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सुपर ब्लू मून: सूर्य ग्रहण से ज्यादा हानिकारक है चंद्रग्रहण

जिस चांद को लेकर कवियों ने तमाम कल्पनाएं की हैं, धार्मिक मान्यताओं में उसे अच्छा नहीं माना गया

Updated On: Jan 31, 2018 06:47 PM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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सुपर ब्लू मून: सूर्य ग्रहण से ज्यादा हानिकारक है चंद्रग्रहण

आज सुपरब्लू ब्लड मून है. मतलब चंद्रग्रण के साथ ही सुपर मून भी है और एक ही महीने में दो पूर्णिमाएं पड़ रही है. ये संयोग दुर्लभ है मगर पूर्ण सूर्य ग्रहण जितना नहीं. आइए विज्ञान के हिसाब से ग्रहण की गाथा समझ लेते हैं.

वन्स इन अ ब्लू मून

नीला चांद नीला नहीं होता है. ये अंग्रेजी साहित्य का मुहावरा है. जब एक महीने में दो पूरनमासी हों तो उसे ब्लू मून कहते हैं. ऐसा तब होता है जब पूर्णिमा किसी महीने की पहली तारीख को पड़ जाए. ऐसा होने पर दूसरी पूर्णिमा 30 या 31 तारीख को पड़ती है. इसे ब्लू मून कहते हैं. इस बार 1 जनवरी को पूर्णिमा थी. अब माघी पूर्णिमा है. इसलिए ये ब्लू मून हो गया.

आंखों पर नहीं दिमाग पर असर

ग्रहण को लेकर दुनिया भर में कई मान्यताएं हैं. ऐसा माना जाता है कि राहू और केतु के चलते चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण पड़ता है. इस तरह के विश्वास में कुछ-कुछ विज्ञान भी शामिल है.

सूर्य ग्रहण आंखों के लिए बहुत खतरनाक होता है. आप ग्रहण नंगी आंखों से नहीं देख सकते. वैसे आप सूरज को भी नंगी आंखों से नहीं देख सकते हैं. होता ये है कि ग्रहण के समय सूरज की चमक अचानक से बहुत कम से तेज हो जाती है. इसके चलते देखने वाले की आंखों की रौशनी खराब हो सकती है. इसीलिए आंखों पर फिल्टर लगाकर सूर्य ग्रहण देखा जाता है.

जबकि चांद को देखने में ऐसा कोई खतरा नहीं होता. इसलिए चंद्र ग्रहण देखना बहुत सामान्य है. जब कभी आपको चांद पूरी तरह या कुछ लाल दिखे तो वो चंद्र ग्रहण है.

ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को सूर्य ग्रहण से ज्यादा खतरनाक माना गया है. दरअसल किसी भी पूर्णिमा को जब चांद धरती के सबसे करीब होता है तो लोगों की दिमागी समस्याएं बढ़ जाती हैं. इसीलिए मानसिक रोगियों को ल्यूनेटिक्स कहा जाता है. चांद का गुरुत्वाकर्षण धरती के पास होने पर उसपर थोड़ा असर डालता है. इस असर से बहुत कुछ नहीं होता मगर समुद्र में ज्वार आने जैसी घटनाएं होती हैं.

हालांकि इस बदलाव का असर अलग-अलग लोगों पर अलग होता है. इसी के चलते कुछ लोग खुद को अधिक सक्रिय महसूस करते हैं, कुछ को समस्याएं होती हैं. ऐसे ही कारणों से ज्योतिषियों ने ग्रहण को लेकर कई धारणाएं बनाई होंगी.

सुपर मून और ग्रहण

super blue blood moon

जब हम सुपर मून शब्द सुनते हैं तो लगता है कि आज चांद कुछ चौहदवीं का चांद गाने जैसा दिखेगा. मगर ऐसा होता नहीं है. सुपर मून का मतलब है चांद बाकी किसी पूर्णिमा से कुछ प्रतिशत ही बड़ा दिखता है. ये अंतर नंगी आंखों से अक्सर महसूस ही नहीं होता है.

वैसे चंद्र ग्रहण अक्सर होने वाली चीज़ है. क्योंकि सूरज चांद से बहुत बड़ा है. इसलिए एक ही स्थिति में आने पर चांद सूरज को ढक सकता है. कुछ वैसे ही जैसे आप अपनी आंख के ठीक सामने अंगूठा रखकर चांद को छिपा सकते हैं.

धरती चांद से काफी बड़ी है. इसलिए जब उसकी छाया चांद पर पड़ती है तो उसे किसी खास ऐंगल पर होना जरूरी नहीं होता. इसके चलते चंद्र ग्रहण गाहे-बगाहे होते रहते हैं.

चांद को लेकर दुनिया भर के धर्म और साहित्य में कई बाते कहीं गई हैं. भारतीय पुराण चंद्रमा को लंपट और गुरू की पत्नी का भोग करने वाला बताते हैं. मगर वही चंद्रमा शिव के माथे पर भी सुशोभित होता है. इसी तरह वेस्ट में पूरे चांद की रात में इंसान का जानवर बन जाना खूब लिखा गया है. इसके अलावा चंदा और चांदनी वाली तमाम कविताएं और गाने तो हैं ही.

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