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जनवरी में SC में सुनवाई के दौरान अयोध्या विवाद सुलझाने का प्लान पेश करेगी मोदी सरकार!

बीजेपी नेतृत्व अभी तक, राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश या कानून बनाने की वीएचपी-आरएसएस की मांग पर प्रतिबद्ध नजर नहीं आया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में पूर्वानुमानित रुख 2019 लोकसभा चुनावों से पहले इस विवाद पर निर्णय पाने का अंतिम मौका हो सकता है

Updated On: Dec 24, 2018 10:25 AM IST

FP Staff

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जनवरी में SC में सुनवाई के दौरान अयोध्या विवाद सुलझाने का प्लान पेश करेगी मोदी सरकार!

केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर पर जल्द सुनवाई की अपील करेगी. केंद्र के वरिष्ठ विधि अधिकारी (लॉ अफसर) कोर्ट में राम जन्मभूमि टाइटल विवाद में अपनी बात मजबूती से रखने की तैयारी में हैं. वो उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला सुलझाने को लेकर दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं.

जनवरी में कोर्ट में सुनवाई के लिए जब यह मामला आएगा तो संभावना है कि यह तर्क दिया जा सकता है कि वर्ष 2010 से ही यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में चला आ रहा है. आजादी मिलने के फौरन बाद से ही राम मंदिर पर यह दावा किया जा रहा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार यह कड़ा रूख राज्य सरकार और मोदी सरकार की उस सहानुभूति को भी दर्शाएगा, जिसे विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मजबूत समर्थन के साथ- अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की अपनी मांग को फिर से पिछले दिनों मजबूती से उठाया है. उसने इस मसले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय सुनाने में टाल-मटोल रवैये की आलोचना की थी.

2019 लोकसभा चुनावों से पहले इस विवाद पर निर्णय पाने का अंतिम मौका हो सकता है 

बीजेपी नेतृत्व अभी तक, राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश या कानून बनाने की वीएचपी-आरएसएस की मांग पर प्रतिबद्ध नजर नहीं आया है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपेक्षित (पूर्वानुमानित) रुख 2019 लोकसभा चुनावों से पहले इस विवाद पर निर्णय पाने का अंतिम मौका हो सकता है. साथ ही इसकी मांग उठाने वाले हिंदू 'संत समाज' की मांगों को भी यह पूरा कर सकता है.

ram mandir sc

भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि विधि अधिकारी इस आधार पर इस मामले की नियमित सुनवाई के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं कि विवाद को नहीं सुलझाना सभी पक्षों के लिए अनुचित था और हकीकत में, समुदायों के बीच मैत्री (सौहार्द) पर प्रतिकूल असर डाल सकता था.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर विवाद मामले में सुनवाई जनवरी 2019 तक के लिए टाल दी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि जनवरी में उपयुक्त पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. इस पर वीएचपी-आरएसएस समेत अन्य हिंदूवादी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना करार देकर उसकी कड़ी आलोचना की थी.

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