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तेलंगाना चुनाव: स्वामी परिपूर्णानंद होंगे बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार? विजयादशमी पर फैसले का ऐलान संभव

बीजेपी की रणनीति देखकर ऐसा लगता है कि तेलंगाना में पार्टी का प्रमुख मुद्दा हिंदुत्व होगा और इस मुद्दे को स्वामी परिपूर्णानंद के नेतृत्व में भुनाने की कोशिश की जाएगी

Updated On: Oct 15, 2018 02:31 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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तेलंगाना चुनाव: स्वामी परिपूर्णानंद होंगे बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार? विजयादशमी पर फैसले का ऐलान संभव
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चार अन्य राज्यों के साथ तेलंगाना में भी विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां चरम पर हैं. तेलंगाना में 7 दिसंबर को एक ही चरण में सभी 119 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे जबकि चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे. जाहिर है कि चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बचा है. ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी सियासी बिसात बिछाने में जुटे हैं ताकि चुनाव में जीत हासिल की जा सके. लिहाजा जोड़-तोड़ और दल-बदल का दौर शुरू हो चुका है. राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव जहां सत्ता पर फिर से काबिज होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं बीजेपी उन्हें हर हाल में रोकने की मुहिम में जुटी है. वहीं कांग्रेस, तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी चुनावी मैदान में मजबूती के साथ ताल ठोंक रही हैं.

तेलंगाना में भगवा झंडा लहराने के लिए बीजेपी इस बार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती है. बीजेपी की रणनीति देखकर ऐसा लगता है कि तेलंगाना में पार्टी का प्रमुख मुद्दा हिंदुत्व होगा और इस मुद्दे को स्वामी परिपूर्णानंद के नेतृत्व में भुनाने की कोशिश की जाएगी. दरअसल यह लगभग निश्चित हो चुका है कि आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के काकीनाडा स्थित श्री पीठम के प्रमुख स्वामी परिपूर्णानंद तेलंगाना विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल होंगे. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो स्वामी परिपूर्णानंद 19 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं. ऐसी अटकलें हैं कि बीजेपी स्वामी परिपूर्णानंद को तेलंगाना में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना सकती है.

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स्वघोषित 'पक्के हिंदू' स्वामी परिपूर्णानंद ने अपने राजनीतिक आदर्श प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 'थर्ड आई' नाम की एक किताब भी लिखी है. स्वामी परिपूर्णानंद को तेलंगाना में हिंदू आबादी का अच्छा समर्थन प्राप्त है. वह हैदराबाद के ओवैसी बंधुओं के घोर विरोधी और आलोचक हैं. स्वामी परिपूर्णानंद का कहना है कि, जो लोग ‘भारत माता की जय’ बोलने में परहेज करते हैं, उन्हें मैं कैसे पसंद कर सकता हूं. स्वामी परिपूर्णानंद को कट्टर हिंदुत्व के हिमायती के तौर पर जाना जाता है. उन्होंने नवंबर 2017 में ‘राष्ट्रीय हिंदू सेना’ नाम का एक संगठन भी शुरू किया था. स्वामी परिपूर्णानंद अपने कथित भड़काऊ भाषणों की वजह से विवादों में भी रहे हैं. इसी साल जुलाई महीने में स्वामी परिपूर्णानंद को छह महीने के लिए हैदराबाद से निर्वासित (तड़ीपार) कर दिया गया था. उन पर दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करने का आरोप था. हालांकि बाद में हैदराबाद हाईकोर्ट ने हैदराबाद पुलिस के स्वामी परिपूर्णानंद के निर्वासन वाले आदेश को पलट दिया था.

फ़र्स्टपोस्ट के साथ खास बातचीत में स्वामी परिपूर्णानंद ने बताया कि तेलंगाना में उनका एजेंडा हिंदुओं और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ना है. इसके अलावा वह राज्य के लिए एक व्यापक विकास कार्यक्रम भी तैयार करना चाहते हैं. बता दें कि, तेलंगाना राज्य चार साल पहले अस्तित्व में आया था. जनता के लंबे संघर्ष के बाद साल 2014 में आंध्र प्रदेश का एक हिस्सा काटकर तेलंगाना राज्य की स्थापना की गई थी.

स्वामी परिपूर्णानंद से फ़र्स्टपोस्ट की बातचीत के कुछ अंशः

Swami Paripoornananda

क्या आप तेलंगाना विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी में शामिल हो रहे हैं? अगर यह बात सच है तो ऐसा कब होगा?

हां, यह बात सच है कि मैं बीजेपी में शामिल होने जा रहा हूं. मेरे बीजेपी में शामिल होने का फैसला पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मेरी चर्चा के बाद लिया गया था. बीजेपी में मेरे आधिकारिक तौर पर शामिल होने की तारीख को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है. अमित शाह, राम माधव और योगी जी से चर्चा के बाद मैंने 10 दिनों की मोहलत मांगी थी. दरअसल इस समय मैं नवरात्रि त्यौहार के दौरान उपवास, अनुष्ठान और साधना करना चाहता हूं. इनके अलावा मैं खुद को नई भूमिका के लिए तैयार भी करना चाहता हूं. 19 अक्टूबर को विजयादशमी है. यह बहुत ही शुभ दिन होता है. लिहाजा मैं विजयादशमी पर बीजेपी में शामिल होने या न होने की संभावनाओं पर गौर कर रहा हूं.

राजनीति में आने के लिए आपको किस बात ने प्रेरित किया? क्या आपको नहीं लगता है कि सक्रिय राजनीति में आने से आपका धार्मिक और आध्यात्मिक मार्ग प्रभावित होगा?

पिछले कई दशकों से राजनीति का धीरे-धीरे क्षरण हो रहा है. राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. जब तक आध्यात्म की तरह राजनीति के प्रति भी समान समर्पण का भाव नहीं होगा तब तक उससे न तो राज्य का भला होगा और न ही राष्ट्र का. आध्यात्मिकता के साथ-साथ राजनीति की आत्मा भी बलिदान होती है. जिस तरह से एक संत (साधक) अपने जीवन में सबकुछ बलिदान कर देता है, एक राजनेता से भी उसी तरह के आचरण की अपेक्षा होती है.

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 130 करोड़ भारतीयों के सार्वजनिक धन के संरक्षक हैं. वह मौजूदा राजनीति में बलिदान का सबसे बड़ा उदाहरण हैं. उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है. उन्होंने राजनीति के लिए अपने निजी हितों का त्याग किया है. नरेंद्र भाई के स्वच्छ भारत मिशन की तरह देश में स्वच्छ राजनीति की भी सख्त जरूरत है. देश को स्वच्छ राजनीति की आवश्यकता के चलते ही मैंने सियासत में शामिल होने के बारे में सोचा. इससे मेरी आध्यात्मिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी क्योंकि मैं भी राजनीति में बलिदान के मार्ग का पालन करूंगा. आध्यात्म की तरह ही राजनीति में मेरा लक्ष्य 'देना' होगा 'लेना' नहीं होगा.

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आपके अनुयायी और समर्थक लगभग सभी पार्टियों में हैं फिर आपने बीजेपी में शामिल होने का फैसला क्यों किया?

यह बात सच है कि, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के हर हलके में मेरे अनुयायी हैं लेकिन मैंने नरेंद्र भाई (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) से प्रेरित होकर बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है. वह राजनीति में सच्चे बलिदान का प्रतीक हैं. वह एक सच्चे दूरदर्शी हैं. वह हमारी गौरवशाली संस्कृति के रक्षक हैं. देश और समाज के विकास के लिए उनके पास मजबूत प्रतिबद्धता और जबरदस्त उत्साह है. मुझे जन्म देने वाले माता-पिता को छोड़कर मेरे पीछे कोई नहीं है. मैं अपने साथ कोई साजोसामान लेकर नहीं चलता और न ही मुझे धन-दौलत से मोह है. अच्छी और स्वच्छ राजनीति के लिए मैं खुद को बलिदान कर सकता हूं.

जब से, नरेंद्र भाई प्रधानमंत्री बने हैं, हमने देश में आतंकवादी हमलों और धमाकों के बारे में नहीं सुना है जबकि इसके विपरीत साल 2014 से पहले आतंकवादी हमले होना आम बात हुआ करती थी. अब जबकि सैनिक हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान कर रहे हैं, ऐसे में राजनेताओं को भी बलिदान की भावना के साथ राष्ट्र को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. बीजेपी ही ऐसी इकलौती राजनीतिक पार्टी है जो देश और हिंदुओं दोनों को सुरक्षा की भावना प्रदान कर सकती है. प्रधानमंत्री मोदी पर मेरी किताब 'थर्ड आई' में, मैंने लिखा है कि नरेंद्र मोदी का अनुशासित व्यक्तित्व और प्रतिबद्धता ही इस देश का नेतृत्व कर सकती है और भारत को वैश्विक नेता (दुनिया का अग्रणी देश) बना सकती है.

राजनीतिक विशेषज्ञ आपको तेलंगाना का योगी आदित्यनाथ कहते हैं, इस पर आपकी प्रतिक्रिया क्या होती है?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मेरे बीच कोई तुलना नहीं हो सकती है. वह केवल मेरे वरिष्ठ ही नहीं है, बल्कि वह लगातार पांच बार संसद सदस्य भी रहे हैं. उन्होंने युवावस्था में अपने निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर की जिम्मेदारी ली थी और अब वह उत्तर प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं. मैंने तो अभी-अभी राजनीति के क्षेत्र में उतरने और जनता की सेवा करने का फैसला किया है. मैं आशा करता हूं कि राजनीति जगत के बड़े नेताओं और मेरे आसपास के लोगों से मुझे मार्गदर्शन मिलेगा. सहयोगियों और वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन से समाज और देश सेवा का काम मेरे लिए और आसान हो जाएगा.

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बतौर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के प्रदर्शन पर आपकी क्या राय है?

के चंद्रशेखर राव ने मुख्यमंत्री के तौर पर कैसा प्रदर्शन किया, उनका कामकाज कैसा रहा इस पर मेरी राय खास मायने नहीं रखती है. उन्हें तो चुनाव के दौरान तेलंगाना की जनता ही जवाब देगी. तेलंगाना के हालात और समस्याओं के बारे में आप सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देख सकते हैं. नरेंद्र भाई के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने तेलंगाना को 2.30 लाख करोड़ रुपए दिए थे जो कि तीन राज्यों के बजट के बराबर रकम है लेकिन उसका परिणाम क्या निकला? क्या राज्य में विकास हुआ? क्या राज्य की जनता को फायदा पहुंचा? क्या जरूरतमंद लोगों को रोजी-रोटी मिली? क्या बेघर लोगों को सिर छुपाने के लिए छत मिली?

तेलंगाना की जनता के लिए यह समय राजनीतिक आत्मनिरीक्षण करने का है. लोगों ने आंध्र प्रदेश से अलग राज्य की मांग की और कई सालों तक संघर्ष किया. आखिरकार लंबे संघर्ष और कई जिंदगियों के बलिदान के बाद चार साल पहले हमें तेलंगाना राज्य मिला लेकिन विकास के मानकों के संदर्भ में हमें क्या मिला है? बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बीते शुक्रवार को करीमनगर में अपनी रैली के दौरान कहा कि केसीआर सरकार ने तेलंगाना के लोगों से 150 वादे किए थे लेकिन वह कोई भी वादा पूरा करने में नाकाम रही है. वर्तमान राज्य सरकार ने केंद्र से मिले धन का उपयोग सिर्फ अपने प्रचार के लिए किया है.

आपको तेलंगाना में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया जा रहा है. क्या आपको लगता है कि अनुभव की कमी आपके लिए बाधा बन सकती है?

जो व्यक्ति सच्चे बलिदान में विश्वास करता है, उसे चाहे चपरासी के पद पर बैठा दिया जाए या मुख्यमंत्री के पद पर ऐसे व्यक्ति को अपना काम करने में कोई समस्या नहीं हो सकती है. अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए हमारे दिमाग में स्पष्टता और दिल में शुद्धता की आवश्यकता होती है. हालांकि मुझे तेलंगाना में बीजेपी का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. बहरहाल यह एक बड़ी चुनौती है और मैं किसी भी स्थिति के बारे में चिंतित नहीं हूं. पार्टी जो भी जिम्मेदारी मुझे सौंपेगी, मैं उसे सर्वोत्तम संभव तरीके से पूरा करने की कोशिश करूंगा. मेरा एकमात्र उद्देश्य राज्य में अच्छा काम करना और पार्टी को स्थापित करना है और यह केवल बलिदान के मंत्र का पालन करके ही संभव हो सकता है.

ऐसी चर्चाएं गर्म हैं कि आपके जरिए सांप्रदायिक कार्ड खेलकर बीजेपी वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश करना चाहती है?

देखिए, मैं एक 'पक्का हिंदू' हूं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अन्य धर्मों को सम्मान नहीं देता हूं. मैं सभी धर्मों का आदर करता हूं. मैं सभी धर्मों की आस्थाओं का सम्मान करता हूं. मेरा मानना है कि सभी धर्मों के लोगों को अपनी मान्यताओं के पालन और उनके प्रचार की आजादी होनी चाहिए लेकिन ऐसा हिंदुओं की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए. यह हिंदू धर्म ही है, जो सभी धर्मों और संप्रदायों को स्वीकार करता है और उन्हें समायोजित कर लेता है. यही वजह है कि मूल रूप से हिंदुओं से संबंधित होने के बावजूद इस भूमि पर अन्य धर्म भी खूब फल-फूल सके हैं.

हम हमारे संविधान और उसके कानूनों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मैं अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और समाज के अन्य वर्गों के लोगों से अक्सर मुलाकात करता रहता हूं. मेरी पूरी कोशिश रहती है कि मैं उन लोगों की समस्याओं का समाधान करूं जिसमें ज्यादातर मैं कामयाब भी हो जाता हूं. यही वजह है कि राज्य के हर वर्ग और हर समुदाय ने मुझे स्वीकार किया है. सभी को मुझ पर विश्वास है. हिंदू समाज आज मेरी ओर देख रहा है, उसने मुझ पर भरोसा दिखाया है. अपने मुद्दों को हल करने के लिए हिंदू समाज ने मुझ पर अपना विश्वास व्यक्त किया है. मुझे बताइए, क्या आप हिन्दू धर्म को हिंदुस्तान के नागरिक के तौर पर अनदेखा कर सकते हैं? हिंदुओं और हिंदू धर्म की चिंता करने का मतलब ध्रुवीकरण नहीं है.

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जुलाई 2018 में भड़काऊ भाषणों की वजह से आपको हैदराबाद से निर्वासित कर दिया गया था लेकिन सितंबर में जोरदार स्वागत के साथ शहर में आपकी वापसी हुई, इस पर आप क्या कहेंगे?

हां यह बात सच है. तेलंगाना पुलिस ने मुझे 6 महीने के लिए हैदराबाद शहर से निर्वासित करने का आदेश दिया था. हम उस आदेश के खिलाफ अदालत में चले गए और उसे चुनौती दी. नतीजतन, हैदराबाद हाईकोर्ट ने मेरे खिलाफ निर्वासन के आदेश को खारिज कर दिया. इस तरह की घटना मेरी जिंदगी में पहली बार हुई थी. मैं पिछले 25 सालों से समाज के हर वर्ग के साथ संपर्क में रहा हूं. मैं कभी किसी वर्ग या समुदाय के खिलाफ गलत बात नहीं करता हूं. यही वजह है कि मेरे खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है.

अपने सार्वजनिक भाषण में मैंने बाबरी मस्जिद के मुद्दे और बाबर, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के बारे में बात की थी. यह वे आक्रांता थे जिन्होंने हमारे देश की संपत्ति को लूटा था और बड़े पैमाने पर नरसंहार किया था. मैंने जो भी कहा था वह हमारे स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जाने वाली इतिहास की पाठ्य पुस्तकों का हिस्सा है. मैंने किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ बात नहीं की थी. इस घटना ने मुझे एहसास दिलाया कि एक आम हिंदू अपने ही देश में कितना असुरक्षित और असहाय है. राजनीति में आने और बीजेपी में शामिल होने के मेरे फैसले के पीछे यही कारण है.

तेलंगाना के लिए आपका एजेंडा क्या है? आपका पहला महत्वपूर्ण कदम क्या होगा?

राजनीति में अब लड़ाई 'बलिदानियों' और 'घोटालेबाजों' के बीच है. घोटालेबाजों ने राजनीति में रहकर दशकों तक लोगों का शोषण किया है और सार्वजनिक धन को हड़पा है. उन्होंने न तो हिंदुस्तान की परवाह की और न ही हिंदुओं की चिंता की लेकिन मैं गंभीर रूप से चिंतित हूं. मुझे हमारे देश के धर्म, संस्कृति और मूल्यों की बहुत फिक्र है क्योंकि इन संस्थानों पर निरंतर हमला होता आया है. अब उनकी रक्षा करने की सख्त आवश्यकता है. हिंदुस्तान में हिंदुओं के लिए कोई जगह नहीं बची है. सुप्रीम कोर्ट समेत भारतीय अदालतों में हिंदू धर्म के खिलाफ अनगिनत मामले चल रहे हैं. मेरा सबसे अहम एजेंडा हिंदुओं और उनके अधिकारों की आवाज बुलंद करना है. मैं हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बात करना चाहता हूं.

सरकार मुसलमानों और ईसाइयों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करती है लेकिन हिंदुओं को अपने ही देश में उचित धार्मिक आजादी नहीं मिल रही है. मंदिरों से लेकर गोशाला तक हर हिंदू संस्थान को सरकार और उसके नियमों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है. बीजेपी का नारा 'सबका साथ, सबका विकास' बेहद महत्व रखता है. यह नारा देश के हर वर्ग-समुदाय, धर्म-संप्रदाय, जाति-जनजाति के विकास की बात करता है. वास्तव में, यह नारा वैदिक मंत्र - 'ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सभी समृद्ध और प्रसन्न रहें) की अनुगूंज है. लिहाजा तेलंगाना में हमारा पूरा ध्यान समग्र विकास पर होगा क्योंकि अपने गठन के बाद से ही तेलंगाना राज्य के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. राज्य में बुनियादी ढांचे और संस्थागत संरचनाओं का पूरी तरह से अभाव है. ज्यादातर इलाके विकास से कोसों दूर हैं. ऐसे में तेलंगाना के लिए एक व्यापक विकास कार्यक्रम की आवश्यकता है.

2019 के लोकसभा चुनाव में आप हैदराबाद में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे? इस अफवाह में कितनी सच्चाई है?

मुझे पहले बीजेपी में शामिल तो होने दें. फिर नरेंद्र भाई (नरेंद्र मोदी) और अमित भाई (अमित शाह) जो काम मुझे सौंपेंगे, मैं उसे पूरी लगन और सामर्थ्य के साथ करूंगा. वे मेरे आर्किटेक्ट हैं और मैं उनके मार्गदर्शन के मुताबिक ही काम करूंगा. मैं सिर्फ पत्थर का एक टुकड़ा हूं. मूर्तिकार के रूप में, वे मुझे उचित रूप और आकार प्रदान करेंगे.

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