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'चर्बी वाले प्लास्टिक नोट छाप कर 1857 की क्रांति को दोहराने की कोशिश न करे मोदी सरकार'

हिन्दू महासभा का आरोप, प्लास्टिक के नोटों में जानवारों की चर्बी का इस्तेमाल

Updated On: Dec 10, 2016 07:47 PM IST

FP Staff

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'चर्बी वाले प्लास्टिक नोट छाप कर 1857 की क्रांति को दोहराने की कोशिश न करे मोदी सरकार'

मोदी सरकार द्वारा 500 के प्लास्टिक वाले नोट छापने पर विरोध के सुर तेज होने लगे हैं. नोटबंदी से देश में मचे हाहाकार के बाद अब प्लास्टिक का नोट नया भूचाल ला सकता है.

अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने आरोप लगाया है कि प्लास्टिक के नोटों में जानवारों की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस बात का विश्वास दिलाएं कि भारत में छपने वाले प्लास्टिक नोट में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

चक्रपाणि ने कहा अगर ऐसा नहीं होता है तो हिन्दू महासभा मोदी सरकार के इस प्लास्टिक के नये नोट का पुरजोर विरोध करेगी.

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के नोट में जानवर की चर्बी के कारण ही ब्रिटेन कोर्ट में इसे लेकर विवाद चल रहा है.

चक्रपाणि ने कहा कि भारत एक धार्मिक देश है. यहां लोग मंदिरों में रुपए दान करते हैं. साधु-संतों के चरणों में समर्पित करते है. उन्होंने मोदी सरकार को चेताते हुए कहा कि 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ हुई पहली क्रांति चर्बी वाले कारतूस को लेकर ही हुई थी. अब मोदीजी उसे फिर से दोहराने की कोशिश न करें.

ऐसे में अगर सरकार चर्बी वाले नोट छापने का निर्णय लेती है तो इसका उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा ब्रिटेन में प्लास्टिक के नोट छापने के बाद वहां भी विरोध हुआ. जिसके बाद कोर्ट ने इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि गाय और सूअर की चर्बी से बनने वाले इस नोट को सरकार भारत में लागू करने जा रही. यह फैसला हिन्दू और मुसलमानों की भावनाओं को आहत करने वाला है. क्या है मामला?

नोटबंदी के बाद सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जल्द ही पोलीमर या प्लास्टिक के नोट छापे जाएंगे. इसके लिए कनाडा से सामग्री भी मंगाई जा रही है. इन नोटों की खासियत यह होती है कि इनका नक़ल करना असंभव है. इतना ही नहीं इनका जीवन भी ज्यादा होगा और सरकार को बार-बार नोट छापने से होने वाले खर्च से भी रहत मिलेगी.

प्लास्टिक के नोट आज 32 देशों में प्रचलन में हैं. ब्रिटेन में भी प्लास्टिक के 500 पौंड बाजार में आए. जिसका विरोध किया गया क्योंकि इसमें कम मात्रा में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया जाता है. चर्बी की वजह से इन नोटों की चमक बरकरार होती है. इन्हें बनाने वाली कंपनियों के अनुसार इसमें, गाय, सूअर, या भैंसे की चर्बी मिलाई जाती है जिससे इसकी स्मूथनेस और मजबूती बनी रहे. (अमित तिवारी, प्रदेश18 से साभार)

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