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नेशनल हेराल्ड केस: कांग्रेस के आरोप पर स्वामी का जवाब- मुझे ट्वीट करने का पूरा अधिकार है

मुझे ट्वीट याद नहीं है. मैंने अनगिनत ट्वीट किए हैं. और यह नहीं पता कि वोरा ने जिन ट्वीट्स का जिक्र किया है वो मेरे ही हैं

Updated On: Oct 20, 2018 08:50 PM IST

FP Staff

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नेशनल हेराल्ड केस: कांग्रेस के आरोप पर स्वामी का जवाब- मुझे ट्वीट करने का पूरा अधिकार है
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बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने शनिवार को दिल्ली की एक अदालत में नेशनल हेराल्ड मामले में अपने ट्वीट्स के जरिए कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोपों को खारिज कर दिया है. इसके साथ ही कहा कि कांग्रेस ने जिन ट्वीट्स के बारे में कहा है वैसा कोई भी सोशल मीडिया पोस्ट मुझे याद नहीं आता.

स्वामी, कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा की उस याचिका का जवाब दे रहे थे, जिसमें वोरा ने अदालत से नेशनल हेराल्ड मामले में स्वामी के ट्वीट करने पर रोक लगाने के आदेश की मांग की थी. नेशनल हेराल्ड केस में मोतीलाल वोरा, पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के साथ आरोपी हैं.

बीजेपी ने एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल को बताया कि वोरा ने जिन ट्वीट्स के बारे में कहा है उन्हें शक है कि उनके साथ छेड़छाड़ की गई होगी. लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मुझे ट्वीट करने का पूरा अधिकार है. स्वामी ने कहा कि मुझे ट्वीट याद नहीं है. मैंने अनगिनत ट्वीट किए हैं. और यह नहीं पता कि वोरा ने जिन ट्वीट्स का जिक्र किया है वो मेरे ही हैं.

ट्वीट कोई सबूत नहीं:

स्वामी ने आगे कहा कि 'कानून के तहत ट्वीट स्वीकार्य नहीं है. और न ही किसी आवेदन के लिए उन्हें सबूत के रूप में गिना जा सकता है. अगर मुझे नहीं पता कि सबूत क्या हैं, तो फिर मैं आगे कैसे आगे बढ़ूंगा? मुझे ट्वीट करने का पूरा अधिकार है. लेकिन आप जिस सबूत का दावा कर रहे हैं वो सबूत नहीं हैं क्योंकि वे प्रमाणित नहीं हैं.'

उन्होंने आगे तर्क दिया कि उनके ट्वीट अपमानजनक हैं इसका कोई सबूत नहीं है और इसलिए, वोरा के आवेदन को 'खारिज' कर दिया जाना चाहिए. भले ही ट्वीट सही हैं तब भी ये साबित करने के लिए वो ट्वीट अपमानजनक हैं कोई सबूत नहीं है. यह भ्रष्टाचार का मामला है. इसमें सार्वजनिक हित शामिल है.

वही वोरा के वकील आर एस चीमा ने कहा कि स्वामी ने आरोपों से लिखित तौर पर इंकार नहीं किया है. और जब हमने आरोप लिखित तौर पर दिए थे तब भी उन्होंने लिखित तौर पर आरोपों से इंकार नहीं किया था. यह कोर्ट की अवमानना है.

कोर्ट ने मामले में फैसला 17 नवंबर तक के लिए सुरक्षित कर लिया है.

 

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