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तमिलनाडु में इनकम टैक्स के छापे के पीछे की असली कहानी

शशिकला ने पार्टी और तमिलनाडु सरकार, दोनों की कमान संभाल ली तो फिर भी बीजेपी ज्यादा कुछ कर पाने की हालत में नहीं होगी

Updated On: Dec 23, 2016 08:59 AM IST

T S Sudhir

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तमिलनाडु में इनकम टैक्स के छापे के पीछे की असली कहानी

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) में घमासान मचा है. सूत्रों का कहना है कि जब से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेलवम मंगलवार को दिल्ली से लौटे हैं, तब से उनका रंग ढंग ही बदल गया है.

बताते हैं कि जिस भी विधायक से वह मिल रहे हैं, उससे यही कह रहे हैं कि उन्हें 'अम्मा ने नियुक्त किया था'.

अम्मा का वफादारी सर्टिफिकेट पन्नीरसेलवम के लिए आईएसआई मार्क जैसा तुरुप का पत्ता हो गया है. इसी के जरिए वह विधायक दल के बीच से एक सुर से उठने वाली आवाजों से लड़ सकते हैं.

ये आवाजें जयललिता की नजदीकी विश्वासपात्र वीके शशिकला को पार्टी की नेता बनाने के लिए उठ रही हैं.

पन्नीरसेलवम को यह कहते हुए बताया जा रहा है कि, 'शशिकला कैंप पार्टी का ख्याल रख सकते हैं, लेकिन अगले साढ़े चार साल तक सरकार मैं ही चलाऊंगा.'

पन्नीरसेलवम बहुत कम बोलते हैं और उनकी पहचान सिर झुकाकर आदेश मानने वाले व्यक्ति की रही है, इसलिए अब उनके बदले हुए सुर इस शक को बढ़ावा दे रहे हैं कि अब वही पटकथा लेखक और वही निर्देशक है.

लेकिन पन्नीरसेलवम एआईएडीएमके विधायक दल में अलग थलग पड़े नेता हैं. उन्हें पार्टी के अंदर अपने सिवा किसी का समर्थन हासिल नहीं है. उनके अपने मंत्री शशिकला को न सिर्फ पार्टी प्रमुख बल्कि मुख्यमंत्री बनाने के लिए भी जोर लगा रहे हैं.

पन्नीरसेलवम बनाम शशिकला

हालांकि यह बात सही है कि एआईएडीएमके के सभी विधायक और ताकतवर जिला सचिव शशिकला का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर सब पार्टी कार्यकर्ताओं में एक राय नही है.

जयललिता के निधन और खासकर शशिकला परिवार के सामने आने के बाद से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता इस परिवार के बढ़ते शिकंजे के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.

शशिकला और जयललिता

शशिकला और जयललिता

कभी चाय की दुकान चलाने वाले पन्नीरसेलवम ने मुख्यमंत्री बनने तक लंबा सफर तय किया है.

उन्होंने अपने कान इन्हीं कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर लगा रखे हैं. वह इतने बहरे भी नहीं है कि उन्हें अंसतोष की सरसराहट न सुनाई दे. तमिलनाडु के देहाती इलाकों और छोटे कस्बों में पार्टी कार्यकर्ताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है.

बहुत सी जगहों पर जहां पार्टी समर्थकों ने जयललिता और शशिकला के पोस्टर एक साथ लगाए थे, उनमें शशिकला के चेहरे को बाद में खराब कर दिया गया. बहुत संभव है कि इसमें खुराफाती लोगों का हाथ हो.

पोस्टरों के विपरीत, पार्टी के भीतर हवा पूरी तरह शशिकला के हक में बह रही है. नेतृत्व संभालने के लिए वह पार्टी में इकलौती पसंद दिखाई पड़ती हैं. यही उनका कैंप चाहता था.

दिसंबर के आखिरी हफ्ते में होने वाले आम परिषद की बैठक से पहले कोशिश यह हो रही है कि वार्ड और पंचायत स्तर पर बहुत सारी परिषदें शशिकला को पार्टी का नेता बनाने का प्रस्ताव रखें.

इन बैठकों में नेतृत्व को अंदाजा होगा कि उसे किससे निपटना है. ऐसा नहीं है कि शशिकला को अपने रास्ते में आने वाली सियासी बाधाओं का अंदाजा नहीं है.

जयललिता जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए बहुत हद तक पुलिस के खुफिया नेटवर्क पर भरोसा करती थीं.

शशिकला के पास लोगों के मिजाज को भांपने का दूसरा तरीका है. यह है कि उनके परिवार का नेटवर्क जो पार्टी के सियासी तानेबाने और उसकी हलचलों को खूब समझता है और विरोध से निपटना जानता है.

बीजेपी का गणित

बीजेपी एआईएडीएमके के भीतर तेजी से बदल रहे घटनाक्रम पर नजदीकी नजर बनाए हुए है. इस राष्ट्रीय पार्टी की तमिलनाडु में लगभग कोई मौजूदगी नहीं है. एआईएडीएमके सत्ता में बनी रहे, इससे जरूर बीजेपी के स्वार्थ जुड़े हैं.

अगर एआईएडीएमके की सरकार गिर जाती है तो फिर डीएमके सत्ता में आएगी. करुणानिधि एंड कंपनी के रहते बीजेपी के लिए कुछ कर पाना मुश्किल होगा. लेकिन भगवा पार्टी में शशिकला को लेकर भी चिंता में है.

फोटो. NarendraModi.in से साभार

सूत्रों का कहना है कि अगर शशिकला ने पार्टी और तमिलनाडु सरकार, दोनों की कमान संभाल ली तो फिर भी बीजेपी ज्यादा कुछ कर पाने की हालत में नहीं होगी. इसलिए वह चाहेगी कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पन्नीरसेलवम ही विराजमान रहें. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव एच राजा जैसे स्थानीय नेताओं ने तो अपने बयानों से पन्नीरसेलवम के पक्ष में माहौल बनाना भी शुरू कर दिया है.

इन सब हालात में तमिलनाडु में इनकम टैक्स विभाग और सीबीआई के हालिया छापे भी सियासी चश्मे से देखे जा रहे हैं. सितंबर में जयललिता के अस्पताल में भर्ती होने के बाद से मुख्य सचिव रामा मोहन राव को 'सुपर सीएम' के नाम से जाना जाता है.

पोएस गार्डन में भी उनकी खूब चलती है. यह बात संदेह से परे हैं कि राज्य के सबसे वरिष्ठ नौकरशाह के खिलाफ छापों के लिए अनुमति दिल्ली में ऊपर से आई होगी.

बाद में, शशिकला समर्थक एक मंत्री के एक करीबी के खिलाफ सलेम में छापों को भी दबाव बनाए रखने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है.

छापों में राजनीति नहीं

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ये छापे पूरी तरह राजनीति से ही प्रेरित हैं. सार्वजनिक कार्य विभाग के एक प्रभावशाली ठेकेदार शेखर रेड्डी के यहां छापे के दौरान 170 करोड़ रुपए कैश और 127 किलो सोना बरामद हुआ.

तमिलनाडु के मुख्य सचिव राम मोहन राव पर आयकर छापे की कारवाई के दौरान सचिवालय का नजारा. फोटो: पीटीआई

तमिलनाडु के मुख्य सचिव राम मोहन राव पर आयकर छापे की कारवाई के दौरान सचिवालय का नजारा. फोटो: पीटीआई

वैसे तमिलनाडु के राज्यपाल ने शेखर रेड्डी को दौलत से मालामाल तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड का सदस्य नामजद किया था. यही बोर्ड लॉर्ड बालाजी श्राइन को नियंत्रित करता है. सीबीआई ने बुधवार को रेड्डी को गिरफ्तार किया.

आयकर विभाग के अधिकारी तगड़े राजनीतिक कनेक्शन वाले रेड्डी से जुड़े सुरागों के तार जोड़ने की कोशिश कर रहे है ताकि कोई बड़ा भांडाफोड़ किया जा सके.

यह तो पक्का है कि 17 वरिष्ठ आईएएस अफसरों को पछाड़ कर इस साल जून में मुख्य सचिव बने रामा मोहन राव की कुर्सी चली गई. बुधवार को तमिलनाडु सचिवालय में मुख्य सचिव के दफ्तर में छापे पड़े. मुख्यमंत्री उस जगह से 200 मीटर भी दूर नहीं थे. अपने दफ्तर में काम कर रहे थे.

इससे बड़ी शर्मिंदी और भला क्या हो सकती है.  इनकम टैक्स विभाग की टीमें सीआरपीएफ के जवानों को साथ लेकर तमिलनाडु के सत्ता के केंद्र में दाखिल हो जाएं.

 

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