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2019 के लिए पूरी तरह तैयार हैं राहुल गांधी, ऐसे करेंगे प्रचार

2019 चुनाव के लिए कांग्रेस पूरी तरह तैयार है. इस बार पार्टी हिंदू वोट बैंक को भुनाने की पूरी कोशिश करेंगी

FP Staff Updated On: Oct 21, 2017 11:24 AM IST

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2019 के लिए पूरी तरह तैयार हैं राहुल गांधी, ऐसे करेंगे प्रचार

साल 2019 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी छवि बदलने में जुट गई है. वह बीजेपी को टक्कर देने के लिए अपने तरह के 'सॉफ्ट हिंदुत्व' को अपना रही है. पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों खासकर चुनावी राज्यों में हिंदू धर्म से जुड़े संकेतों का बखूबी इस्तेमाल कर रही है.

कांग्रेस के मीडिया स्ट्रेटजी सेल के सूत्रों ने बताया कि आगे से कांग्रेस उपाध्यक्ष जो भी यात्राएं शुरू करेंगे, चाहे वो राजनीतिक हों या फिर अन्य, उससे पहले वह मंदिरों में जाएंगे. वह चाहती है कि हिंदुत्व को लेकर उसकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे. इसलिए भी उसने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है.

इसी रणनीति के तहत राहुल ने द्वारिकाधीश मंदिर का दौरा किया. वहां उन्होंने प्रार्थना की. इसके बाद वह सुरेंद्रनगर में चोटिला मंदिर गए और खोडालधाम मंदिर का भी दौरा किया.

राहुल के गुजरात दौरे में उनके माथे पर चंदन के टीके वाली तस्वीर को कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम ने खूब प्रोमोट भी किया.

कांग्रेस के एक शीर्ष सूत्र का कहना है कि पार्टी को वैसा ही गेम खेलने की जरूरत है जैसा बीजेपी खेलती है. पार्टी को दिखाना होगा कि वह हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करती है. इसके अलावा पार्टी वर्तमान राजनीतिक माहौल को देखते हुए बेहद सोच विचार कर प्रतिक्रिया दे रही है.

इसका ताजा उदाहरण है दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया गया प्रतिबंध है. इस मसले पर पार्टी प्रवक्ता रणदीप सूरजेवाला ने बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी.

सुरजेवाला ने कहा था कि वनवास से राम के लौटने के उपलक्ष्य में दिवाली मनाई जाती है और इसलिए लोग पटाखे जलाते हैं. अगर सरकार कुछ सुधारात्मक कदम उठाती है तो प्रदूषण को कम किया जा सकता है.

जब बीजेपी बन गई सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी

साल 2014 में हार के बाद पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने अपनी आंतरिक रिपोर्ट में कहा था कि अपने वोटरों के प्रति उसके अत्याधिक झुकाव को अल्पसंख्यों के तुष्टीकरण के रूप में देखा गया. इससे बहुसंख्यक आबादी में यह संदेश गया कि पार्टी अल्पसंख्यकों की हितौषी बन गई है.

लगता है कि अब करीब तीन साल बाद कांग्रेस को एंटनी की रिपोर्ट में कुछ अच्छी चीजें दिखने लगी हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद भी यह बात सामने आई कि पार्टी के सपा के साथ जाने से बीजेपी को बहुसंख्यक आबादी के ध्रुवीकरण का मौका मिल गया.

कांग्रेस पार्टी के हिंदू वोट बैंक पर फोकस करने की रणनीति को देखते हुए बीजेपी ने राहुल गांधी पर हमला बोला है. पार्टी ने कहा है कि राहुल को मंदिरों का दौरा करने की बजाय अहम मुद्दे उठाने चाहिए. ऐसे में अब स्पष्ट है कि चुनावी राज्यों गुजरात, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में कांग्रेस 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के रास्ते पर ही चलेगी. वैसे मध्यमार्गी पार्टी कांग्रेस के लिए 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के रास्ते पर चलने से खतरा भी कम नहीं है.

80 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अयोध्या में राम मंदिर का दरवाजा खुलवाकर कुछ ऐसा ही किया था लेकिन उससे बीजेपी को फायदा हुआ और वह दो लोकसभा सीटों वाली पार्टी से 1989 में एक बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राहुल की स्थित राजीव जैसी नहीं होगी. ऐसा नहीं होगा कि न माया मिली न राम.

(न्यूज18 के लिए पल्लवी घोष की रिपोर्ट)

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