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आसानी से पेश होगा बजट, विपक्ष के पास हंगामे का वक्त नहीं!

इस बार बजट सत्र की टाइमिंग मजेदार है. भले ही यह टाइमिंग बाई डिफॉल्ट हो या फिर जानबूझ कर सरकार की तरफ से तय किया गया है, बजट पेश होने से पहले बवाल की गुंजाइश कम ही लग रही है

Updated On: Jan 30, 2018 02:37 PM IST

Amitesh Amitesh

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आसानी से पेश होगा बजट, विपक्ष के पास हंगामे का वक्त नहीं!

संसद के बजट सत्र की शुरुआत 29 जनवरी से हुई है जिसका पहला चरण 9 फरवरी तक चलेगा. दूसरा चरण 5 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगा. इस साल संसद के बजट सत्र की टाइमिंग काफी मजेदार है. भले ही यह टाइमिंग बाई डिफॉल्ट हो या फिर जानबूझ कर सरकार की तरफ से तय किया गया है, बजट पेश होने से पहले बवाल की गुंजाइश कम ही लग रही है.

संसद के सत्र के पहले दिन 29 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ सत्र की शुरुआत हो गई. परंपरा के मुताबिक ऐसा होना था. अमूमन पहले दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सदन की कार्यवाही कुछ खास नहीं चलती है.

इस बार भी ऐसा ही हुआ. राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद आर्थिक सर्वे पेश कर दिया गया. दोनों सदनों में आर्थिक सर्वे पेश होने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई. अब दो दिनों के अवकाश के बाद कार्यवाही फिर शुरू होगी.

यानी 30 और 31 जनवरी को संसद की कार्यवाही नहीं होगी. 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है, जिसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है. जबकि 31 जनवरी को रविदास जयंती है, जिसके चलते संसद में अवकाश रहता है. इस कारण दो दिन तक सदन की कार्यवाही नहीं चल पाएगी.

1 फरवरी को संसद की कार्यवाही जब शुरू होगी तो उस दिन सबका फोकस बजट पर रहेगा. क्योंकि 1 फरवरी को ही वित्त मंत्री अरुण जेटली 2018-19 का बजट पेश करेंगे. यानी बजट सत्र की शुरुआत में मौजूदा राजनीतिक हालातों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश नहीं कर पाएगा. ऐसा कर पाने के लिए उसे वक्त नहीं मिल पाएगा.

Winter session of Parlaiment

सरकार के संसद में बजट पेश करने के दौरान विपक्ष के हंगामा करने की परंपरा रही है

सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दल सदन में हंगामा करने लगते हैं

दरअसल, बजट पेश होने से पहले सत्र की शुरुआत में ही विपक्षी दलों की तरफ से सरकार पर हमला शुरू हो जाता है. मौजूदा राजनीतिक हालात और ज्वलंत मुद्दों के सहारे सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दल सदन में हंगामा करने लगते हैं. यह परंपरा लंबे वक्त से आ रही है.

अमूमन बजट सत्र की शुरुआत फरवरी के आखिरी हफ्ते में होती थी, जबकि 27-28 फरवरी तक बजट पेश होता था. लेकिन, 2017 से बजट पेश होने की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी गई है. साथ ही रेल बजट को भी आम बजट में ही शामिल कर लिया गया है.

बजट सत्र के अब जनवरी के आखिर में शुरू होने और 1 फरवरी को आम बजट पेश होने के चलते इस बार भी 29 जनवरी को सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति का अभिभाषण हुआ. उसी दिन संसद के दोनों सदनों में आर्थिक सर्वे भी पेश कर दिया गया.

आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आने वाले बजट का पूर्वानुमान लगाया जाता है. इससे पता चलता है कि पिछले साल आर्थिक तौर पर देश की हालत कैसी रही और आने वाले दिनों में देश की आर्थिक स्थिति कैसी रहने वाली है.

हालांकि बजट पेश होने के बाद सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास एक हफ्ते का वक्त रहेगा, जिसमें वो बजट सत्र के पहले चरण में हमलावर हो सकता है. खास तौर से कासगंज हिंसा, पद्मावत विवाद, दलितों पर हिंसा, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं को उठाकर विपक्ष की सरकार को सदन में घेरने की कोशिश है.

FM Arun Jaitley

वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को संसद में 2018-19 का बजट पेश करेंगे

विपक्ष की तरफ से सरकार को घेरने का मौका निकल गया है 

लेकिन, फिलहाल दो दिन के अवकाश के चलते शुरुआती दिनों में विपक्ष की तरफ से सरकार को घेरने का मौका निकल गया है. मजेदार बात यह भी है कि अब हर साल 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि यानी शहीद दिवस के चलते संसद की कार्यवाही नहीं चल सकेगी, हालाकि, संत रविदास जयंती की तारीख हिंदी महीने के हिसाब से बदलती रहती है.

सरकार की तरफ से बजट पेश करने की तारीख 1 फरवरी तय कर दी गई है. यानी हर साल कुछ इसी तरह के हालात देखने को मिलेंगे जब 30 जनवरी को संसद का अवकाश रहेगा और 1 फरवरी को देश का बजट पेश होगा.

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