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ये सृजन घोटाला है जिसने नीतीश और BJP के बीच दूरियां बढ़ाईं

जिस तरीके से सीबीआई सृजन घोटाले को संभाल रही है, उससे जेडीयू नेतृत्व खुश नहीं है. एफआईआर में 'अनाम लोगों' के नाम ने जेडीयू और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ाई है

Updated On: Jun 29, 2018 03:15 PM IST

FP Staff

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ये सृजन घोटाला है जिसने नीतीश और BJP के बीच दूरियां बढ़ाईं

21 जून को विश्व योग दिवस से पहले तक बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच सब कुछ सामान्य था. अचानक 15 जून को जेडीयू नेताओं ने प्रेस में बयान देना शुरू किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार योग दिवस पर पटना में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ मंच साझा नहीं करेंगे. अंत-अंत तक एनडीए के दोनों दलों में खटपट इतनी बढ़ गई कि जेडीयू ने सार्वजनिक ढंग से ऐलान कर दिया कि मुख्यमंत्री योग दिवस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे.

योग दिवस बीतते-बीतते मामला और गंभीर हो गया और जेडीयू ने सीट शेयरिंग को लेकर मोल-मोलाई शुरू कर दी. यहां तक कह डाला कि 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने जेडीयू को उपयुक्त सीटें नहीं दीं तो गठबंधन टूट भी सकता है. जेडीयू की यह भी मांग है कि सीटें 2015 आम चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर बांटी जाएं.

जानकारों की मानें तो योग दिवस में नीतीश कुमार का शामिल न होना एक तरह से बीजेपी पर दबाव की रणनीति थी. कह सकते हैं कि सीटों को लेकर मोल-मोलाई के चक्कर में सीएम नीतीश कुमार योग दिवस में शामिल नहीं हुए लेकिन इसका एक और पहलू है. फर्स्टपोस्ट के मुताबिक दोनों पार्टियों में तनाव की वजह सृजन घोटाले में दर्ज एफआईआर भी है.

योग दिवस से ठीक कुछ दिन पहले 13 जून को 880 करोड़ रुपए के सृजन घोटाले में सीबीआई ने चार प्राथमिकी दर्ज की. और 15 जून आते-आते जेडीयू के नेताओं ने ऐलान करना शुरू कर दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार योग दिवस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे.

इस वजह से बढ़ी दूरी

सूत्रों की मानें तो जिस तरीके से सीबीआई सृजन घोटाले को संभाल रही है, उससे जेडीयू नेतृत्व खुश नहीं है. एफआईआर में कुछ एनजीओ और बैंक अधिकारियों के नाम हैं लेकिन इसी में कुछ 'अनाम लोगों' के खिलाफ भी केस दर्ज किए गए हैं. जैसा कि सूत्र बताते हैं, सीबीआई लिस्ट मे इन्हीं 'अनाम लोगों' ने जेडीयू और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ाई है.

सृजन घोटाला जब से सामने आया है तब से जेडीयू के कुछ नेताओं के खिलाफ आरोप तेज हो गए हैं. सीबीआई की एफआईआर में एक स्थानीय जेडीयू नेता शिव कुमार मंडल भी आरोपी है जिसे पार्टी ने बाद में निकाल दिया. सूत्रों की मानें तो मंडल का नाम इस घोटाले में बस पेड़ की फुन्गी भर है. आगे मुमकिन है कि इस केस में जेडीयू के बड़े-बड़े नेताओं के नाम सामने आएं.

चुनावों से पहले हो सकता है कि इन 'अनाम लोगों' के नाम सामने आएं जो बिहार में लोकसभा चुनावों की दशा-दिशा बदल दें.

(फर्स्टपोस्ट इंग्लिश में कुमार बादल की छपी रिपोर्ट पर आधारित)

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