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EXCLUSIVE: देश अंबेडकर के कानून से चलेगा, गोलवलकर के कानून से नहीं- तेजस्वी

आज बीजेपी सरकार चाहती है नागपुरिया (नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है) कानून लागू कर दिया जाए. जो बाबा गोलवलकर का कानून है, वह इसे लागू करना चाहती है.

Anand Dutta Updated On: May 25, 2018 09:12 AM IST

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EXCLUSIVE: देश अंबेडकर के कानून से चलेगा, गोलवलकर के कानून से नहीं- तेजस्वी

थ्रर्ड फ्रंट की सुगबुगाहट शुरू ही हुई थी कि कर्नाटक चुनाव परिणाम ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया. एचडी कुमारस्वामी के शपथग्रहण समारोह के बाद तो यही लग रहा है कि बीजेपी, कांग्रेस के इतर जिस राजनीति की जरूरत पर ममता, चंद्रशेखर राव, चंद्रबाबू नायडू एक मंच बनाने की तैयारी कर रहे थे, उस मुहिम की भ्रूणहत्या हो चुकी है. विपक्ष अब कांग्रेस को आगे कर पीएम मोदी के खिलाफ एकजुट हो रहा है. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी इसे अपना पूरा समर्थन जता चुके हैं. 24 मई को बेंगलुरु से वापस लौटते ही उन्होंने पटना में अपने आवास पर फ़र्स्टपोस्ट के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. पेश है बातचीत के अंश...

ये महाजुटान कैसा रहा. किन नेताओं से और क्या बातचीत हुई. देश को इससे क्या उम्मीद करनी चाहिए?

ये जो महाजुटान है मुझे खुशी है कि देश की विपक्षी पार्टियां एकजुट हो रही हैं. इससे बीजेपी घबराई है, परेशान है. ये महाजुटान मोदी-बीजेपी को रोकना नहीं है. यह संविधान, देश और आरक्षण को बचाने के लिए है. आज बीजेपी सरकार चाहती है नागपुरिया (नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है) कानून लागू कर दिया जाए. जो बाबा गोलवलकर का कानून है, वह इसे लागू करना चाहती है. अंबेडकर के संविधान को खत्म करना चाहती है.

बीजेपी कांग्रेस का इकोनॉमिक मॉडल एक है, पॉलिटिक्स करने का तरीका लगभग एक है. ऐसे में एक मजबूत थर्ड फ्रंट की जरूरत है. इस महाजुटान ने तो इसकी भ्रूण हत्या ही कर दी?

देखिए थर्ड फ्रंड हो या फोर्थ फ्रंट, मसला विपक्षी एकजुटता है. राष्ट्रीय स्तर पर सभी को एक साथ आना होगा. तभी बीजेपी का मुकाबला किया जा सकता है, देश को बचाया जा सकता है. कांग्रेस कम से कम बाबा अंबेडकर के संविधान को तो मानती है.

आप बिहार में नंबर वन पार्टी हैं, बीजेपी कर्नाटक में, दोनों सत्ता से बाहर हैं, कहां की स्थिति आदर्श है?

(थोड़ी चुप्पी) चाहे सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बने या दो सीट मिले, बीजेपी हर तिकड़म कर सरकार बनाना चाहती है. वह इसके लिए हॉर्स ट्रेडिंग से लेकर सीबीआई, ईडी सहित हर हथकंडा अपनाने को आतुर रहती है. वहां तो उसको न्योता मिला था न. मुझे तो यहां सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नहीं बुलाया गया. एक ही स्थिति में राज्यपालों का दोहरा रवैया क्यों हुआ.

नहीं, सवाल ये था कि दोनों राज्यों में जो स्थिति है, किसको सही मानते हैं?

कर्नाटक में बीजेपी सत्ता से बाहर है, यही आज का सच है. यही देश के विकास के लिए जरूरी है. जो भी हो इस पूरे प्रकरण से बीजेपी का असली चेहरा खुलकर लोगों के सामने आ गया है.

सरकार बनाने के लिए आपका दावा पेश करना पॉलिटिकल स्टंट के अलावा भी कुछ था क्या?

आप इसे पॉलिटिकल स्टंट कहिए या कुछ और, मैं तो अपना हक मांगने गया था. बिहार की जनता का हक मांगने गया था. लोगों ने आरजेडी को चुना था, उसे सरकार बनाने का मौका मिलना ही चाहिए था.

शत्रुघ्न सिन्हा अगर आरजेडी में आना चाहते हैं तो आप लेंगे क्या?

वह बड़े नेता हैं. बड़े अभिनेता हैं. उन्होंने बिहार का नाम दुनियाभर में रौशन किया है. वह जिस पार्टी में जाना चाहेंगे लोग उनका स्वागत ही करेंगे. रही बात आरजेडी की तो अगर वह आना चाहेंगे तो इसका जोरदार स्वागत होगा.

आपके एक भी सवाल का जवाब सीएम नहीं देते हैं, फिर क्यों बार-बार पूछते रहते हैं?

उनके पास जवाब रहेगा तब न कुछ कहेंगे. वह मुझे इग्नोर नहीं कर रहे हैं, सवालों का जवाब न देकर खुद को बचा रहे हैं. उनको किसी भी हाल में कुर्सी पर बैठने से मतलब है. राज्य में हो रहे अपराध, अपहरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

tejaswi yadav

आरजेडी का एक जिलाध्यक्ष मीडियाकर्मी को गाली देता है तो उसे पार्टी से निकाल दिया जाता है. वहीं तेजप्रताप मोदी को खाल खींचने की बात कह चुके हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं. यह दोहरा रवैया क्यों?

तेजप्रताप जी ने ऐसा क्यों कहा, यह किसी मीडिया ने नहीं दिखाया. अगर आपके पिता के हत्या की बात होगी, उनकी सुरक्षा से समझौता होगा, तो आप चुप रहेंगे क्या? एक बेटा होने के नाते उन्होंने ऐसी बातें कही थीं. लेकिन इस बात को सही नहीं ठहराया जा सकता, मैं क्या खुद लालू जी ने उसे सही नहीं ठहराया था. रही बात अभद्र भाषा के इस्तेमाल की बात, तो इसके बारे में आपको अमित शाह और अन्य बीजेपी नेताओं से ही पूछना चाहिए.

आप, तेजप्रताप, मीसा भारती, राबड़ी देवी, लालू यादव, आनेवाले समय में कुछ और पारिवारिक सदस्य आ सकते हैं, ऐसे में आरजेडी को क्यूं न प्राइवेट लिमिटेड पार्टी माना जाए?

मुझे जनता ने जितवाया है, तेजप्रताप को जनता ने जितवाया है, आरजेडी के नेताओं और लोगों ने हमें अपना नेता माना है, आप परिवारवाद का आरोप लगाते रहिए. हम जीतकर आए हैं, जोर जरबदस्ती से नहीं.

लेकिन मीसा भारती को तो जनता ने खारिज कर दिया था, फिर वह क्यों पार्टी में अहम रोल अदा कर रही हैं?

अगर ऐसा रहता तो दीदी इतनी देर से पार्टी में नहीं आती. परिवारवाद पर चर्चा करना ही है तो पहले बॉलीवुड को जाकर कोसिए, उद्योगपतियों को जाकर कोसिए. ये पैमाना केवल राजनेताओं के लिए क्यों है? बीजेपी देश की बड़ी पार्टी है, उसके अंदर भी यही हाल है. केवल आरजेडी से आप क्यों उम्मीद कर रहे हैं. अगर बड़ी पार्टियां लिखकर दें कि किसी भी सांसद, विधायक या मंत्री के परिजनों को राजनीति में नहीं आने दिया जाएगा, हम भी छोड़ने को तैयार हैं. वैसे भी हर कोई चाहता है कि उसकी पार्टी में उसी के आइडियोलॉजी को माननेवाले लोग हों, धोखेबाजों की हमारी पार्टी में कोई जगह नहीं है. फिलहाल हमको जनता ने मैंडेट दिया है, उसको हम सही से निभा रहे हैं.

अब जब लालू यादव जी को इलाज के लिए बेल मिल गया है, ऐसे में हत्या की साजिश वाली बात वापस लेंगे?

(एक बार फिर चुप्पी) बीजेपी के रहते कभी भी खतरे को कम नहीं आंका जा सकता है. रिम्स (रांची का वह अस्पताल जहां लालू प्रसाद का इलाज चल रहा था) ने अपना हाथ खड़ा कर दिया और उन्हें एम्स रेफर कर दिया. फिर एम्स ने उन्हें रिम्स भेज दिया, वह भी बिना किसी सुधार के.

अब तो उन्हें बेल मिल गई न, वह मुंबई में इलाज करा रहे हैं, फिर बेंगलुरु जानेवाले हैं. क्या अब भी आप आरोप पर कायम रहेंगे?

आप कहां हैं, किस दुनिया में हैं. लोग तो वही हैं न. देखिए यह बीजेपी है. मोदी अमित शाह की जोड़ी है. इनको हल्के में नहीं लिया जा सकता. ये कभी भी कुछ भी करवा सकते हैं. हाल ही में राहुल गांधी के विमान में खराबी आ गई थी, यह सब बीजेपी सरकार की ही साजिश है. ऐसे में हम उस आरोप पर कायम हैं.

बिहार के मीडिया पर आप चापलूस पत्रकारिता का आरोप लगा चुके हैं, अगर आपकी सरकार आती है तो क्या इनको विज्ञापन देना बंद कर देंगे?

मैं प्रोग्रेसिव माइंड का नेता हूं. मेरा दिमाग इतना संकुचित नहीं है. अगर हमारी सरकार आती है तो बदले की भावना के काम नहीं करेगी. हमारे शासन काल में कोई भी घटना फ्रंटपेज पर छपती थी, आज कोई भी घटना फ्रंट पेज पर जगह नहीं दी जाती. मीडिया का काम है सबको बराबर जगह देना. वह हमें सिंगल कॉलम में समेट रही है, जनता नहीं. जनता हमें देख रही है, हम उसके बीच हैं.

2019 को लेकर आरजेडी की क्या तैयारी है, नीतीश पर आरोप लगाने के अलावा किन मुद्दों को लेकर जाएंगे आप?

हमारा काम है सरकार की नाकामियों को बताना, तो वही करेंगे न हम. पार्टी की तैयारी तो चल ही रही है, लेकिन नीतीश कुमार की विफलता को जनता के बीच लाना भी हमारा ही काम है. वह हम अभी तो कर ही रहे हैं, आगे और उजागर करेंगे.

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क्या शरद यादव आरजेडी ज्वाइन कर रहे हैं, या फिर उन्हें लाने का प्रयास किया जा रहा है.

वह परिवार के सदस्य हैं. हमारे विचार के लोग हैं, वह बाहर हैं ही नहीं, तो उनको लाने का प्रयास क्यों किया जाएगा. अभिभावक की तरह हैं, हम उनका पूरा सम्मान करते हैं.

अगर आगामी चुनाव में नीतीश कुमार बीजेपी को छोड़ रामविलास और कुशवाहा के साथ अलग फ्रंट बनाकर लड़ते हैं, तो आरजेडी की रणनीति क्या रहेगी?

अगर वह ऐसा करते हैं तो उनका गठबंधन जीरो वैल्यू के बराबर होगा. वह अभी बीजेपी के साथ हैं, क्या कहकर वोट मांगने जाएंगे. जो भी उनके साथ जाएगा, अपने पैर पर कुल्हाड़ी ही मारेगा.

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