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कैराना में दो सियासी घरानों में टक्कर: 'बहू, बेटी' की लड़ाई में भारी पड़ी RLD

आरएलडी की तबस्सुम हसन जीतती हैं तो मौजूदा लोकसभा में वह यूपी से मुस्लिम प्रतिनिधित्व का एकमात्र चेहरा होंगी

FP Staff Updated On: May 31, 2018 01:53 PM IST

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कैराना में दो सियासी घरानों में टक्कर: 'बहू, बेटी' की लड़ाई में भारी पड़ी RLD

यूपी की कैराना लोकसभा सीट काफी अहम मानी जा रही है. ये सीट बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई थी. अब यहां जीत के लिए मुकाबला कैराना के दो परिवारों- हुकुम सिंह और अख्तर हसन के बीच है. एक तरफ हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह बीजेपी की टिकट पर चुनावी मैदान में हैं. दूसरी तरफ दिवंगत सांसद मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन आरएलडी के चुनाव चिह्न पर एसपी-बीएसपी-कांग्रेस-आरएलडी गठजोड़ की साझा उम्मीदवार हैं. ऐसे में इसे बहू और बेटी की लड़ाई भी कहा जा रहा है.

कैराना से आ रहे रुझानों के मुताबिक, तबस्सुम वहां 42000 से ज्यादा वोटों की बढ़त के साथ जीत की तरफ बढ़ती दिख रही हैं. उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर 2014 के चुनाव में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को जीत नहीं मिली है. ऐसे में अगर तबस्सुम जीतती हैं तो मौजूदा लोकसभा में वह यूपी से मुस्लिम प्रतिनिधित्व का एकमात्र चेहरा होंगी.

तबस्सुम कैराना से ही सांसद रह चुके अख्तर हसन की बहु और मुन्नवर हसन की पत्नी हैं. हसन परिवार कैराना की राजनीति का काफी पुराना खिलाड़ी रहा है. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद साल 1984 के चुनावों में सहानुभूति की लहर पर चढ़कर चौधरी अख्‍तर हसन ने बड़ी जीत दर्ज की. इससे पहले सिर्फ 1971 में ही कांग्रेस यहां से जीत सकी थी.

1996 के चुनावों में अख्तर के बेटे मुनव्‍वर हसन ने एसपी के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की लेकिन दो ही साल बाद बीजेपी ने इस सीट पर खाता खोला और वीरेंद्र वर्मा ने मुन्नवर को हरा दिया. इसके बाद ये सीट लगातार दो बार आरएलडी के खाते में रही. 2009 के लोकसभा चुनाव में मुन्नवर की पत्नी तबस्सुम ने बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंची.

ये सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता तबस्सुम और मुन्नवर के बेटे नाहिद हसन ने भी 2014 में हुकुम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा लेकिन 2 लाख से ज्यादा वोटों से हार गए. असल में ये हार परिवार की फूट का नतीजा थी. तब नाहिद हसन एसपी के टिकट पर और उनके चाचा कंवर हसन बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन दोनों को पराजय का सामना करना पड़ा था. नाहिद दूसरे जबकि चाचा कंवर तीसरे नंबर पर रहे थे.

हालांकि 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में नाहिद ने कैराना सीट पर हुकुम सिंह की बेटी मृगांका को 21 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर बदला चुका दिया था. नाहिद फिलहाल विधायक हैं और तबस्सुम पूर्व सांसद हैं. ये परिवार कांग्रेस, सपा और बीएसपी के बाद अब आरएलडी के टिकट पर भी चुनाव लड़ रहा है.

(न्यूज18 से साभार)

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