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'आप' के धरने में शामिल नहीं हुए KCR, लग रहे हैं धोखा देने के आरोप

केसीआर की गैर-मौजूदगी चौंकाने वाली है, क्योंकि वह विपक्षी नेताओं में से पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने 2019 के चुनाव के लिए संघीय मोर्चे का विचार पेश किया था

Updated On: Jun 17, 2018 06:51 PM IST

FP Staff

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'आप' के धरने में शामिल नहीं हुए KCR, लग रहे हैं धोखा देने के आरोप
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राजधानी में विपक्षी एकता का एक और शो तब देखने को मिला, जब क्षेत्रीय राजनीति के धुरंधर चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपना समर्थन दिया. केजरीवाल आईएएस अधिकारियों की हड़ताल के खिलाफ उप-राज्यपाल के ऑफिस में धरने पर बैठे हैं.

हालांकि, दिल्ली में होने के बावजूद तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने इस शक्ति प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया. ऐसे में उन पर 'धोखा' देने के आरोप लग रहे हैं.

केसीआर की गैर-मौजूदगी चौंकाने वाली है, क्योंकि वह विपक्षी नेताओं में से पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने 2019 के चुनाव के लिए संघीय मोर्चे का विचार पेश किया था. साथ ही परिवर्तन के लिए विकल्प के तौर पर क्षेत्रीय पार्टियों के समूह का प्रस्ताव रखा था.

पीएम मोदी से की थी मुलाकात

दिलचस्प बात यह है कि केसीआर ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तेलंगाना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने 10 मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री से बात की, जिसपर उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया.

वहीं तेलंगाना कांग्रेस टीआरएस प्रमुख पर बीजेपी एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप लगा रही है. टीपीसीसी अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा, 'केसीआर द्वारा प्रस्तावित संघीय मोर्चे का मकसद बीजेपी को लाभ प्रदान करना था. केसीआर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं. वह मोदी के सामने अपना मुंह खोलने से डरते हैं. वह केवल अपनी असफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए चाल चल रहे हैं.'

केसीआर सोच-समझकर उठा रहे हैं कदम

केसीआर एक अनुभवी राजनेता हैं, जो हर राजनीतिक कदम सोच-समझकर उठाते हैं. उनके कदम पर राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर के नागेश्वर ने कहा, 'स्पष्ट रूप से केसीआर मोदी सरकार के खिलाफ कोई ऐसा कदम नहीं उठाएंगे जिससे टकराव हो. अब चाहे वह एचडी कुमारस्वामी का शपथ ग्रहण समारोह हो या फिर 15वें वित्त आयोग को लेकर राज्यों की चिंताएं. केजरीवाल के मामले में, समर्थन देने वाली सभी पार्टियां गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेस थीं. खुद संघीय मोर्चे का विचार देकर इस गुट को अपना समर्थन न देने में उनका पाखंड दिखाई देता है.'

उन्होंने आगे कहा, 'तेलंगाना में बीजेपी का बड़ा आधार नहीं है. राज्य में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है. इसलिए बीजेपी के लिए सॉफ्ट कॉर्नर दिखाई देता है. अगले साल चुनाव आने वाला है इसलिए स्पष्ट है कि केसीआर कांग्रेस के साथ किसी गठबंधन के हिस्से के तौर पर नहीं दिखना चाहती.'

(न्यूज 18 से साभार)

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