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बिहार में तेजप्रताप का नया अवतार, अब 'चारे पर चर्चा' नहीं बल्कि पेश है 'टी विद तेजप्रताप'

तेजप्रताप की राजनीतिक महत्वाकांक्षा शायद उनके भीतर चाय की तरह उबल रही है तभी उन्हें ‘टी विद तेजप्रताप कैंपेन’ शुरू करने का आइडिया मिला

Updated On: Jul 03, 2018 07:12 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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बिहार में तेजप्रताप का नया अवतार, अब 'चारे पर चर्चा' नहीं बल्कि पेश है 'टी विद तेजप्रताप'

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप एक भोजपुरी फिल्म ‘अपहरण उद्योग’ में बिहार के मुख्यमंत्री की भूमिका निभा चुके हैं. हालांकि किसी कारणवश फिल्म रिलीज नहीं हो सकी. लेकिन मुख्यमंत्री के किरदार का ‘ट्रायल रन’ वो सिनेमाई पर्दे पर निभाने में कामयाब रहे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब रियल लाइफ में भी तेजप्रताप के भीतर सीएम बनने का सपना जोर मार रहा है?

दरअसल तेजप्रताप ने पीएम मोदी की चाय पर चर्चा की तर्ज पर बिहार में टी-कैंपेन की शुरुआत की है. उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र महुआ में ‘टी विद तेजप्रताप’ अभियान चलाया. इस कैंपेन के जरिए तेजप्रताप ने खुद को आरजेडी के ‘पोस्टर बॉय’ की तरह लॉन्च कर दिया है.

Tej Pratap

बात सिर्फ अभियान तक नहीं रही बल्कि उन्होंने पीएम मोदी को चैलेंज भी कर दिया है. तेजप्रताप से जब पीएम मोदी की 'चाय पर चर्चा' के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ‘चाय पर चर्चा के लिए मोदी जी को चाय कहां से नसीब होगी क्योंकि दूध तो हम देंगे नहीं.'

तेजप्रताप की ये चुटकी दरअसल यादवों के समर्थन का राजनीतिक दावा था. तेजप्रताप ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि पूरे देश में वो यादवों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और जब ग्वाले दूध ही नहीं देंगे तो राजनीति की चाय कहां से बनेगी?

तेजप्रताप ये जान चुके हैं कि उनकी हर ‘कलात्मक’ गतिविधि को मीडिया सुर्खियां बनाने में देर नहीं करता है और यही सुर्खियां उनकी लोकप्रियता बढ़ाने का काम करती हैं. तेजप्रताप अपने अलग-अलग रूप रंग और वेशभूषा के चलते सुर्खियों में रहते आए हैं. हाल ही में उनके ट्वीटर हैंडल पर उनकी एक ‘कमिंग सून’ फिल्म का पोस्टर भी रिलीज हुआ था. फिल्म का नाम है ‘रुद्रा, द अवतार’.

Rudra The Avtaar

इससे पहले महाशिवरात्रि के मौके पर उनका भगवान शिव के अवतार का रूप भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना था. लेकिन जब नए साल के मौके पर उन्होंने कन्हैया का रूप धारण कर गायों के बीच बांसुरी बजाई तो खुद पीएम मोदी को कहना पड़ गया था कि ‘आप तो कृष्ण-कन्हैया हो गए हैं’.

 

अब यही कृष्ण-कन्हैया बिहार की राजनीति में तूफान लाने के लिए नए अवतार में सामने आए हैं. तेजप्रताप में अब राजनीति के पक्के रंग दिखाई दे रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि वो अपनी अतीत की छवि से बाहर निकलकर खादीवादी नेता की वेशभूषा को पक्के तौर पर पहनने का मन बना चुके हैं. लेकिन सवाल उठता है कि पीएम मोदी की चाय पर चर्चा की नकल करने वाले तेजप्रताप के मन में आखिर चल क्या रहा है?

Tejpratap Yadav

एक तरफ वो अपनी चाय पर चर्चा की उपलब्धि को फेसबुक पर बढ़-चढ़ कर बता रहे हैं तो दूसरी तरफ एक दर्द भी बयां कर रहे हैं. फेसबुक में उन्होंने अपनी एक पोस्ट में लिखा कि वो किसी दबाव में राजनीति नहीं करना चाहते हैं और अगर परिवार में उनकी सुनवाई नहीं होती है तो वो राजनीति छोड़ देंगे.

फेसबुक पोस्ट के जरिए तेजप्रताप ने अपनी पीड़ा जताई तो लालू परिवार में वर्चस्व को लेकर ‘गृह-युद्ध’ का ट्रेलर भी दिखा दिया. वो ये भी बता रहे हैं कि किस तरह से कुछ लोग उनके खिलाफ एक सोची समझी साजिश के तहत दुष्प्रचार कर रहे हैं.

हालांकि बाद में फेसबुक से पोस्ट को डिलीट भी कर दिया गया. तेजप्रताप ने बीजेपी और आरएसएस पर फेसबुक अकाउंट को हैक करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी उनके परिवार और पार्टी में फूट डालने का काम कर ही है.

Patna: RJD chief Lalu Prasad with his son Tejashwi Yadav and Tej Pratap Yadav at a get-together in Patna on Sunday. PTI Photo (PTI12_10_2017_000072B)

लेकिन धुआं उठा है तो आग भी कहीं न कहीं तो लगी ही है. तेजप्रताप की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं उनके भीतर चाय की तरह उबल रही हैं तभी उन्हें ‘टी विद तेजप्रताप कैंपेन’ शुरू करने का आइडिया मिला. इसके जरिए तेजप्रताप खुद को बिहार के एक बड़े नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं. साथ ही दूध की बात कर वो खुद को ग्वालों के नए मसीहा के तौर पर भी दिखाना चाहते हैं.

लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद पार्टी की अनौपचारिक रूप से कमान तेजस्वी को सौंपे जाने से कहीं न कहीं तेजप्रताप का मन व्यथित है. जब उन्हें अपना राजनीतिक वजूद खतरे में दिखा तो राजनीति से संन्यास लेने की धमकी तक दे डाली ताकि पार्टी और परिवार के भीतर उनका दावा मजबूत हो सके.

हालांकि तेजप्रताप छोटे भाई तेजस्वी के साथ मतभेद की खबरों को महज अफवाह बताते हैं. वो खुद को कृष्ण और तेजस्वी को अर्जुन मानते हैं. लेकिन कर्मयुद्ध में कहीं न कहीं उनके भीतर भी राजनीति के उस ‘अप्राप्त’ पद को पाने की लालसा जरूर सांस भर रही है. इसके लिए वो वृंदावन में 3 दिन का एक गुप्त-अनुष्ठान भी करा चुके हैं. हालांकि अनुष्ठान का फल आने से पहले ही बिहार में सियासत की तस्वीर ऐसी बदली कि हाथ से राजपाट चला गया और सरकार गिराने वाले नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर बने रहे.

tejashwinitishkumar

आज लालू परिवार के केंद्र में नीतीश कुमार हैं और उन पर निशाना लगाने के लिए तेज और तेजस्वी में होड़ लगी हुई है. हाल ही में तेजप्रताप यादव ने कहा कि वो अपनी मां के घर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए ‘ नो एंट्री’ का बोर्ड लगवाना चाहते हैं. तेजप्रताप ने छोटे भाई तेजस्वी यादव के बयान के बाद ये तीर छोड़ा. तेजस्वी यादव ने महागठबंधन में नीतीश कुमार की वापसी को खारिज किया था तो तेजप्रताप ने उनके लिए नो एंट्री का बोर्ड लगाने की बात कर दी.

जाहिर तौर पर इससे पार्टी को यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि भले ही अनौपचारिक रूप से पार्टी की कमान तेजस्वी यादव के हाथ में है लेकिन तेजप्रताप का भी पार्टी में तेज कम नहीं हुआ है. तभी बीजेपी नेता सुशील मोदी ने लालू परिवार पर निशाना साधने में देर नहीं की और कहा कि लालू परिवार में पावर सेंटर की लड़ाई के चलते ऐसी बयानबाजियां हो रही हैं.

बहरहाल तेजस्वी ट्वीटर पर मोर्चा संभाले हुए हैं तो तेजप्रताप चाय पर चर्चा कर रहे हैं. देखने वाली बात होगी कि आने वाले समय में लालू परिवार की आंतरिक राजनीति किस मोड़ पर पहुंचती है.

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