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केजरीवाल सरकार के 3 साल: 'कमाल' या बवाल?

वो कमाल के काम कौन से हैं, जिनसे केजरीवाल को लगता है कि दिल्ली के सामान्य नागरिकों का जीवन बेहतर हुआ है? क्या दिल्ली तीन साल पहले के मुकाबले रहने और काम के लिए अच्छी जगह बन गई है?

Sanjay Singh Updated On: Feb 14, 2018 09:47 AM IST

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केजरीवाल सरकार के 3 साल: 'कमाल' या बवाल?

'तीन साल में हुआ कमाल', दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के तीन साल पूरे होने पर दिए दए विज्ञापनों में इस वाक्य पर आंखें बरबस टिक जाती हैं. इसमें आम आदमी पार्टी के उन कामों का कोई विवरण नहीं है, जिसे लोगों के लिए करने का दावा किया जाता है. विज्ञापन में यह भी कहा गया है: 'अगर सरकार ईमानदार है, सब कुछ संभव है.'

अखबारों में छपे विज्ञापनों से दो बड़े सवाल पैदा होते हैं-

वो कमाल के काम कौन से हैं, जिनसे केजरीवाल को लगता है कि दिल्ली के सामान्य नागरिकों का जीवन बेहतर हुआ है? क्या दिल्ली तीन साल पहले के मुकाबले रहने और काम के लिए अच्छी जगह बन गई है?

दूसरा, क्या केजरीवाल और उनकी सरकार ईमानदार है? क्या वो देश के राजधानी के लोगों के प्रति ईमानदार रहे हैं? क्या केजरीवाल और उनके मंत्री खुद अपने और अन्ना आंदोलन से निकले साथियों के प्रति ईमानदार रहे हैं?

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विज्ञापन के गुण-दोष पर बात करने से पहले यह जान लें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 14 फरवरी, 2018 यानी बुधवार को तीन साल पूरे करने का गौरव हासिल करेंगे. इस दिन देश महाशिवरात्रि और वेलेंटाइन्स डे मना रहा होगा. उन्होंने कहा है कि बुधवार दोपहर में वो और उनके मंत्री लोगों के सवालों का जवाब देंगे. यह निश्चित रूप से रोचक कार्यक्रम होगा.

दृश्य-अदृश्य के चक्कर में फंसे केजरीवाल

लेकिन ये सब करने से पहले केजरीवाल के सामने एक समस्या खड़ी हो गई है. उनका राज्य सूचना विभाग उस विज्ञापन को मंजूरी नहीं दे रहा है जो स्पष्ट रूप से पाउलो कोहले की किताब अलकेमिस्ट के प्रसिद्ध लाइन 'और, जब आप कुछ हासिल करना चाहते हैं, पूरा ब्रह्माण्ड इसे पाने में आपकी मदद करने लगता है' से प्रेरित है. घर पर उनके इस वाक्य को शाहरुख खान की फिल्म `ओम शांति ओम’, पहले ही लोकप्रिय बना चुकी है- 'कितनी शिद्दत से तुम्हें पाने की कोशिश की है. कि हर ज़र्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साजिश की है. कहते हैं अगर किसी चीज को दिल से चाहो तो सारी कायनात तुम्हें उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है.'

केजरीवाल के 'तीन साल हुआ कमाल' के रचानकार इससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस लाइन को उठाया और बदलाव कर इसे और रोचक और अपील करने वाला बना दिया: 'जब आप सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर चलते हैं, तो इस ब्रह्माण्ड की दृश्य और अदृश्य सारी शक्तियां आपकी मदद करती है.' वो तो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भला हो जो कहते हैं कि संबंधित विभाग सरकारी विज्ञापन में सारे तथ्य मिलाने के बाद फिर इसे प्रकाशित करने की अनुमति देगा. कोई भी सरकारी विभाग 'दृश्य और अदृश्य शक्तियों' का पता कैसे लगाए.

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अपने विभाग से ही विज्ञापन को मंजूरी दिलाने में केजरीवाल असमर्थ हैं जबकि इसे खुद उन्होंने देखा है और पास किया है. तीन साल पूरे होने पर निश्चित रूप से उनके लिए यह अच्छी पब्लिसिटी नहीं है.

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केजरीवाल के लिए अच्छे आदमी की परिभाषा क्या है?

केजरीवाल के विज्ञापन टीवी पर नहीं आ रहे हैं लेकिन एफपी रेडियो सेट पर वो दोबारा सुनाई पड़ने लगे हैं. ऐसे ही एक विज्ञापन में वो युवा छात्रों से कह रहे हैं कि जब आपसे कोई पूछे कि आप क्या बनोगे तो डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बताने की जगह 'अच्छा आदमी' बताएं. यह सबको पता है कि कोई भी 'अच्छा आदमी’ बनने की कोशिश करता है या फिर मूल्य उसे अच्छा आदमी बना देते हैं. इसे लेकर कोई निश्चित नहीं है कि केजरीवाल को अच्छे आदमी के रूप में पहचाना जाएगा या फिर अच्छे प्रशासक और अच्छे रणनीतिकार और संगठनकर्ता के रूप में.

इंडिया अंगेस्ट करप्शन और बाद में आम आदमी पार्टी के गठन के दिनों से केजरीवाल के साथ काम करने वाले उनके साथी, जिन्हें या तो बाहर जाने के लिए बाध्य होना पड़ा या फिर पार्टी से निकाल दिया गया, पूछ लीजिए. उनके पास केजरीवाल और उनकी सरकार के लिए अच्छा आदमी और ईमानदार सरकार के मुद्दे पर कहने के लिए कुछ भी अच्छा नहीं है.

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बहुत सफल नहीं रही दिल्ली सरकार

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक है. यहां बुनियादी सुविधाएं चरमरा रही हैं जो कि कमाल का काम कतई नहीं है. केजरीवाल सरकार का दावा है कि उसने सरकारी स्कूलों में शिक्षा को लेकर कमाल कर दिया है लेकिन इस साल के 10वीं के प्री-बोर्ड के नतीजों को ही लीजिए. महज 31 फीसदी छात्र ही इस परीक्षा में पास हो सके जो कि अर्धवार्षिक परीक्षा के 21.5 फीसदी सफल छात्रों के मुकाबले थोड़ा ठीक है.

केजरीवाल सरकार का दावा है कि उसने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अच्छा काम किया है. निस्संदेह मोहल्ला क्लीनिक एक स्वागत योग्य कदम है लेकिन स्वास्थ्य विभाग का नेतृत्व विवादास्पद सत्येंद्र जैन कर रहे हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के कई मामले हैं.

केजरीवाल के साथ समस्या यह है कि उन्होंने सत्ता में पिछले तीन साल को बर्बाद कर दिया है. इस दौरान उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश की. उनके मुताबिक दिल्ली में शासन पर ध्यान देना मुश्किल है क्योंकि यह आधा राज्य है. उन्हें रामलीला मैदान में 14 फरवरी, 2015 को मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद दिए गए भाषण को फिर से पढ़ना चाहिए और विचार करना चाहिए कि क्या वो खुद से ईमानदार रहे और ईमानदार सरकार चलाई.

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