टम वहीं कहा जा सकता है. कोई भी व्यक्ति 2 हजार रुपए से ज्यादा नकद चंदा नहीं दे सकता है. पहले यह सीमा 20 हजार थी. इसके अलावा एलेक्टोरल बांड भी बैंक से खरीदे जा सकते हैं. जो 1000, 10,000, 1 लाख और 1 करोड़ तक जा सकता है. इसमें देने वाले का नाम जाहिर नहीं होगा लेकिन देने वाले के बैलेंस शीट में जरूर दिखाई देगा.

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