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मध्य प्रदेश में लागू होगी शराबबंदी, लेकिन, किंतु, परंतु...

चुनाव के दरवाजे पर खड़ी शिवराज सरकार शराबबंदी पर जनता को नाराज करने का जोखिम मोल नहीं ले सकती

Updated On: Apr 12, 2017 10:38 AM IST

Ashutosh Shukla

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मध्य प्रदेश में लागू होगी शराबबंदी, लेकिन, किंतु, परंतु...

बिहार में नीतीश कुमार को शराबबंदी के चलते तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते देख मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अब उसी राह पर चलने की बात कर रहे हैं.

टीवी से लेकर अखबार में हर तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उनके मंत्री शराबबंदी की बात कर रहे हैं. हालांकि जिस राज्य में शराब की दुकानें सरकारी नियमों के चलते चाय की दुकानों के पहले खुल जाती हों वहां ऐसा हो पाना मुश्किल लगता है.

पिछले कुछ दिन में राज्य के कई शहरों और कस्बों से शराब दुकानों के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं. जगह-जगह औरतें और बच्चे शराब की दुकान चलाने वालों को पीट रहे हैं और दुकानें तोड़ रहे हैं. जाहिर है चुनाव के दरवाजे पर खड़ी सरकार इनको नाराज करने का जोखिम मोल नहीं ले सकती.

Nitish Kumar

बिहार में नीतीश कुमार ने 1 अप्रैल, 2016 से सख्ती से शराबबंदी लागू कर रखी है (फोटो: फेसबुक से साभार)

इन सब के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से शराबबंदी की घोषणा भी कर दी. मौका था 'नर्मदा सेवा यात्रा' का जो आजकल मुख्यमंत्री आध्यात्मिक और राजनीतिक हस्तियों के साथ निकाल रहे हैं.

शिवराज सरकार पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

शिवराज सिंह ने घोषणा की है कि पहले चरण में नर्मदा नदी की दोनों तटों पर पांच किलोमीटर तक शराब की सभी दुकानें बंद कर दी जाएंगी. दुकानवाले घबराए, शराबी चिंतित हुए कि अब ज्यादा चलना होगा लेकिन मध्य प्रदेश टूरिज्म के माथे पर शिकन नहीं आई. ऐसा इसलिए क्योंकि नर्मदा के दोनों ओर बने मध्य प्रदेश सरकार के होटलों में चल रहे बार, दुकान नहीं माने गए.

आज हालात हैं कि मध्य प्रदेश के गांवों कस्बों और शहरों में चाय की दुकानें बाद में खुलती हैं और शराब की पहले. ऐसा इसलिए कि सरकार ने शराब दुकानों को अकाउंट मेंटेन करने के नाम पर सुबह 10:30 के बजाय 9:30 बजे खोलने की इजाजत दी थी लेकिन शराब ठेकेदार 8 बजे ही दुकान खोलने लगे.

Wine Shop

पिछले कुछ बरसों में मध्य प्रदेश में जगह-जगह शराब की दुकानों खुल गई हैं (फोटो: फेसबुक से साभार)

इसी तरह बाजार बंद होने के बाद शराब की दुकानें रोशनी का टापू बन जाती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस बाजार तो 10:30 पर बंद करवा देती है लेकिन शराब दुकानों के बंद होने का समय 11:30 है. स्थानीय प्रशासन कहता है कि शराब दुकानें गुमास्ता कानून के दायरे में नहीं आतीं.

वित्त मंत्री जयंत मलैया जिनके पास आबकारी विभाग भी है, इसे एक तकनीकी गड़बड़ी मानते हैं. गुमास्ता कानून वो कानून है जिससे जरिए छोटी-बड़ी दुकानों और बाजारों को नगर निगम और पुलिस वाले कंट्रोल करते हैं.

मलैया लंबे समय से कहते चले आ रहे हैं कि इसे ठीक कर दिया जाएगा लेकिन अप्रैल में शराब के नए ठेके आवंटित करने के वक्त भी ऐसा हुआ नहीं है.

शराब की एक भी दुकान नहीं खुलेगी

मुख्यमंत्री ने पिछले चुनावों से पहले घोषणा की थी कि शराब की एक भी नई दुकान उनके शासनकाल में नहीं खोली जाएगी. उन्होंने 2015 में अपना ये वादा दोहराया भी था.

शिवराज कैबिनेट ने सबसे पहले जो फैसले लिए उसमें सारी देसी शराब की दुकानों को अंग्रेजी शराब बेचने की इजाजत देने का निर्णय भी था. शर्त सिर्फ इतनी थी कि गांवों की 10 किमी के रेडियस या परिधि में अंग्रेजी शराब की दुकान न हो.

इस निर्णय के बिना शराब की नई दुकानें खोले बगैर शराब दुकानों की संख्या लगभग दोगुनी हो जाती. इसका विरोध होने पर मुख्यमंत्री ने यह निर्णय वापस ले लिया. शिवराज सिंह बोले कि वो ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर ऐसा कर रहे हैं. लेकिन आबकारी विभाग के आला अफसर लगातार शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं. कैबिनेट में दो साल पहले फिर नई शराब दुकानों को अनुमति देने का प्रस्ताव लाया गया था पर मुख्यमंत्री ने उसे इजाजत नहीं दी.

Shivraj Singh Cabinet

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अधिकारियों के साथ मंत्रालय में बैठक करते हुए (फोटो: फेसबुक से साभार)

हर साल 7 हजार करोड़ टैक्स

मध्य प्रदेश सरकार को हर साल शराब से 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई होती है. इसे देखते हुए सरकारों की रूचि उसे लगातार बढ़ाते रहने में रही है. इसके अलावा सरकार का न तो शराब के मूल्य, गुणवत्ता या उसके सामाजिक-आर्थिक लाभ-हानि की तरफ कभी ध्यान रहा.

अब जयंत मलैया कह रहे हैं कि सरकार 400 करोड़ रुपए शराब के खिलाफ जनमानस बनाने पर खर्च करेगी. साथ ही जनता जब चाहेगी शराबबंदी लागू कर दी जाएगी पर ऐसा करना आसान तो नहीं दिखता.

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