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कचरे के निपटारे पर सख्त हुआ SC, इन राज्यों में कंस्ट्रक्शन पर लगाई रोक

पीठ ने कहा कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और चंडीगढ़ सहित कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत दो साल बाद भी कोई नीति तैयार नहीं की है

Updated On: Sep 01, 2018 02:42 PM IST

Bhasha

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कचरे के निपटारे पर सख्त हुआ SC, इन राज्यों में कंस्ट्रक्शन पर लगाई रोक
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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राज्यों द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन नीति तैयार नहीं करने पर उन्हें फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों में ये नीति तैयार होने तक निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है.

जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर उनके इस रवैये को लेकर जुर्माना भी लगाया. पीठ ने कहा, 'अगर वे चाहते हैं कि लोग गंदगी और कूड़े कचरे के बीच रहे तो फिर क्या किया जा सकता है.'

पीठ ने कहा कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और चंडीगढ़ सहित कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत दो साल बाद भी कोई नीति तैयार नहीं की है.

केंद्र को भी यह मालूम नहीं है कि राज्य ने इस बारे में नीति तैयार की है या नहीं

पीठ ने कहा, 'अगर इन राज्यों के मन में जनता के हित और स्वच्छता का विचार होता तो उन्हें ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के अनुरूप नीति तैयार करनी चाहिए ताकि राज्य में स्वच्छता रहे. राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों का दो साल बाद भी नीति तैयार करने के मामले में रवैया दयनीय है.'

राजधानी में 2015 में डेंगू से ग्रस्त सात साल के बच्चे की दर्दनाक मृत्यु की खबर का न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया था और इस मामले की सुनवाई के दौरान कचरे के प्रबंधन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था.

इसके बाद से अदालत ठोस कचरा प्रबंधन के मामले पर भी गौर कर रही है. इस मामले में सुनवाई के दौरान न्यायालय के निर्देशानुसार हलफनामा दाखिल नहीं करने पर पीठ ने आंध्र प्रदेश पर पांच लाख रुपए का जुर्माना और टिप्पणी की कि केंद्र को भी यह मालूम नहीं है कि राज्य ने इस बारे में नीति तैयार की है या नहीं.

कचरा नीति तैयार नहीं करने पर तीन तीन लाख रुपए का जुर्माना

पीठ ने राज्य की कचरा नीति तैयार नहीं करने और न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और केन्द्र शासित चंडीगढ़ पर भी तीन तीन लाख रुपए का जुर्माना किया.

न्यायालय ने कहा कि इन राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों पर लगाए गए जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा करायी जाये. इस राशि का उपयोग किशोर न्याय मसलों के लिए होगा.

पीठ ने कहा कि बिहार, तमिलनाडु और अरूणाचल प्रदेश सहित राज्यों ने दस जुलाई को उन पर लगाए गए जुर्माने की रकम जमा करा दी है. न्यायालय इस मामले में अब नौ सितंबर को आगे सुनवाई करेगा.

केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने शुक्रवार को सुनवई के दौरान ठोस कचरा प्रबंधन के बारे में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से केन्द्र को मिला विवरण पीठ के समक्ष पेश किया.

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