S M L

राहुल गांधी का नया अवतार: ट्रोल्स का चहेता, बना जननेता

गुजरात में राहुल गांधी के रोड शो और जनसभाओं में उमड़ी भीड़ देखकर लगता है कि लोग अब कुछ नया और कुछ अलग सुनना चाहते हैं.

Sandipan Sharma Sandipan Sharma Updated On: Nov 04, 2017 11:55 AM IST

0
राहुल गांधी का नया अवतार: ट्रोल्स का चहेता, बना जननेता

कई सालों की कड़ी तपस्या के बाद राहुल गांधी आखिरकार राजनीति में अपनी जड़ें जमाने में कामयाब हो ही गए हैं. राहुल की लोकप्रियता में दिन-ब-दिन हो रहा इजाफा इस बात को साबित करता है कि उन्होंने सियासत में कुछ हद तक अपना वाजिब मकाम हासिल कर लिया है.

आजकल हर तरफ राहुल गांधी की चर्चा है. सोशल मीडिया हो, अखबार हों या न्यूज चैनल राहुल गांधी हर जगह छाए हुए हैं. सुबह जब हम सोकर उठते हैं, तो पाते हैं कि राहुल या तो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे होते हैं, या उनका कोई बयान गूगल पर हेडलाइन बना होता है. लेकिन इस बार राहुल के सुर्खियों में रहने की वजह उनके बेतुके बयान नहीं, बल्कि उनके गंभीर और समसामयिक विचार हैं.

आजकल जिस सधे हुए और पैने अंदाज में राहुल लोगों के सामने अपनी बात रख रहे हैं, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है. राहुल का बदला हुआ अंदाज और उनका नया अवतार लोगों को भा गया है. यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है.

अपने भाषणों से दे रहे हैं गंभीर संदेश

किसने सोचा था कि राहुल गांधी का ऐसा कायाकल्प होगा और वो देश के एक बड़े वर्ग की आंखों का तारा बन जाएंगे. इन दिनों राहुल अपने भाषणों में जो मुहावरे और व्यंग्य इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें गजब का पैनापन नजर आता है. इन मुहावरों में हंसी-मजाक के साथ-साथ गंभीर संदेश भी छुपा होता है.

ये भी पढ़ें: डोकलाम पर पीएम मोदी के तीखे हमले का जवाब कैसे देंगे राहुल?

राजनीति के इतर भी राहुल आजकल जो कुछ क्रिया-कलाप कर रहे हैं, वो बात भी देखते ही देखते सुर्खियां बन जाती है. अब राहुल की मार्शल आर्ट वाली तस्वीर को ही लीजिए. अकिदो (जापानी मार्शल आर्ट) करते राहुल की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई. जाहिर है लोगों को राहुल का अंदाज खासा पसंद आया. वहीं जब लोगों को मालूम हुआ कि राहुल अकिदो में ब्लैक बैल्ट हैं, तब लोगों के दिल में राहुल की इज्जत कुछ और बढ़ गई. ये राहुल की लोकप्रियता का ही नतीजा है कि उनकी जनसभाओं में अब भारी भीड़ उमड़ रही है, और वो जनता की तालियां और वाहवाही लूट रहे हैं.

आलम ये है कि लोगों के बीच राहुल से मिलने और उनके साथ सेल्फी खिंचवाने की होड़ शुरू हो गई है. राहुल भी अपने इन चाहने वालों को मायूस नहीं कर रहे हैं. गुजरात के भरूच में रोड शो के दौरान 10वीं की एक छात्रा ने जब राहुल से सेल्फी की गुजारिश की, तो राहुल ने अपनी सुरक्षा की परवाह न करते हुए भी छात्रा के साथ सेल्फी खिंचवाई. राहुल की इस बदली हुई छवि से हर कोई हैरान है. मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर रिची बेनो के शब्दों में कहा जाए तो, ये सब जो हमारे सामने हो रहा है, उसपर यकीन नहीं होता.

वलसाड में खेडुत समाज को संबोधित करते राहुल. (पीटीआई)

वलसाड में खेडुत समाज को संबोधित करते राहुल. (पीटीआई)

ट्रोल्स का प्रिय जननेता कैसे बना?

राहुल के व्यक्तित्व में आए इस क्रांतिकारी बदलाव के पीछे के कारण क्या हैं? एक ऐसा नेता जिसे अपने राजवंश का बहादुर शाह जफर माना जाता था, लोग पप्पू कहकर जिसका मजाक उड़ाते थे, जिस पर बनाए गए मीम और चुटकुले हमेशा सोशल मीडिया पर छाए रहते थे, वो आखिर जननेता कैसे बना?

तजुर्बा कहता है कि, किसी भी बदलाव या घटना के पीछे तीन कारण होते हैं- समय, स्थान और कोशिश (अभ्यास). पुरानी कहावत है, ‘करत करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान.’ राहुल गांधी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. राजनीति में निरंतर संघर्ष, कठिन वक्त और विपक्ष की शोला जुबानी ने राहुल को कुंदन बना दिया है.

ये भी पढ़ें: बदले-बदले राहुल गांधी: जनता की भावनाओं से मिलाई ताल

राजनीति में राहुल कितने कामयाब होंगे, ये बात अभी भविष्य के गर्भ में है. लेकिन लोगों के सामने उन्होंने अपनी जो मानवीय छवि पेश की है, वो वाकई बहुत प्रभावशाली है. पहले राहुल हर काम बहुत जल्दबाजी में किया करते थे, बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देते थे. जिसकी वजह से न सिर्फ उनका मजाक उड़ता था, बल्कि कोई भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेता था. लेकिन अब तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है. राहुल अब धीरे-धीरे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी मजबूत छवि को पेश कर रहे हैं. राहुल अब अपनी अदा और अंदाज बदल चुके हैं. उनके हर बयान, हर ट्वीट में निरालापन नजर आ रहा है.

लिखी-पढ़ी गई बातें बोलने से हुए थे दूर

कुछ साल पहले, जब हम राहुल को बहुत कम जानते थे, तब हम बात-बात में उनकी आलोचना करने लगते थे. अपने पिछले अवतार में राहुल के साथ एक समस्या और थी, तब वो गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत के प्रतीक कम ही नजर आते थे. उस वक्त राहुल जब भी बोलते थे, तब ऐसा लगता था कि वो सिखाई-पढ़ाई गई बातें बोल रहे हैं. उस वक्त राहुल जो भी करते थे, तब ऐसा महसूस होता था कि, वो सब पहले से लिखी गई पटकथा के मुताबिक हो रहा है.

अतीत के राहुल गांधी की छवि मशहूर अंग्रेजी लेखक पी. जी. वोडहाउस के एक चर्चित व्यंग्य की याद दिलाया करती थी. वोडहाउस ने कभी कहा था, ‘वो इतना अक्लमंद है कि अपना मुंह खोल सके, लेकिन तब, जबकि उसे भूख लगी हो, इसके अलावा नहीं.’ बहुत से लोगों का मानना है कि वोडहाउस का ये व्यंग्य राहुल के पिछले अवतार पर बिल्कुल फिट बैठता था.

पटकथा के मुताबिक बोलने और तौर-तरीके अपनाने की वजह से तब राहुल अपने मूल चरित्र और वास्तविकता से दूर हो गए थे. उस वक्त ऊल-जुलूल बयान देने और बेवकूफाना अंदाज के चलते राहुल को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था. तब मुखौटा और नौसिखिया बोलकर लोग राहुल का अनादर और तिरस्कार किया करते थे.

राहुल अब अपनी बात गंभीरता से पेश करते हैं और साबित कर रहे हैं कि वो भी हममें से एक हैं. (पीटीआई)

राहुल अब अपनी बात गंभीरता से पेश करते हैं और साबित कर रहे हैं कि वो भी हममें से एक हैं. (पीटीआई)

लेकिन राहुल ने चोला उतार फेंका है

लेकिन अचानक, राहुल गांधी एक नए रूप, एक नए अवतार में हमारे सामने आए. सार्वजनिक जीवन में उनके बोलने के अंदाज और कामकाज की शैली ने सबका मन मोह लिया. अपने नए अवतार में राहुल ने ये भी जाहिर किया कि, वो भी इंसान हैं, सबकी तरह उनका भी अपना एक चरित्र और व्यक्तित्व है, उनमें अगर कुछ अच्छे गुण हैं तो कुछ कमजोरियां भी हैं. राहुल अब लोगों के सामने अपनी बात पूरी गंभीरता और सच्चाई के साथ रखते हैं.

उनकी बातों में अब बनावटी गुस्सा नजर नहीं आता बल्कि उसकी जगह मुहावरों, तीखे व्यंग और हंसी-मजाक ने ले ली है. राहुल के इस अंदाज में उनके अंतर्मन की झलक नजर आती है. ऐसे में राहुल गांधी से तमाम वैचारिक मतभेदों के बावजूद अब विपक्षी नेता भी उनकी कद्र करने लगे हैं. अब विरोधियों को भी राहुल परिवारवाद की परंपरा में थोपे गए नेता नहीं लगते, बल्कि उनको अब राहुल में एक अलग व्यक्तित्व दिखाई देता है.

ये भी पढ़ें: हार्दिक पटेल का अल्टीमेटम कांग्रेस के प्लान में पलीता लगा सकता है

अब बुधवार को भरूच में राहुल के रोड शो के दौरान हुई घटना को ही लीजिए, जहां एक छात्रा सेल्फी लेने के लिए राहुल की वैन पर चढ़ गई थी. अगर हम उस घटना का वीडियो गौर से देखें तो पाएंगे कि अपनी सियासी मुहिम में जुटे राहुल कैसे लोगों के बीच खुशियां भी बांट रहे हैं.

एक युवा और जोशीली लड़की की मासूमियत, राहुल की शर्मीली मुस्कुराहट और लड़की के वैन से सुरक्षित उतरने को लेकर राहुल की चिंता उस घटना और उसके वीडियो को बहुत खास बना देती है. राहुल उस लड़की का हाथ तब तक थामे रहे जबतक कि वो सुरक्षित वैन से उतर नहीं गई. राहुल की ये दरियादिली और अपनापन लोगों के दिल को छू गया.

Rahul Gandhi in Bharuch

ये एक घटना राहुल गांधी के व्यक्तित्व के बारे में हजारों बातें जाहिर करती है. ये घटना बताती है कि राहुल कितने दयालु इंसान हैं. ये घटना बताती है कि राहुल ऐसे भरोसेमंद नेता हैं जिनके साथ लोग सिर्फ सेल्फी ही नहीं खिंचवाना चाहते, बल्कि घर बुलाकर उनकी दावत भी करना चाहते हैं.

ये भी पढ़ें: निर्भया की मां ने कहा-राहुल गांधी की वजह से मेरा बेटा पायलट बना

हम लोग अब जान गए हैं कि राहुल हम में से ही एक हैं, वो भी हमारी तरह पालतू जानवरों से प्यार करते है, और खेल-कूद में रुचि रखते हैं. लोग ये भी समझ गए हैं कि राहुल जितने शर्मीले हैं, उतने ही संवेदनशील भी हैं. राहुल ने जिस तरह से खामोशी के साथ निर्भया के परिवार की मदद की, उससे लोगों को ये भी पता चल गया है कि राहुल अपने अच्छे कामों का ढिंढोरा पीटने में यकीन नहीं रखते.

राहुल की रीब्रांडिंग काम आएगी?

राहुल की रीब्रांडिंग ने यकीनन उनकी एक संवेदनशील और मानवीय छवि पेश की है. राहुल की ये छवि, भले ही विशेषज्ञों के जरिए बनाई गई हो, या ये खुद राहुल की अपनी कोशिशों का नतीजा हो, उससे राहुल की संवेदनशीलता पर कोई फर्क नहीं पड़ता.

लेकिन राहुल की असल परीक्षा अब शुरू हुई है, क्योंकि अब हर कोई ये जानना चाहता है कि अपने नए अवतार के जरिए क्या राहुल मतदाताओं को लुभा पाएंगे? क्या वो राज्य दर राज्य जीत दर्ज कर रही बीजेपी की रफ्तार पर ब्रेक लगा पाएंगे? लोग ये भी जानने को बेताब है कि क्या राहुल मोदी की चमक फीकी कर पाएंगे? क्योंकि अब देश का माहौल बदल चुका है, अब वो वक्त नहीं रहा जब मरणासन्न कांग्रेस को पटखनी देकर मोदी दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे. अब कांग्रेस के लिए हवा कुछ-कुछ माफिक हो चली है. ऐसे में लोगों को राहुल से उम्मीदें बढ़ गई हैं.

ये भी पढ़ें: वो 60 साल का हिसाब मांगेंगे, राहुल गांधी आप साढ़े तीन साल के हिसाब पर अड़े रहना!

गुजरात में राहुल गांधी के रोड शो और जनसभाओं में उमड़ी भीड़ देखकर लगता है कि लोग अब कुछ नया और कुछ अलग सुनना चाहते हैं. राहुल को मिल रहे भारी जनसमर्थन से ये भी लगता है कि, लोग प्रधानमंत्री के मन की बात से ऊब चुके हैं, और अब वो दूसरे लोगों के मन की बात सुनना चाहते हैं.

ऐसा लगता है कि मतदाताओं के मन में उथल-पुथल मची हुई है, उनके अंदर कुछ पक रहा है. ऐसे में राहुल सरकार की नीतियों और फैसलों से नाखुश जनता की आवाज बनकर उभरे हैं. राहुल अब लोगों की नब्ज पकड़ना बखूबी सीख गए हैं, जिसने उन्हें सही मायनों में जननेता बना दिया है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
सदियों में एक बार ही होता है कोई ‘अटल’ सा...

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi