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'भारत छोड़ो' आंदोलन के बाद अब हो 'भारत जोड़ो' आंदोलन: सुमित्रा महाजन

सुमित्रा महाजन के मुताबिक अब कहना होगा कि सुराज मेरा परम कर्तव्य है और मैं उसे पूरा करूंगा ही

Bhasha Updated On: Aug 09, 2017 04:40 PM IST

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'भारत छोड़ो' आंदोलन के बाद अब हो 'भारत जोड़ो' आंदोलन: सुमित्रा महाजन

1942 के ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन ने देश में ‘भारत जोड़ो’ आंदोलन चलाने की जरूरत बताई है.

सुमित्रा महाजन ने कहा कि एक ऐसा आंदोलन चलाना चाहिए जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के सभी हिस्सों में चलाया जाए ताकि एक संगठित भारत का निर्माण किया जा सके.

लोकसभा स्पीकर ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जिससे समावेशी विकास हो. हमें विकास के लाभों को देश के सभी भागों तक पहुंचाना है और अभाव को दूर करने के लिये कड़ी मेहनत करनी है.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि गरीबों की ओर सबसे पहले ध्यान दिया जाना चाहिए जिसे एक प्रकार से पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने दोहराया था कि पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है. यही अंत्योदय की कल्पना है.

'स्वराज के बाद अब चाहिए सुराज'

सुमित्रा महाजन ने कहा, 'लोकमान्य तिलक ने कहा था कि स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर रहूंगा. अब हमारे लिए भी यह कहना आवश्यक है कि सुराज मेरा परम कर्तव्य है और मैं उसे पूरा करूंगा ही.'

उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के 70 वर्ष पूरे होने और स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 'भारत छोड़ो आंदोलन' के 75 वर्ष पूरे होने पर उन क्षणों को सभा के सभी सदस्यों और देश के लोगों के साथ फिर से याद करते हुए मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है.

'महात्मा गांधी ने दिया था करो या मरो का नारा'

लोकसभा स्पीकर ने आगे कहा कि 8 अगस्त 1942 को देर शाम मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में 'भारत छोड़ो आंदोलन' का प्रस्ताव पेश हुआ था. उसी रात को ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगी.

90 मिनट के भाषण में महात्मा गांधी ने स्पष्ट कर दिया था कि 'करो या मरो'. उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता यह थी कि इस आंदोलन ने देश के बुद्धिजीवियों के साथ-साथ गांव, देहात के करोड़ों किसानों, मजदूरों एवं नौजवानों की चेतना को झकझोरा और उन्हें प्रत्यक्ष रूप से इस स्वतंत्रता संग्रमा से जोड़ा.

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