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सोनिया गांधी ने तहलका विवाद में चिदंबरम को लेटर लिखकर किसकी मदद की थी?

एनडीए की सरकार के दौरान तहलका पत्रिका चलाने वाली फर्स्ट ग्लोबल कंपनी के खिलाफ कई जांच एजेंसियों ने कई मामले दर्ज किए थे

Updated On: Nov 07, 2017 10:20 AM IST

FP Staff

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सोनिया गांधी ने तहलका विवाद में चिदंबरम को लेटर लिखकर किसकी मदद की थी?

2004 में यूपीए सरकार आने के कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उस वक्त के वित्तमंत्री रहे पी चिदंबरम को एक लेटर लिखा था. तहलका विवाद से जुड़े इस लेटर में सोनिया गांधी ने इस प्रकरण की जांच कर उचित कार्रवाई किए जाने की सिफारिश की थी. अब इस लेटर को लेकर हितों के टकराव का मुद्दा उठ रहा है.

दरअसल एनडीए की सरकार के दौरान तहलका पत्रिका चलाने वाली फर्स्ट ग्लोबल कंपनी के खिलाफ कई जांच एजेंसियों ने कई मामले दर्ज किए थे. फर्स्ट ग्लोबल के प्रमोटर देविना मेहरा और शंकर शर्मा थे. यूपीए सरकार के सत्ता में आने के बाद देविना मेहरा और शंकर शर्मा ने सोनिया गांधी को लेटर लिखकर कहा था कि कई एजेंसियां अभी तक उन्हें परेशान कर रही हैं और उनकी दिक्कतों को दूर किया जाना चाहिए.

इस शिकायत के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उस वक्त के वित्तमंत्री पी चिदंबरम को लेटर लिखकर इस मामले में कार्रवाई करने की सिफारिश की थी. फर्स्ट ग्लोबल के पत्र को संलग्न करते हुए सोनिया गांधी ने अपने आधिकारिक लैटरहैड पर चिदंबरम को लिखा था कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर देखें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मामले में कोई अनुचित या गैरकानूनी व्यवहार नहीं किया जाए.

सोनिया गांधी के चिदंबरम को लेटर लिखने के अगले दिन चिदंबरम ने ईडी और सीबीडीटी के प्रमुखों को मिलने के लिए कहा. 4 दिन बाद यूपीए सरकार ने मंत्रियों के एक समूह का गठन किया. इसके 6 दिन बाद फर्स्ट ग्लोबल के खिलाफ जांच हटा ली गई. एनडीए सरकार के दौरान तहलका की कार्यशैली को लेकर चल रही प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियों की जांच रोक दी गई.

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तहलका ने किया था रक्षा सौदों में पैसों के लेनदेना का फंडाभोड़

तहलका पत्रिका ने ही अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार के दौरान रक्षा सौदों में कथित भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया था. जिसके चलते बाद में तत्कालीन रक्षा मत्री जार्ज फर्नाडिंस को त्यागपत्र देना था.

तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को कैमरे के सामने पैसे लेते हुए पकड़ा गया था और बाद में वह दोषी ठहराये गये थे. उस वक्त तहलका के संपादक तरुण तेजपाल थे, जो फिलहाल एक रेप केस के मामले में जमानत पर बाहर हैं.

इस भंडाफोड़ के बाद फर्स्ट ग्लोबल के प्रमोटर्स देविना मेहरा और शंकर शर्मा के खिलाफ विभिन्न जांच एजेंसियों ने कई मामले दर्ज किये थे.

अब यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी के लिखे लेटर, जिसमें इस मामले में उचित कार्रवाई को लेकर कहा गया था, के सामने आने के बाद हितों के टकराव का मुद्दा उठ गया है.

पी चिदंबरम ने अपना भेजा जवाब जारी करने को कहा

इस मामले के सामने आने के बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सुझाव दिया कि मीडिया को सरकार से उनका वह जवाब जारी करने के लिए कहना चाहिए जो उन्होंने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को लिखा था. सोनिया ने उनसे कथित रूप से आरोपों को देखने के लिए कहा था कि उस निजी फर्म फर्स्ट ग्लोबल को परेशान किया जा रहा है जो ‘तहलका’ की फंडिंग करती है.

मीडिया खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए चिदंबरम ने एक बयान में कहा, ‘पत्र पर मेरी नोटिंग सही है. मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि (वित्त) मंत्रालय की ओर से, मैंने एक पत्र भेजा होगा जो मेरे समक्ष रखी गयी सामग्री पर आधारित है. श्रीमती गांधी और मेरे उत्तर को एकसाथ पढ़ा जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘मेरा सुझाव है कि मीडिया को सरकार से पत्र का जवाब जारी करने के लिए कहना चाहिए’.

समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली ने इस मामले में कांग्रेस पर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि तहलका के ऑपरेशन वेस्ट इंड के पीछे कांग्रेस का हाथ था. इसी वजह से तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस को त्यागपत्र देना पड़ा था. जया जेटली ने अपनी आत्मकथा में  इसका दावा किया है. उनकी आत्मकथा मंगलवार को मार्केट में आ रही है.

( एजेंसी इनपुट के साथ )

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