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'सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाते वक्त 20 मीटर दूर थे सबके फोन'

पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा, 'ऐसा इसलिए किया गया था ताकि योजना से जुड़ी कोई भी बात लीक न हो'

Bhasha Updated On: Dec 10, 2017 11:46 AM IST

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'सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाते वक्त 20 मीटर दूर थे सबके फोन'

देश के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का जिक्र करते हुए एक रोचक खुलासा किया है. गोवा की राजधानी पणजी में शनिवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हमले की योजना बनाने के दौरान सभी मोबाइल फोन बंद कर दिए गए थे.

उन्होंने कहा, 'वो गोपनीयता में यकीन रखते हैं. लेकिन जब आप किसी भी अलग व्यक्ति से बात करते हैं तो गोपनीयता नहीं बची रहती है. वाकई, सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाते समय मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर 20 मीटर दूर रख दिए गए थे. ताकि इससे जुड़ा कुछ भी लीक न हो.’

पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा, ‘लेकिन जब आप किसी को नहीं बताते हैं तो आपके अंदर दबाव बढ़ता है. सामान्यत: दबाव किसी दोस्त से चर्चा कर हल्का होता है लेकिन रक्षा में आप ऐसी स्थिति में नहीं होते हैं कि आप किसी मुद्दे पर किसी से बात करें. चाहे म्यांमार का सर्जिकल स्ट्राइक हो या पीओके का. मैं दबाव के कारण करीब-करीब सो नहीं पाया था.’

उन्होंने कहा, ‘और मुझे बस ये कहने में बड़ा गर्व होता है कि मैंने उरी (आतंकवादी हमले) और सर्जिकल स्ट्राइक के बीच करीब 18-19 बैंठकें की होंगी, जिनमें सेना के शीर्ष अधिकारी, रक्षा मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे, लेकिन कुछ लीक नहीं हुआ.’

दुनिया के नेता मोदी के बारे में सम्मान से बात करते हैं 

रक्षा मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की सफलता में ‘बैकरूम’ की भूमिका निभाता है. गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पणजी गोवा कला और साहित्य उत्सव में बोल रहे थे. यहां उन्होंने रणनीतिक विश्लेषक नितिन गोखले की पुस्तक ‘सेक्युरिंग इंडिया द मोदी वे’ लांच की.

पर्रिकर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने जो कुछ किया, वो कल्पना से परे था. उन्होंने प्रवासी भारतीयों को सक्रिय बनाया और विभिन्न देशों में अपनों की एक दुनिया रची’. उन्होंने देखा है कि कैसे दूसरे देशों के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री मोदी के बारे में कितनी सम्मान के साथ बात करते हैं.

पर्रिकर ने कहा कि मोदी ने असली मित्रता रची और उन्हें ये कहते हुए गर्व होता है कि बतौर रक्षा मंत्री वो उसका हिस्सा थे. क्योंकि विदेशी कूटनीति बस विदेश मंत्रालय की चीज नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘विदेश मंत्रालय विदेश नीति का चेहरा होता है, रक्षा (मंत्रालय के अधिकारी) बैकरूम के कर्ता होते हैं. रक्षा मंत्रालय असल (क्रियान्वयन) काम करता है जो किया जाना चाहिए.’

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